नौगढ़ के भरदुआं में वनाधिकार पर बवाल: महिलाओं पर लाठीचार्ज से नाराज हैं मजदूर नेता अजय राय, दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
नौगढ़ के भरदुआं गांव में पुश्तैनी जमीन से बेदखल करने और महिलाओं पर लाठीचार्ज के विरोध में AIPF नेता अजय राय मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने लाठीचार्ज करने वाले अफसरों पर केस दर्ज करने और रिहाई की मांग की है।
नौगढ़ भरदुआं में वनाधिकार का विवाद
महिलाओं पर पुलिस का लाठीचार्ज
AIPF नेता अजय राय की चेतावनी
48 घंटे में आंदोलन का अल्टीमेटम
चंदौली जिले का नौगढ़ क्षेत्र एक बार फिर वनाधिकार और जमीन विवाद को लेकर सुर्खियों में है। नौगढ़ के अति संवेदनशील गांव भरदुआं में वनाधिकार कानून (FRA) के क्रियान्वयन को लेकर जिला प्रशासन और वन विभाग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अपनी पुश्तैनी जमीन से बेदखल किए जाने का विरोध कर रही दलित और मांझी समाज की महिलाओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और उन्हें घसीटते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पीड़ितों का हाल जानने पहुंची AIPF की हाई लेवल टीम
घटना की जानकारी मिलते ही ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (AIPF) की राष्ट्रीय समिति के सदस्य अजय राय और किसान नेता रहीमुद्दीन के नेतृत्व में 5 सदस्यीय जांच टीम रविवार को भरदुआं गांव पहुंची। टीम ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और घटना की पूरी जानकारी ली। इस दौरान अजय राय ने कहा कि 1973 में भेड़ा फार्म के लिए विस्थापित किसानों से जमीन ली गई थी, लेकिन 50 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें दूसरी जमीन पर नामांतरण नहीं दिया गया। प्रशासन की इस नाकामी की सजा आज दलित भुगत रहे हैं।
जांच टीम के सामने आए 3 बड़े खुलासे
ग्रामीणों से बातचीत के बाद AIPF की टीम ने तीन प्रमुख खुलासे किए:
कानून का उल्लंघन: पीड़ितों का कहना है कि वनाधिकार कानून के तहत उनके दावे सालों से लंबित हैं। बिना किसी उचित सुनवाई और निगरानी समिति में अपील का अवसर दिए बिना सीधे जेसीबी और पुलिस बल के जरिए उन्हें बेदखल कर दिया गया।
नेताओं के दबाव का आरोप: पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि स्थानीय भाजपा नेताओं के इशारे पर उनकी कीमती जमीन को छीनने की नीयत से यह दमनकारी कार्रवाई की जा रही है।
महिलाओं पर बर्बरता: विरोध करने पर पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं से मारपीट करने और उनके कपड़े फाड़ने के बाद जबरन जीप में भरकर जेल भेजने का आरोप लगाया गया है।
AIPF की 4 सूत्रीय मांगें और आंदोलन की चेतावनी
अजय राय ने मामले में जिला प्रशासन के समक्ष 4 सूत्रीय मांगें रखते हुए चेतावनी दी है:
जेल भेजी गई सभी महिलाओं और ग्रामीणों को तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाए।
महिलाओं पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों और दोषी अधिकारियों पर SC/ST एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हो।
सभी खारिज और लंबित वनाधिकार दावों का निष्पक्ष निस्तारण किया जाए।
भेड़ा फार्म विस्थापितों को तत्काल वैकल्पिक जमीन आवंटित कर नामांतरण किया जाए।
अजय राय ने कहा कि अगर 48 घंटे के भीतर इन जायज मांगों को पूरा नहीं किया गया और दमन की नीति बंद नहीं हुई, तो AIPF पूरे नौगढ़ और चकिया क्षेत्र में उग्र चक्का जाम व जनआंदोलन शुरू करेगा।