नौगढ़ में भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस: अंबेडकर पार्क में उमड़ा जनसैलाब, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों पर हुआ मंथन
चंदौली के नौगढ़ में भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस के अवसर पर सामाजिक न्याय पर गंभीर चर्चा हुई। भीम आर्मी और बसपा के नेताओं ने बाबा साहब के संवैधानिक मूल्यों को आत्मसात करने और संगठित होकर हक की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया।
अंबेडकर पार्क में शौर्य दिवस समारोह
सामाजिक न्याय और समानता पर चर्चा
संवैधानिक चेतना से बदलाव की अपील
भीम आर्मी जिलाध्यक्ष का बड़ा बयान
जातिगत भेदभाव के खिलाफ सामूहिक संकल्प
चंदौली जनपद के वनांचल तहसील नौगढ़ स्थित अंबेडकर पार्क में बुधवार को भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण और भीमा कोरेगांव के वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने ऐतिहासिक संदर्भों को वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि भीमा कोरेगांव का युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि यह स्वाभिमान, बराबरी और दमनकारी व्यवस्था के खिलाफ मानवीय गरिमा की जीत का प्रतीक था।
संविधान आधारित संघर्ष ही एकमात्र रास्ता: भीम आर्मी
भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष रामचंद्र राम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए युवाओं में नई ऊर्जा भरी। उन्होंने कहा कि भीमा कोरेगांव का इतिहास हमें संगठित होने और वैचारिक रूप से स्पष्ट रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बाबा साहब द्वारा रचित भारतीय संविधान में ही दलितों, पिछड़ों और वंचितों के लिए न्याय की गारंटी दी गई है। रामचंद्र राम ने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा के हथियार को अपनाएं और संवैधानिक दायरे में रहकर लोकतांत्रिक तरीके से सामाजिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाएं। उनके अनुसार, जागरूकता और संगठन ही सामाजिक अन्याय को समाप्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी पर बसपा का जोर
बहुजन समाज पार्टी के विधानसभा प्रभारी श्याम सुंदर ने अधिकारों के साथ-साथ जिम्मेदारियों की समझ पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने हमें जो संवैधानिक अधिकार दिए हैं, उनका लाभ उठाने के लिए राजनीतिक भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक अधिकारों की जानकारी पहुंचाना और उन्हें निर्णय लेने वाली प्रक्रियाओं का हिस्सा बनाना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। श्याम सुंदर ने कहा कि मतदान और संवाद ही वे लोकतांत्रिक औजार हैं जिनसे हम स्थायी और व्यावहारिक बदलाव ला सकते हैं।
समानता आधारित समाज के निर्माण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने जातिगत भेदभाव और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का संकल्प लिया। चर्चा के दौरान इस बात पर आम सहमति बनी कि बिना शिक्षा और सामाजिक संवाद के कोई भी क्रांति सफल नहीं हो सकती। उपस्थित युवाओं ने संवैधानिक संस्थाओं में अपनी पैठ बढ़ाने और अधिकारों के प्रति सजग रहने की शपथ ली। इस अवसर पर अवधेश कुमार, विजय भास्कर, पुनवासी, दिलबहार, सर्वेश कुमार, महावीर, सशांत, राजेश कुमार सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।