नौगढ़ में 'चलो चंदौली' बना औपचारिकता: SDM, तहसीलदार और BDO नदारद, एडीओ पंचायत के भरोसे निपटी जन चौपाल

 

नौगढ़ के परसिया और नर्वदापुर में आयोजित "चलो चंदौली प्रशासन आपके द्वार" कार्यक्रम में बड़े अफसर नदारद रहे। एसडीएम, तहसीलदार और बीडीओ के न आने से जन चौपाल की कमान एडीओ पंचायत ने संभाली, जिससे समस्याओं के मौके पर निस्तारण पर सवाल उठ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें...

 
 

नौगढ़ जन चौपाल से एसडीएम और तहसीलदार नदारद

एडीओ पंचायत और सचिवों ने संभाली कमान

परसिया और नर्वदापुर में आयोजित हुआ कार्यक्रम

बिना बड़े अफसरों के राजस्व समस्याओं पर उठे सवाल

गोद भराई और अन्नप्राशन की रस्म हुई पूरी

उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना "चलो चंदौली प्रशासन आपके द्वार" का मुख्य मकसद अधिकारियों को सीधे गांव-गांव भेजकर आम जनता की समस्याओं का मौके पर ही निपटारा कराना है। हालांकि, शुक्रवार को चंदौली जिले के नौगढ़ विकास क्षेत्र अंतर्गत परसिया और नर्वदापुर गांवों में आयोजित जन चौपाल में इसकी बिल्कुल उलटी तस्वीर देखने को मिली। जिन बड़े प्रशासनिक अधिकारियों से ग्रामीण त्वरित समाधान की उम्मीद लगाए बैठे थे, वही कार्यक्रम से नदारद रहे।

बड़े अफसरों ने दूरी बनाई, पंचायत विभाग ने संभाली पूरी कमान
परसिया पंचायत भवन में आयोजित जन चौपाल का शुभारंभ सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) उपेंद्र साहनी और ग्राम पंचायत अधिकारी संदीप प्रताप सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। दूसरी ओर, नर्वदापुर के कंपोजिट विद्यालय में ग्राम पंचायत अधिकारी और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। विभागों द्वारा स्टॉल तो लगाए गए, लेकिन एसडीएम, तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) जैसे प्रमुख अधिकारियों की अनुपस्थिति से ग्रामीण खुद को ठगा सा महसूस कर रहे थे।

शिकायतें तो दर्ज हुईं, पर बड़ा सवाल—फैसला कौन लेगा?
जन चौपाल में आए ग्रामीणों की शिकायतें सुनी गईं और संबंधित विभागों को एक सप्ताह के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश भी दिए गए। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब भूमि विवाद, अवैध कब्जे, राजस्व, राशन, आवास और पेंशन से जुड़े मामलों का फैसला करने वाले जिम्मेदार अफसर ही मौजूद नहीं थे, तो इन जटिल समस्याओं का तुरंत समाधान कैसे संभव होगा? निचले स्तर के कर्मचारी सिर्फ शिकायत दर्ज कर सकते हैं, अंतिम निर्णय नहीं ले सकते।

गोद भराई और अन्नप्राशन की हुई रस्म, पर मूल उद्देश्य अधूरा
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य और बाल विकास विभाग की ओर से तीन गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की गई और तीन छोटे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराया गया। हालांकि, ये पोषण संबंधी routine कार्यक्रम तो पूरे हो गए, लेकिन जिस बड़े विज़न के साथ जिला प्रशासन को गांव तक पहुँचाने का दावा किया जा रहा था, उसमें तहसील और ब्लॉक स्तर के मुख्य अधिकारियों की गैर-मौजूदगी पूरे क्षेत्र में चर्चा और तंज का विषय बनी रही।

कागजी खानापूर्ति या वास्तविक समाधान? जनता मांग रही जवाब
यदि "चलो चंदौली प्रशासन आपके द्वार" जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुँचेंगे, तो क्या ग्रामीणों को सचमुच उनके द्वार पर प्रशासन मिल पा रहा है? या फिर केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी कर सरकारी योजनाओं का कोरम पूरा किया जा रहा है? स्थानीय निवासियों की मांग है कि जिला प्रशासन इस अनुपस्थिति का संज्ञान ले और सुनिश्चित करे कि भविष्य की जन चौपालों में निर्णय लेने वाले अधिकारी अनिवार्य रूप से मौजूद रहें।