वन विभाग के बाबू पर वसूली का आरोप: DFO दफ्तर का घेराव करने कल रामनगर पहुंचेंगे चकिया-नौगढ़ के कर्मचारी

 

काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को परमानेंट करने के नाम पर बाबू द्वारा वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं। इसके विरोध में कल 23 जून को चकिया और नौगढ़ के कर्मचारी DFO कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।

 
 

वन विभाग के बाबू पर गंभीर आरोप

कल डीएफओ दफ्तर का होगा घेराव

चकिया और नौगढ़ से जुटेंगे कर्मचारी

विनियमितीकरण के नाम पर वसूली का दावा

प्रदेश अध्यक्ष ने उठाए तीखे सवाल

काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। विभाग के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और कथित भ्रष्टाचार अब खुलकर सड़कों पर आने को तैयार है। कल यानी 23 जून (मंगलवार) को चकिया और नौगढ़ क्षेत्र से भारी संख्या में वन कर्मचारी रामनगर स्थित डीएफओ (DFO) कार्यालय पहुंच रहे हैं। कर्मचारी वहां अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे, जिसकी घोषणा से ही पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।

बाबू की ताकत और डीएफओ की चुप्पी पर सवाल
कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि विभाग के ही एक तथाकथित बाबू ने पूरे सिस्टम को अपने जकड़ में ले रखा है। आखिर एक अदना सा बाबू इतना ताकतवर कैसे हो गया कि लगातार मिल रही शिकायतों के बाद भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है? "रुपया दो तब होगा विनियमितीकरण" यानी परमानेंट करने के नाम पर खुलेआम खेल चल रहा है। इस पूरे मामले पर डीएफओ साहब की चुप्पी ने अब कई गंभीर और तीखे सवालों को जन्म दे दिया है।

चकिया और नौगढ़ के कर्मचारी करेंगे घेराव
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी संघ ने अपनी रणनीति बिल्कुल साफ कर दी है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से लटके विनियमितीकरण और कर्मचारियों की अन्य जायज मांगों पर अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसी वजह से चकिया और नौगढ़ क्षेत्र के सभी कर्मचारी एकजुट हो गए हैं। कल होने वाला यह प्रदर्शन सिर्फ एक सामान्य धरना नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक मनमानी और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ कर्मचारियों का सीधा हल्लाबोल है।

प्रदेश अध्यक्ष ने पूछा- किसका संरक्षण प्राप्त है?
इस मामले में हरित सामाजिक सेवा संस्थान उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष रमाशंकर सिंह यादव ने भी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने डीएफओ को एक बेहद तीखा पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने सीधे पूछा कि जब आपकी नाक के नीचे इस तरह की वसूली हो रही है, तो आप चुप क्यों हैं? कार्रवाई कब की जाएगी? उन्होंने आरोप लगाया कि बाबू के खिलाफ कई बार सबूतों के साथ शिकायतें भेजी गईं, लेकिन उसे किसी बड़े अधिकारी का संरक्षण मिला हुआ है, जिसके कारण उसकी कुर्सी बची हुई है।

कल का दिन वन विभाग के लिए बेहद निर्णायक
कर्मचारियों और उनके संगठन का साफ कहना है कि बात अब सिर्फ नौकरी परमानेंट करने की नहीं रह गई है, बल्कि यह लड़ाई विभाग की जवाबदेही और ईमानदारी की बन चुकी है। अधिकारियों की लापरवाही ने ही कर्मचारियों के सब्र का बांध तोड़ा है। अब 23 जून का दिन वन विभाग के प्रशासनिक अमले और आंदोलनकारी कर्मचारियों के बीच सीधे टकराव का गवाह बनने जा रहा है। देखना होगा कि डीएफओ साहब कल कोई ठोस समाधान निकालते हैं या फिर यह आंदोलन उग्र रूप लेता है।