3 दिन में कैसे होगा नौगढ़ का ‘विकास’, दो- दो ब्लॉकों का जिम्मा कैसे उठा पाएंगे BDO विकास सिंह
चंदौली के पिछड़े ब्लॉक नौगढ़ में पूर्णकालिक बीडीओ न होने से विकास कार्य ठप पड़े हैं। चकिया बीडीओ विकास सिंह को अतिरिक्त प्रभार मिलने से फाइलों का अंबार लग गया है। क्या महज 3 दिन की उपस्थिति से नौगढ़ की समस्याएं दूर होंगी?
नौगढ़ ब्लॉक में अस्थायी व्यवस्था का संकट
बीडीओ विकास सिंह पर डबल वर्क प्रेशर
फाइलों में सिमट रही हैं विकास योजनाएं
आम जनता को ब्लॉक के चक्कर काटने पर विवश
जिलाधिकारी से पूर्णकालिक अधिकारी की मांग
चंदौली जिले का सबसे संवेदशील और भौगोलिक रूप से दुर्गम विकास खंड नौगढ़ एक बार फिर प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होता नजर आ रहा है। नियमित खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) अमित कुमार के धानापुर स्थानांतरण के बाद, इस ब्लॉक की जिम्मेदारी चकिया के बीडीओ विकास सिंह को अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंपी गई है। शासन की यह "अस्थायी व्यवस्था" अब नौगढ़ के विकास के लिए एक "स्थायी समस्या" बनती जा रही है।
दो ब्लॉकों का जिम्मा और विकास का दबाव
बीडीओ विकास सिंह वर्तमान में चकिया जैसे बड़े और व्यस्त ब्लॉक के साथ-साथ नौगढ़ का कार्यभार भी संभाल रहे हैं। भौगोलिक दूरी और काम के अत्यधिक बोझ के कारण उन्हें अपना समय दोनों ब्लॉकों के बीच विभाजित करना पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि वह सप्ताह में महज 2 से 3 दिन ही नौगढ़ को दे पा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जो ब्लॉक पहले से ही पिछड़ेपन का दंश झेल रहा हो, वहां सप्ताह में मात्र कुछ घंटों की मौजूदगी से बुनियादी समस्याओं का समाधान कैसे संभव होगा?
फाइलों में कैद विकास, रुका निरीक्षण
नौगढ़ पहले से ही पेयजल, आवास, मनरेगा और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्षरत है। स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि कागजी कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन मौके पर अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण महत्वपूर्ण फाइलों की स्वीकृति, बजट का भुगतान और धरातलीय निरीक्षण जैसे काम पूरी तरह से अटक गए हैं। जब तक अधिकारी मौके पर पहुंचकर योजनाओं की गुणवत्ता नहीं जांचेंगे, तब तक भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और विकास को गति देना नामुमकिन है।
जनता में भारी आक्रोश और उपेक्षा का दंश
क्षेत्र की जनता का मानना है कि नौगढ़ को हमेशा प्रयोग की वस्तु समझा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब एक पूर्णकालिक अधिकारी के लिए भी इस ब्लॉक की चुनौतियों को संभालना कठिन होता है, तो अतिरिक्त प्रभार वाले अधिकारी से बेहतर परिणाम की उम्मीद कैसे की जा सकती है? आम लोगों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए कई दिनों तक ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, क्योंकि अधिकारी अक्सर चकिया में व्यस्त रहते हैं।
जिलाधिकारी चंदौली से त्वरित समाधान की उम्मीद
नौगढ़ के जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों की निगाहें अब जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग पर टिकी हैं। लोगों की मांग है कि क्षेत्र की संवेदनशीलता और पिछड़ेपन को देखते हुए यहां तत्काल एक पूर्णकालिक और सक्रिय खंड विकास अधिकारी की तैनाती की जाए। यदि यह अस्थायी व्यवस्था लंबी खिंचती है, तो मनरेगा और आवास जैसी कल्याणकारी योजनाएं पूरी तरह से दम तोड़ देंगी। अब देखना यह है कि प्रशासन नौगढ़ के 'विकास' को फाइलों से बाहर निकालकर धरातल पर लाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।