भक्ति की लहर में डूबा नौगढ़, कथा वाचिका प्रतिमा तिवारी सुना रही है राम कथा 

प्रतिमा तिवारी ने श्रोताओं को 33 करोड़ श्लोक का अद्भुत रहस्य भी सुनाया। उन्होंने कहा कि जब शिवजी ने मानस की कथा का संकल्प लिया, तब उनके ध्यान में 33 करोड़ श्लोक प्रकट हुए।
 

राम नाम के साबुन से मन को  धोने का समय

रामचरितमानस को अलमारी से निकालकर पढ़ने की सलाह

नौगढ़ में  संगीतमयी रामकथा का शुभारंभ

चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ स्थित दुर्गा मंदिर पोखरे पर नवरात्रि के प्रथम दिन संगीतमयी रामकथा का शुभारंभ हुआ। प्रयागराज से पधारीं कथा वाचिका प्रतिमा तिवारी ने अपने मधुर स्वर और भावपूर्ण शैली से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि “मन का मैल प्रभु के साबुन से ही धुलता है। प्रभु धनवानों को नहीं, बल्कि गरीब और सरल हृदय वालों को मिलते हैं।राम को पाना है तो निष्कपट बनना पड़ेगा।” उनके प्रवचन के दौरान श्रद्धालु बार-बार “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठे। उन्होंने यह भी कहा कि रामकथा केवल सुनने भर की चीज नहीं है, बल्कि जीवन को जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शन है।


आपको बता दें कि नौ दिवसीय राम कथा प्रारंभ होते ही मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से गूंज उठा। पूरे स्थल को फूलों की झालरों और दीपों से सजाया गया था। घंटे-घड़ियाल की ध्वनि और “जय श्रीराम” के जयकारों से वातावरण रोमांचित हो गया। श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर और भजन गाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।


रामचरितमानस ही सच्चा महामंत्र
कथावाचिका प्रतिमा तिवारी ने जोर देकर कहा कि आज लोग तरह-तरह के मंत्र, तांत्रिक विद्या और भभूत के पीछे भाग रहे हैं, लेकिन सच्चा महामंत्र रामचरितमानस में ही विद्यमान है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि हर युग और हर परिस्थिति के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि “रामचरितमानस का पाठ व्यक्ति के भीतर से अज्ञान और संशय को दूर करता है, जैसे साबुन मैल को धो देता है।”

उन्होंने यह भी समझाया कि जब-जब रामकथा का आयोजन होता है, तब केवल श्रोताओं का ही कल्याण नहीं होता बल्कि पूरे क्षेत्र की धरती भी पावन हो जाती है। यही कारण है कि संत-महात्मा इसे कलियुग का सबसे सरल और प्रभावकारी साधन मानते हैं। उनके अनुसार, अन्य साधनाएं कठिन हैं, लेकिन मानस का अध्ययन और उसका स्मरण सबसे सहज है। उन्होंने कहा कि “रामचरितमानस ही वह महामंत्र है जो व्यक्ति को भक्ति, नीति और मोक्ष तीनों का मार्ग दिखाता है।”


मानस में जीवन का पूरा दर्शन
प्रतिमा तिवारी ने कहा कि रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन-दर्शन है। इसमें सास-बहू का संवाद, देवर-भाभी का अपनापन, भाईयों की निष्ठा, मित्रों का साथ और शत्रुओं का संघर्ष—सब कुछ समाहित है। उन्होंने कहा कि इसमें धर्म, समाज और परिवार तीनों की गहरी झलक मिलती है। यही कारण है कि मानस को लोकजीवन का दर्पण कहा जाता है। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि जैसे कोई उपन्यास केवल कल्पना तक सीमित होता है, वैसे ही मानस का हर प्रसंग व्यवहार और अनुभव की सच्चाई से जुड़ा है। इसीलिए इसके अध्ययन से व्यक्ति का जीवन संवरता है और आचरण शुद्ध होता है।


दोहा-चौपाई और छंद की गिनती 
कथा के दौरान उन्होंने मानस की रचना का विस्तृत ब्यौरा देते हुए बताया कि रामचरितमानस में ...
4,608 चौपाइयां, 1,074 दोहे, 207 सोरठा, 27 श्लोक, और अन्य 86 छंद शामिल हैं। इन सबको मिलाकर रामचरितमानस में लगभग 10,902 पद्य  होते हैं।


33 करोड़ श्लोक का रहस्य बताया 
प्रतिमा तिवारी ने श्रोताओं को 33 करोड़ श्लोक का अद्भुत रहस्य भी सुनाया। उन्होंने कहा कि जब शिवजी ने मानस की कथा का संकल्प लिया, तब उनके ध्यान में 33 करोड़ श्लोक प्रकट हुए। यह श्लोक अलग-अलग लोकों और साधकों के लिए विभाजित किए गए—

देवताओं के लिए विशेष श्लोक,

ऋषि-मुनियों के लिए ज्ञान और तपस्वी श्लोक,

गृहस्थों के लिए धर्म-नीति और भक्ति से जुड़े श्लोक,

और साधकों-संतों के लिए मोक्षदायक श्लोक।

लेकिन इन सबके बीच भगवान शंकर ने अपने लिए केवल दो अक्षर सुरक्षित रखे—‘राम नाम’। उन्होंने कहा कि यही नाम कलियुग का सबसे बड़ा महामंत्र है, क्योंकि 33 करोड़ श्लोकों का सार अंततः राम-राम में ही समाहित है।


आयोजन और सम्मान 
श्री राम कथाका संचालन सनराइज पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल राजू पांडे ने किया। मुख्य यजमान शिवनारायण जायसवाल उपस्थित रहे और  अपनी धर्मपत्नी कथा वाचिका सुनीति के साथ आरती उतारी। इस मौके पर दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष पंकज जायसवाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष सूरज केशरी, भाजपा मंडल अध्यक्ष भगवान दास अग्रहरि, राजेश केशरी, अमरजीत जायसवाल, कांता प्रसाद, सोनू सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे। समापन पर भव्य आरती और प्रसाद वितरण हुआ। पंचायत बाघी की प्रधान नीलम ओहरी के प्रतिनिधि दीपक गुप्ता ने कथा वाचिका प्रतिमा तिवारी समेत सहयोगी मंडली को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।