नौगढ़ में भगवान भरोसे ग्रामीण विकास : दो-दो ब्लॉकों के चार्ज लेकर न जाने कहां रहते हैं बीडीओ विकास सिंह 

चंदौली के नौगढ़ विकासखंड में बीडीओ की अनुपस्थिति से ग्रामीण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। दूर-दराज से आने वाली जनता दिनभर इंतजार कर खाली हाथ लौट रही है। क्या फाइलों में सिमट कर रह गया है जमीनी विकास? पूरी खबर पढ़ें।

 

नौगढ़ ब्लॉक में प्रशासनिक व्यवस्था चरमराई

बीडीओ विकास सिंह कार्यालय से नदारद

दूर-दराज के ग्रामीण भुगत रहे खमियाजा

पंचायत सचिवालयों में लटके मिले ताले

फाइलों और कागजों तक सीमित विकास

उत्तर प्रदेश शासन भले ही हर गांव तक विकास योजनाएं पहुंचाने और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का दावा कर रहा हो, लेकिन चंदौली जिले के नौगढ़ विकासखंड से आई जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। चकिया और नौगढ़ जैसे दो अत्यंत महत्वपूर्ण विकासखंडों की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) विकास सिंह पर अब जनता की समस्याओं की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बीडीओ साहब न तो समय से अपने कार्यालय में उपस्थित रहते हैं और न ही फील्ड मॉनिटरिंग में रुचि दिखा रहे हैं। स्थिति यह हो गई है कि ब्लॉक मुख्यालय पहुंचने वाले ग्रामीणों को सुबह से शाम तक सिर्फ इंतजार ही हाथ लगता है।

ब्लॉक में इंतजार करती जनता, अधिकारी का नहीं मिलता पता
नौगढ़ एक सुदूर और जंगली इलाका है, जहां के गांवों से ब्लॉक मुख्यालय की दूरी लगभग 30 से 40 किलोमीटर तक है। ग्रामीण अपनी गाढ़ी कमाई और समय खर्च करके बेहद उम्मीद के साथ अपनी समस्याएं लेकर आते हैं। लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी जब बीडीओ साहब के दर्शन नहीं होते, तो वे मायूस होकर घर लौट जाते हैं। क्षेत्र में यह चर्चा आम हो चुकी है कि यदि अधिकारी कभी आते भी हैं, तो दोपहर के बाद चंद समय के लिए आते हैं। ऐसे में जनता यह पूछने को मजबूर है कि आखिर दो-दो ब्लॉकों की कमान संभाल रहे अधिकारी की जवाबदेही कौन तय करेगा?

पंचायत सचिवालयों पर लटके ताले, कागजों में दौड़ रहा विकास
जमीनी पड़ताल में यह बात सामने आई है कि ग्राम पंचायत बाघी को यदि अपवाद मान लिया जाए, तो क्षेत्र के अधिकांश पंचायत सचिवालयों की हालत दयनीय है। कई सचिवालयों में कंप्यूटर तक उपलब्ध नहीं हैं और कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) बंद पड़े हैं। इसके बावजूद उच्चाधिकारियों को सब कुछ सुचारू रूप से चलने की फर्जी रिपोर्ट भेजी जा रही है। पंचायत सचिवों की गांवों से अनुपस्थिति ने इस संकट को और गहरा कर दिया है, जिससे पूरी ग्रामीण व्यवस्था वेंटिलेटर पर आ गई है।

फील्ड मॉनिटरिंग कमजोर, जिला प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
बीडीओ की सीमित सक्रियता के कारण जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, वृद्धावस्था व विधवा पेंशन, पीएम आवास और शौचालय जैसी बुनियादी सरकारी योजनाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं। जनता के बीच अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन इस पर कोई सख्त एक्शन क्यों नहीं ले रहा है? 

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बीडीओ की नियमित या तय किए गए दिनों में उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की गई, तो सरकारी योजनाएं केवल सरकारी फाइलों तक ही दफन होकर रह जाएंगी। लगता है इसके लिए धरना प्रदर्शन या आंदोलन भी करना होगा।