पौधे लगाना आसान पर जंगल बनाना चुनौती! जयमोहनी रेंज में 650 हेक्टेयर के पौधों को बचाने के लिए उतरे टैंकर

 

काशी वन्य जीव प्रभाग के जयमोहनी रेंज में पिछले वर्ष लगाए गए पौधों को नया जीवन देने के लिए बड़ा अभियान शुरू हुआ है। कम बारिश के खतरे को देखते हुए टैंकरों से सिंचाई और 650 हेक्टेयर में वैज्ञानिक थिनिंग कराई जा रही है। पूरी खबर पढ़ें...

 
 

जयमोहनी रेंज के 650 हेक्टेयर में मेगा अनुरक्षण

पौधों को बचाने के लिए जंगल में उतारे गए पानी टैंकर

रेंजर अमित श्रीवास्तव ने वनकर्मियों को दिया फील्ड प्रशिक्षण

कमजोर पौधों को हटाकर स्वस्थ पौधों को मिलेगी जगह

डीएफओ बी शिवशंकर के निर्देश पर शुरू हुआ अभियान

पौधे लगाना आसान होता है, लेकिन उन्हें बचाकर घना जंगल बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए काशी वन्य जीव प्रभाग के जयमोहनी रेंज में बड़ा अभियान शुरू किया गया है। पिछले वर्ष लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग ने पानी के टैंकर मैदान में उतार दिए हैं। कम बारिश की वजह से सूख रहे पौधों को बचाने के लिए 650 हेक्टेयर क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुरक्षण (मेंटेनेंस) और थिनिंग की प्रक्रिया तेजी से चलाई जा रही है।

रेंजर अमित श्रीवास्तव ने खुद संभाला मोर्चा
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) बी. शिवशंकर के निर्देश पर शनिवार को जयमोहनी रेंज में विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) अमित श्रीवास्तव ने पहले कार्यालय में अधिकारियों, वनरक्षकों और दैनिक श्रमिकों को थिनिंग की वैज्ञानिक तकनीक समझाई। इसके बाद वे पूरी टीम को सीधे रोपण स्थल पर ले गए, ताकि करोड़ों रुपये की यह योजना केवल कागजों तक सीमित न रहे और भविष्य में एक घना जंगल बन सके।

कमजोर पौधों को हटाकर स्वस्थ पौधों के विकास की वैज्ञानिक विधि
जयमोहनी रेंज में कैंपा और सामाजिक वानिकी योजना के तहत वर्ष 2025-26 में लगभग 650 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण किया गया था। रेंजर ने कर्मचारियों को सिखाया कि किन कमजोर, रोगग्रस्त या मृतप्राय पौधों को हटाना है। वन विभाग का मानना है कि यदि समय पर थिनिंग न की जाए, तो पौधे आपस में धूप, पानी और पोषक तत्वों के लिए होड़ करने लगते हैं। कमजोर पौधों को हटाने से स्वस्थ पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और उनकी उत्तरजीविता दर (Survival Rate) में सुधार होता है।

 बोना नाली क्षेत्र में टैंकरों से सिंचाई शुरू
इस साल सामान्य से कम बारिश होने के कारण नए रोपे गए पौधों के सूखने का खतरा काफी बढ़ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने टैंकरों के जरिए नियमित सिंचाई का काम शुरू करा दिया है। खासतौर पर बोना नाली क्षेत्र और उन घने इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है जहाँ पानी की जरूरत सबसे ज्यादा है। पानी मिलने से पौधों को नया जीवन मिल रहा है।

डीएफओ बोले- कागजी नहीं, ज़मीनी काम प्राथमिकता
रेंजर अमित श्रीवास्तव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अनुरक्षण कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। इसके साथ ही नए रोपे गए इलाकों में अवैध कटान और मवेशियों से बचाव के लिए गश्त बढ़ा दी गई है। डीएफओ बी. शिवशंकर का कहना है कि वन विभाग अब सिर्फ आंकड़े बढ़ाने के बजाय लगाए गए पौधों को जीवित रखकर भविष्य का घना जंगल बनाने पर केंद्रित है। अगर जयमोहनी रेंज का यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे पूरे जिले में लागू किया जाएगा।