नौगढ़ के 12 गांवों में उल्टी-दस्त का प्रकोप: दूषित पानी से 16 मरीज अस्पताल में भर्ती, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
नौगढ़ विकास खंड के 12 गांवों में बरसात का दूषित पानी और बासी खाना लोगों को बीमार बना रहा है। पिछले 7 दिनों में 16 मरीज उल्टी-दस्त की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने गांवों में टीमें उतारकर दवाइयां बांटना शुरू कर दिया है।
नौगढ़ के 12 गांवों में फैला संक्रमण
सात दिनों में पहुंचे 16 गंभीर मरीज
दूषित पानी से उल्टी-दस्त का खतरा
स्वास्थ्य विभाग ने बांटी ORS-जिंक गोलियां
पीने के पानी की तुरंत जांच जरूरी
बरसात के मौसम में नौगढ़ इलाके से चिंताजनक खबर सामने आ रही है। यहाँ गांव-गांव में पानी का जमाव और दूषित पेयजल लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है। पिछले सात दिनों के भीतर 12 अलग-अलग गांवों से 16 लोग उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे हैं। बीमार होने वालों में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं।
इन गांवों से सामने आए बीमारी के मामले
विकास खंड नौगढ़ के बाघी, बसौली, ललतापुर, मलेवर, मलेवरिया, अमृतपुर, नौडिहवा, बोदलपुर, चिकनी, अमदहां, मझगाई और जरहर गांवों से मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इतने सारे गांवों से एक साथ मरीजों का आना इलाके में पेयजल और साफ-सफाई की बदहाल स्थिति की ओर इशारा कर रहा है। समय रहते ध्यान न दिया गया तो स्थिति बिगड़ सकती है।
दूषित पानी और बासी खाना बन रहा बीमारी की वजह
डॉक्टरों के मुताबिक, बारिश के दिनों में कुएं, तालाब और हैंडपंप का पानी दूषित होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। गंदा पानी पीने और बासी खाना खाने से पेट में इंफेक्शन हो रहा है। लगातार उल्टी-दस्त होने से शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी (डिहाइड्रेशन) हो जाती है, जो मरीज के लिए बेहद जानलेवा साबित हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव में सक्रिय
अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के जरिए घर-घर ओआरएस (ORS) के पैकेट और जिंक की गोलियां बांटी जा रही हैं, ताकि बीमारी को शुरुआत में ही रोका जा सके।
इलाज के साथ पानी की जांच और सफाई भी जरूरी
सिर्फ अस्पताल में मरीजों को दवा दे देना ही इसका पक्का इलाज नहीं है। जिस पानी को पीकर लोग बीमार पड़ रहे हैं, उन पानी के स्रोतों (हैंडपंप और कुओं) की जांच और क्लोरीनेशन होना बहुत जरूरी है। ग्राम पंचायतों और प्रशासन को मिलकर गांव-गांव में पानी की शुद्धता और साफ-सफाई सुनिश्चित करनी होगी, ताकि आंकड़ों को और बढ़ने से रोका जा सके।
चंदौली समाचार की खास अपील
बरसात के दिनों में पानी को लेकर जरा सी भी लापरवाही न बरतें। पानी को हमेशा उबालकर या क्लोरीन की गोली डालकर ही पिएं। बासी खाने से परहेज करें और अपने घर के आसपास सफाई रखें। याद रखें, बीमारी फैलने के बाद इलाज कराने से बेहतर है कि बीमारी को अपने घर तक पहुंचने ही न दिया जाए।