वन विभाग के कर्मचारियों का DFO पर फूटा गुस्सा: 16 का समायोजन तो हमारा क्यों नहीं, 23 जून से बड़े आंदोलन का एलान
महीनों से अटकी हैं समायोजन की फाइलें
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का फूटा गुस्सा
नौगढ़ के दुर्गा मंदिर परिसर में प्रदर्शन
22 जून तक विभाग को मिला अल्टीमेटम
रामनगर कार्यालय के घेराव की बड़ी चेतावनी
चंदौली जिले के नौगढ़ में वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का धैर्य अब पूरी तरह टूट चुका है और उनका गुस्सा खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। कर्मचारियों का सीधा सवाल है कि जब पिछले आंदोलन के बाद 16 कर्मचारियों का समायोजन किया जा सकता है, तो वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ सेवा दे रहे बाकी कर्मचारियों की फाइलें पिछले सात महीने से किस स्तर पर अटकी हुई हैं? इसी गंभीर मुद्दे को लेकर नौगढ़ के दुर्गा मंदिर परिसर में इकट्ठा हुए कर्मचारियों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और विभागीय कार्यप्रणाली के साथ-साथ डीएफओ कार्यालय की भूमिका पर तीखे सवाल खड़े किए।
सात महीने पहले जमा हुए थे कागजात, फिर भी कार्रवाई ठप
धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव ने विभाग की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष से भी अधिक समय से लगातार काम कर रहे कर्मचारियों के सभी जरूरी अभिलेख (दस्तावेज) करीब सात महीने पहले ही विभाग को सौंप दिए गए थे। इसके बावजूद समायोजन की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि दस्तावेजों में कोई कमी थी तो विभाग को साफ करना चाहिए था, लेकिन जानबूझकर केवल इंतजार कराया जा रहा है, जो पात्र कर्मचारियों के साथ सरासर भेदभाव है।
16 का समायोजन हुआ, तो बाकी के साथ टालमटोल क्यों?
विभागीय नीतियों पर बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष भोरिक यादव ने कहा कि 6 फरवरी को प्रभागीय कार्यालय रामनगर के घेराव के बाद विभाग ने 16 कर्मचारियों का समायोजन कर दिया था। इस कार्रवाई से यह पूरी तरह साबित हो गया कि विभाग के पास समायोजन करने का प्रशासनिक अधिकार और क्षमता दोनों हैं। ऐसे में बाकी बचे कर्मचारियों को राहत न देना समझ से परे है। वर्षों से जंगलों, नर्सरियों और सरकारी योजनाओं में अपना खून-पसीना बहाने वाले कर्मचारियों को उनके वैधानिक अधिकार से वंचित रखना उनका मनोबल तोड़ रहा है।
समान सेवा और समान कार्य, फिर यह असमानता क्यों?
प्रांतीय संयोजक रमाशंकर यादव ने कहा कि एक ही विभाग में एक जैसा काम करने वाले कर्मचारियों के साथ दोहरी नीति अपनाई जा रही है। कुछ को लाभ मिल गया है और बाकी अब भी कतार में खड़े हैं। विभाग अगर सभी कर्मचारियों के मामलों की सही स्थिति को सार्वजनिक कर दे, तो सारा भ्रम दूर हो सकता है। लेकिन अधिकारियों की लंबी चुप्पी और फाइलों को लटकाए रखने की आदत से कर्मचारियों का संदेह और गहरा होता जा रहा है। अधिकारियों की इस घोर उदासीनता से डीएफओ कार्यालय के खिलाफ असंतोष चरम पर है।
22 जून तक का अल्टीमेटम, फिर रामनगर में अनिश्चितकालीन धरना
कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का एलान करते हुए संयुक्त रूप से घोषणा की है कि यदि 22 जून तक बाकी बचे सभी कर्मचारियों का समायोजन नहीं किया गया, तो 23 जून से प्रभागीय कार्यालय रामनगर के ठीक सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया जाएगा। कर्मचारियों ने साफ कहा कि इस बड़े आंदोलन के बाद पैदा होने वाली किसी भी प्रशासनिक या कानून-व्यवस्था की स्थिति की पूरी जिम्मेदारी वन विभाग प्रशासन की होगी। इस विरोध प्रदर्शन में जिलामंत्री शिवकुमार, राजेश, विजई, सीताराम, ऊषा, सुरसती, कलावती समेत बड़ी संख्या में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी मुस्तैद रहे।