नौगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल, ब्रेन हेमरेज पीड़ित के लिए 4 घंटे बाद भी नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस
चंदौली के नौगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े दावों की हवा निकल गई। बाघी नैया घाट निवासी ब्रेन हेमरेज से पीड़ित अमरनाथ के लिए परिजन 4 घंटे तक 108 एंबुलेंस को फोन करते रहे, लेकिन गाड़ी नहीं आई। अंततः मरीज को बाइक से अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
नौगढ़ में लाचार दिखी 108 एंबुलेंस सेवा
ब्रेन हेमरेज मरीज को बाइक से पहुंचाया
चार घंटे तक फोन पर मिलता रहा दिलासा
सीएचसी नौगढ़ से रेफर के बाद भी इंतजार
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर भड़के ग्रामीण
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और इमरजेंसी के समय "गोल्डन ऑवर" यानी शुरुआती एक घंटे में तुरंत इलाज देने के बड़े-बड़े दावे करती है। लेकिन चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील में इन सरकारी दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। विकास खंड के बाघी नैया घाट इलाके में 46 साल के अमरनाथ अचानक ब्रेन हेमरेज का शिकार हो गए। मरीज जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा, मगर सरकारी मदद वक्त पर नहीं पहुंच सकी।
4 घंटे तक फोन पर सिर्फ मिलता रहा खोखला आश्वासन
मरीज अमरनाथ की मां रेशमा और अन्य परिजनों का आरोप है कि दोपहर करीब 12 बजे उन्होंने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा को कॉल करके मदद मांगी। लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी कोई गाड़ी मौके पर नहीं पहुंची। परिजनों का कहना है कि वे लगातार 108 नंबर और स्थानीय अस्पताल में फोन मिलाते रहे, लेकिन हर बार उन्हें केवल यही जवाब दिया गया कि "एंबुलेंस बस रास्ते में है और आ रही है।" जब एलेक्स एंबुलेंस से भी कोई राहत नहीं मिली, तो लाचार परिजनों ने बिना देर किए मरीज को बाइक पर ही बीच में बैठाया और जैसे-तैसे अस्पताल लेकर भागे।
अस्पताल में रेफर होने के बाद भी झेलनी पड़ी फजीहत
मरीज को दोपहर करीब 2 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नौगढ़ लाया गया। वहां तैनात डॉक्टर ने अमरनाथ की हालत बेहद नाजुक देखकर उसे तुरंत बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। लेकिन असली मुसीबत तो रेफर के बाद शुरू हुई। अस्पताल से रेफर होने के बाद भी करीब ढाई घंटे तक कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। आखिरकार शाम को करीब 4:30 बजे 102 एंबुलेंस की मदद से गंभीर मरीज को सोनभद्र के लिए रवाना किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के रवैये से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
इस पूरे घटनाक्रम से नौगढ़ इलाके के ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ बहुत गहरा गुस्सा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नौगढ़ जैसे दूरदराज के इलाकों में 108 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह से राम भरोसे चल रही है। अगर किसी मरीज को ब्रेन हेमरेज जैसी जानलेवा स्थिति में साढ़े चार घंटे तक एंबुलेंस न मिले, तो फिर यह आपातकालीन सेवा किस काम की है? ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले की केवल कागजी जांच न हो, बल्कि जिम्मेदार अफसरों और सेवा प्रदाताओं पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
जांच का मिला आश्वासन, पर खड़े हुए कई तीखे सवाल
पूरे मामले पर सीएचसी नौगढ़ के अधीक्षक डॉ. अवधेश कुमार सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि घटना की जांच करवाई जाएगी। एंबुलेंस के पायलट और ईएमटी की लोकेशन के साथ-साथ ड्यूटी रिकॉर्ड को खंगाला जाएगा और लापरवाही साबित होने पर कानूनी कार्रवाई होगी। हालांकि, अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह जांच भी हर बार की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगी, या वाकई किसी की जवाबदेही तय होगी?