वाह रे चंदौली का वन विभाग! कागजों में हरे-भरे हुए करोड़ों पौधे, इस साल भी 70 लाख पौधरोपण का लक्ष्य

चंदौली में इस साल फिर 70 लाख नए पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। हालांकि, पिछले अभियानों में रोपे गए लाखों पौधे देखरेख के अभाव और जंगलों की आग में नष्ट हो चुके हैं। जियो टैगिंग में भी विभाग फिसड्डी साबित हो रहा है।

 

कागजों में करोड़ों पौधे हरे-भरे

इस बार 70 लाख का लक्ष्य

संरक्षण के अभाव में सूखे पौधे

जियो टैगिंग में विभाग फिसड्डी

जंगलों की आग से भारी नुकसान

चंदौली जिले में मानसून सत्र के आगमन के साथ ही बड़े पैमाने पर पौधरोपण कर समूचे जनपद को हरा-भरा बनाने की प्रशासनिक कवायद एक बार फिर शुरू हो गई है। हालांकि, हकीकत के धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। जिले में कागजों पर तो करोड़ों पौधे आज भी पूरी तरह हरे-भरे और सुरक्षित दर्ज हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पिछले सत्रों में रोपित किए गए अधिकांश पौधे या तो पूरी तरह गायब हो चुके हैं या पानी और देखरेख के अभाव में सूख गए हैं। इस बड़ी लापरवाही के बीच शासन की ओर से इस बार भी जिले को करीब 70 लाख नए पौधे लगाने का भारी-भरकम लक्ष्य सौंप दिया गया है।

चकिया और नौगढ़ की 32 नर्सरियों में पौधे तैयार, 30 विभागों को मिला लक्ष्य
इस विशाल पौधरोपण अभियान को सफल बनाने के लिए वन विभाग द्वारा अपनी नर्सरियों में युद्धस्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। जिले के चकिया और नौगढ़ क्षेत्र की कुल 32 सरकारी नर्सरियों में अलग-अलग प्रजातियों के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इस अभियान में पंचायती राज विभाग सहित कुल 30 अन्य सरकारी विभागों को शामिल कर उनके लिए अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इन नर्सरियों में छायादार, फलदार और औषधीय गुणों से युक्त प्रजातियों के पौधों को तैयार किया जा रहा है, जिन्हें विशेष अभियान चलाकर विभिन्न चिन्हित स्थानों पर रोपा जाएगा।

संरक्षण के अभाव में दम तोड़ रहे पौधे, जियो टैगिंग में भी अधिकारी फिसड्डी
पौधरोपण अभियान की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि रोपण के बाद पौधों के संरक्षण पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। वन विभाग का दावा है कि वह अपने स्तर पर लगाए गए पौधों को बचा लेता है और सूखने पर बीट कर्मचारी वहां नए पौधे लगा देते हैं, लेकिन अन्य विभाग केवल कोरम पूरा करने के लिए पौधरोपण करते हैं। इस लापरवाही को रोकने के लिए शासन ने सभी रोपे गए पौधों की अनिवार्य रूप से 'जियो टैगिंग' करने के कड़े निर्देश दिए थे। इस निर्देश के एक साल बीत जाने के बाद भी अधिकांश विभागों के अधिकारी इस कार्य में पूरी तरह फिसड्डी साबित हुए हैं और आंकड़ों की बाजीगरी में जुटे हैं।

भेड़ा फार्म और अमृत सरोवरों की बदहाली
नौगढ़ और चकिया क्षेत्र के सिंचाई विभाग, लघु डाल सिंचाई, राजस्व विभाग तथा बेढ़ा फार्म जैसे बड़े सरकारी परिसरों में हर साल लाखों की संख्या में पौधे रोपे जाते हैं, लेकिन आज वहां गिनने लायक पौधे भी नजर नहीं आते। विकास विभाग द्वारा प्रतिवर्ष बड़े चाव से 'अमृत सरोवरों' के तट पर पौधरोपण किया जाता है, जिसका उदाहरण बाधी के डॉ. भीमराव आंबेडकर सरोवर में देखा जा सकता है, जहाँ आज एक भी पौधा जीवित नहीं है। 

ऐसा ही नजारा चंद्रप्रभा रेंज के लतमरवा में भी देखने को मिलता है। इसके अलावा, अप्रैल और मई के सूखे महीनों में जंगलों में महुआ बीनने वाले लोगों द्वारा लगाई जाने वाली आग भी इन नवजात पौधों के नष्ट होने की एक मुख्य वजह बनती है, जिससे मजगाईं और जयमोहनी रेंज के जंगल प्रभावित होते हैं।

इस वर्ष अकेले वन विभाग 50 लाख से अधिक पौधे लगाने की तैयारी में है, जिनमें मुख्य रूप से सागौन, कट सागौन, कांजी, जंगल जलेबी, करौंदा, पीपल, बरगद, पाकड़ और महुआ आदि शामिल हैं।

सुरक्षा हमारी प्राथमिकता, अन्य विभागों का पता नहीं: डीएफओ
इस पूरे मामले और अभियान की प्रगति को लेकर चंदौली के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) बी. शिवशंकर ने अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए बताया कि शासन की ओर से वन विभाग को इस बार जनपद में कुल 70 लाख पौधा रोपित करने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। रोपे जाने वाले पौधों की सुरक्षा और उनका संवर्धन करना वन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। वन विभाग द्वारा लगाए गए सभी पौधे पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित हैं। जहां तक अन्य विभागों का सवाल है, उनके विषय में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, फिर भी कुछ लापरवाह विभागों को छोड़कर कई अन्य विभागों ने पौधों की जियो टैगिंग का कार्य पूरा कर लिया है।