चलो चंदौली अभियान: नौगढ़ के लौवारी और चमेरबांध में सजी जन चौपाल, मौके पर ही निपटाई गईं जनसमस्याएं

 

तहसील नौगढ़ के लौवारी कला और चमेरबांध में "चलो चंदौली – प्रशासन आपके द्वार" अभियान के तहत जन चौपाल का आयोजन किया गया। अफसरों ने मौके पर ही ग्रामीणों की फरियादें सुनकर उनके त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की।

 
 

चलो चंदौली अभियान से बदला गांवों का माहौल

लौवारी और चमेरबांध में सजी जन चौपाल

मौके पर ही शुरू हुआ शिकायतों का निस्तारण

महिलाओं की गोद भराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम

दैवीय आपदा पीड़ितों को तत्काल मुआवजे का निर्देश

अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीणों की शिकायतें सरकारी दफ्तरों की फाइलों में दबकर रह जाती हैं, लेकिन अब चंदौली में यह तस्वीर बदलती नजर आ रही है। तहसील नौगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लौवारी कला और चमेरबांध गांवों में “चलो चंदौली – प्रशासन आपके द्वार” कार्यक्रम के तहत भव्य जन चौपाल का आयोजन किया गया। इस विशेष चौपाल में प्रशासनिक अधिकारियों ने सीधे जनता के बीच बैठकर उनकी बुनियादी समस्याओं को सुना और मौके पर ही उनके प्रभावी निस्तारण की प्रक्रिया शुरू कर दी। शासन के इस कदम से सुदूर ग्रामीण अंचलों में जनता के बीच भरोसे का एक नया मॉडल विकसित हो रहा है।

विभागीय स्टालों के जरिए ग्रामीणों से योजनाओं का सीधा संवाद
लौवारी कला ग्राम पंचायत में स्थित कॉमन सर्विस सेंटर और पंचायत भवन चमेरबांध में आयोजित इस जन चौपाल का शुभारंभ बेहद गरिमामय ढंग से हुआ। लौवारी कला में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) उपेंद्र साहनी और ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। वहीं, चमेरबांध गाँव में ग्राम पंचायत अधिकारी मनीष सिंह और ग्राम प्रधान अनिरुद्ध यादव ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर चौपाल को गति दी। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा लोक कल्याणकारी योजनाओं के स्टाल लगाए गए, जहाँ ग्रामीणों को सीधे सरकारी लाभ और नीतियों की विस्तृत जानकारी मुहैया कराई गई।

एक ही मंच पर सुनी गईं फरियादें, मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा आयोजन
इस जन चौपाल का मूल उद्देश्य केवल कागजी योजनाओं का प्रचार करना नहीं, बल्कि अंतिम पायदान पर खड़े पात्र व्यक्ति तक उसका हक पहुंचाना था। सहायक विकास अधिकारी ने मंच से ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि हर जायज समस्या का समाधान समयबद्ध तरीके से होगा। इस प्रशासनिक आयोजन को और अधिक भावनात्मक और सामाजिक रूप देने के लिए वहाँ उपस्थित अधिकारियों द्वारा महिलाओं की गोद भराई की गई और छोटे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया गया। इसके साथ ही, संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए कि चौपाल में आई सभी शिकायतों का एक सप्ताह के भीतर हर हाल में गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

आपदा पीड़ितों को तत्काल राहत और जमीनी बदलाव की उम्मीद
चौपाल के दौरान अधिकारियों ने दैवीय आपदा से प्रभावित हुए परिवारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि प्राकृतिक या दैवीय आपदा से हुए किसी भी प्रकार के नुकसान पर वे तुरंत अपने क्षेत्रीय लेखपाल से संपर्क स्थापित करें, ताकि उन्हें नियमानुसार देय मुआवजा और सरकारी आवास सहायता अविलंब प्रदान की जा सके। अब सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि क्या जन चौपाल का यह अभिनव मॉडल भारतीय ग्रामीण परिवेश में एक स्थायी और ऐतिहासिक बदलाव की नींव रख पाएगा, जहाँ आम जनता को अपनी जायज मांगों के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और उनकी हर शिकायत का मुकम्मल जवाब उनके अपने गाँव की चौपाल पर ही मिल जाए?