स्कूल में लटका था ताला, खेल रही छात्रा को बोलेरो ने रौंदा, पहुँची ट्रामा सेंटर 
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ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा विभाग सिर्फ कागजी कार्रवाई में व्यस्त है। समय पर स्कूल न खुलना और अध्यापकों की अनुपस्थिति अब सीधे हादसों में बदल रही है।
 

नौगढ़ में बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों पर सवाल

जानिए क्या है पूरा मामला

स्कूल के बाहर खेल रही छात्रा को बोलेरो ने रौंदा

चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील में बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही हादसों की लंबी फेहरिस्त खड़ी कर चुकी है। कभी स्कूल में घुसे कुत्ते ने छात्र को काट लिया, तो किसी स्कूल में बच्चे मारपीट कर रहे हैं और अध्यापक लूडो खेलने में व्यस्त रहे, अब स्कूल का ताला बंद रहने से सोमवार को एक और हादसा हो गया।

आपको बता दें कि प्राथमिक विद्यालय लौवारी खुर्द में मोहन कोल की पुत्री निधि, जो कक्षा तीन में पढ़ती है। सुबह गांव की अन्य बालिकाओं के साथ पढ़ने गई थी। लेकिन जब स्कूल पहुँची तो गेट पर ताला लटक रहा था और कोई अध्यापक, शिक्षामित्र मौजूद नहीं था। मजबूरी में बच्चियां बाहर खेलने लगीं और इसी बीच खेलते-खेलते निधि सड़क पर आ गई। अचानक तेज रफ्तार बोलेरो ने उसे रौंद दिया। घटना के बाद चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

गंभीर रूप से घायल निधि को परिजन एंबुलेंस से अस्पताल ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक देख डॉक्टरों ने उसे बीएचयू ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। मासूम की जिंदगी बचाने के लिए डॉक्टरों की टीम लगी है, जबकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस घटना ने विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है और ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है।

पिता का दर्द, कैसे कराएं बच्ची का इलाज 

निधि के पिता मोहन कोल ने फूट-फूटकर अपना दर्द बयान किया। उन्होंने कहा कि सुबह बेटी पढ़ने गई थी, हमें क्या पता था कि अस्पताल पहुँचना पड़ेगा। अगर स्कूल खुला होता तो वह सड़क पर क्यों जाती? हमारी बच्ची की हालत देखकर दिल बैठा जा रहा है। विभाग और अध्यापक जिम्मेदारी निभाते तो यह दिन न देखना पड़ता।"

मोहन कोल ने कहा कि परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि शिक्षा लेने गई बेटी जिंदगी और मौत के बीच झूलती मिलेगी। उन्होंने कहा कि बेटी के सपने और परिवार की उम्मीदें सब दांव पर लग गई हैं। “हम गरीब लोग हैं, बच्ची के इलाज के लिए कहां से रुपया लाएंगे, अब उसकी जिंदगी बच जाए यही हमारी सबसे बड़ी दुआ है।”

प्रधान यशवंत सिंह यादव  का सीधा आरोप 
ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव ने विभाग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर स्कूल समय पर खुला होता और अध्यापक मौजूद रहते तो बच्चे बाहर खेलने नहीं जाते। यह हादसा सीधे-सीधे शिक्षकों और विभाग की गैरजिम्मेदारी का नतीजा है। सरकार शिक्षा को प्राथमिकता बताती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि स्कूल में ताले लटकते हैं और मासूम हादसों के शिकार हो रहे हैं।

प्रधान ने यह भी कहा कि बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर विभाग ने इस कार्रवाई में ढिलाई दिखाई तो ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने साफ कहा कि यह मामला पूरे जिले के लिए शर्मनाक है और अधिकारियों को जवाब देना ही होगा।

स्कूलों में पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
यह कोई पहली घटना नहीं है। नौगढ़ और आसपास के स्कूलों में लापरवाही लगातार सामने आती रही है। इससे पहले प्राथमिक विद्यालय झुमरिया में बच्चों के बीच मारपीट हो चुकी है, लेकिन शिक्षक क्लासरूम में लूडो खेल रहे थे। ‌कंपोजिट विद्यालय बाघी में खुले गेट से कुत्ता घुस गया था और उसने एक छात्र को काट लिया था। इस तरह की घटनाओं ने साबित कर दिया है कि शिक्षा विभाग और अध्यापक बच्चों की सुरक्षा व पढ़ाई दोनों के साथ मजाक कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग कठघरे में
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा विभाग सिर्फ कागजी कार्रवाई में व्यस्त है। समय पर स्कूल न खुलना और अध्यापकों की अनुपस्थिति अब सीधे हादसों में बदल रही है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक मासूम बच्चों की जिंदगी विभाग की लापरवाही की कीमत चुकाती रहेगी। गांव में लोग इस घटना को लेकर बेहद आक्रोशित हैं और सभी जिम्मेदारों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी (एबीएसए) लालमणि कनौजिया ने कहा कि हादसा दुखद है। घटना की जांच कराई जा रही है। दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई होगी। बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”