'साहब! महुआ बीनकर घर चलाने वाले गरीब बर्बाद हो जाएंगे', जमसोती में शराब दुकान के खिलाफ ग्राम प्रधान ने DM को लिखा भावुक पत्र
लौवारी कला के ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव ने जमसोती गांव में शराब दुकान खोलने के खिलाफ जिलाधिकारी को बेहद भावुक पत्र लिखा है। ग्रामीणों के भारी विरोध के कारण ठेकेदार भी दुकान खोलने का साहस नहीं जुटा पा रहा है।
ग्राम प्रधान यशवंत सिंह का भावुक पत्र
जमसोती में शराब दुकान का भारी विरोध
महुआ और तेंदू पत्ता बीनते हैं ग्रामीण
ठेकेदार असमंजस में, काम रुका
महिलाओं और परिवारों पर पड़ेगा बुरा असर
“साहब, जमसोती गांव की हालत देख लीजिए… लोग बहुत गरीब हैं, जंगल में महुआ बीनकर और तेंदू पत्ता तोड़कर किसी तरह अपना घर चला रहे हैं। यहां की महिलाएं अधिकतर अनपढ़ हैं और सामाजिक रूप से भी कमजोर हैं। ऐसे माहौल में अगर गांव के ठीक बीचों-बीच देसी शराब की दुकान खुली, तो हालात संभालना मुश्किल हो जाएगा और हंसते-खेलते परिवार तबाह हो जाएंगे।” यह भावुक और कड़े शब्द चंदौली जिले के लौवारी कला गांव के ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव ने जिलाधिकारी (DM) को लिखे अपने पत्र में कहे हैं। यह मामला अब केवल एक दुकान का नहीं, बल्कि पूरे गांव के अस्तित्व की लड़ाई बन गया है।
गरीबों पर क्यों थपा जा रहा शराब का बोझ?
ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव ने जिलाधिकारी से इस मामले में तुरंत दखल देने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में साफ कहा है कि जमसोती गांव आर्थिक और सामाजिक रूप से पहले से ही बहुत पिछड़ा हुआ है। यहाँ के लोगों के पास आजीविका के साधन बेहद सीमित हैं और पूरा परिवार वन उत्पादों पर निर्भर है। ऐसे सीधे-साधे और गरीब माहौल में शराब की दुकान खुलना गांव की कमर तोड़ देगा। पुरुषों में शराब की लत बढ़ेगी, जिससे घरेलू हिंसा बढ़ेगी और मासूम बच्चों का भविष्य पूरी तरह अंधकार में डूब जाएगा।
बिना ग्रामीणों की मर्जी के शुरू हुई प्रक्रिया
दूसरी तरफ, जमसोती गांव के लोगों ने भी प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ अपनी कमर कस ली है। ग्रामीणों का कहना है कि इस शराब दुकान को खोलने के लिए न तो गांव की तरफ से कोई एनओसी (सहमति) दी गई है और न ही दुकान के लिए कोई जमीन उपलब्ध कराई गई है। लोगों का आरोप है कि स्थानीय जनता की राय लिए बिना ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया, जो पूरी तरह गलत है। इसी विरोध के चलते फिलहाल दुकान खोलने का प्रस्ताव अधर में लटका हुआ है।
ठेकेदार भी फंसा असमंजस में, आंदोलन की तैयारी
गांव वालों के इस कड़े और एकजुट विरोध को देखकर शराब का ठेकेदार भी भारी असमंजस में है। जगह न मिलने और ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए वह दुकान खोलने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। अब ठेकेदार को भी जिलाधिकारी के अगले आदेश का इंतजार है। इधर, जमसोती गांव के लोग इसे अपने भविष्य का संकट मानकर एक बड़े सामाजिक आंदोलन की तैयारी में हैं। ग्रामीण अपनी इस लड़ाई में ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव को 'जनहित का चेहरा' मानकर उनके साथ मजबूती से खड़े हो गए हैं।