चंदौली के देवखत गांव में मुसीबत बनी मुख्यमंत्री आवास योजना: पहली किस्त से तोड़े घर, दूसरी के लिए 7 महीने से भटक रहे 14 परिवार

चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक अंतर्गत देवखत गांव के 14 गरीब परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त 7 महीने से नहीं मिली है। अधिकारियों के कहने पर पुराने मकान तोड़ने के बाद अब ये परिवार बरसात में प्लास्टिक की तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर हैं।

 
 

मुख्यमंत्री आवास योजना में बड़ी लापरवाही

7 महीने से दूसरी किस्त नहीं मिली

देवखत गांव के 14 परिवार बेघर

ब्लॉक मुख्यालय के घेराव की चेतावनी

मुख्यमंत्री आवास योजना सरकार द्वारा गरीबों को पक्का मकान और सामाजिक सम्मान देने के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, चंदौली जिले के नौगढ़ ब्लॉक अंतर्गत देवखत गांव की ज़मीनी हकीकत इस योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठा रही है। गांव के 14 गरीब परिवारों का आरोप है कि पहली किस्त मिलने के बाद अधिकारियों के निर्देश पर उन्होंने अपने वर्षों पुराने आशियाने गिरा दिए, लेकिन पिछले सात महीनों से उन्हें दूसरी किस्त का एक भी रुपया नहीं मिला है।

40 हजार रुपये की पहली किस्त और टूट गए आशियाने
योजना के नियम के तहत प्रत्येक लाभार्थी को कुल 1.20 लाख रुपये दिए जाने थे। पहली किस्त के रूप में 40 हजार रुपये खाते में आते ही पंचायत सचिव द्वारा निर्माण कार्य तुरंत शुरू कराने का दबाव बनाया गया। ग्रामीणों ने प्रशासनिक तंत्र पर भरोसा करके अपने पुराने कच्चे मकान गिरा दिए। कहीं नींव खुदकर रह गई, तो कहीं पिलर खड़े हुए और कहीं आधी दीवारें बनकर काम रुक गया। इसके बाद से दूसरी किस्त के नाम पर पीड़ितों को केवल कोरे आश्वासन दिए जा रहे हैं।

बरसात में तिरपाल के सहारे कट रही महिलाओं व बच्चों की रात
बारिश का मौसम शुरू होने के बाद इन 14 बेघर परिवारों की परेशानियां बेहद बढ़ गई हैं। जिन परिवारों के पास प्लास्टिक की तिरपाल है, वे उसी को ढाल बनाकर किसी तरह रात काट रहे हैं, जबकि बाकी लोगों ने झोपड़ियों में शरण ले रखी है। इस भीषण बरसात में महिलाओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान पर भारी संकट मंडरा रहा है। महंगाई के इस दौर में पहली किस्त की सीमित राशि से निर्माण पूरा करना किसी भी सूरत में संभव नहीं था।

तकनीकी कारणों का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहा प्रशासन
पीड़ित ग्रामीण पिछले सात महीनों से लगातार ब्लॉक कार्यालय से लेकर बैंक और जिला मुख्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। हर बार जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से यही जवाब मिलता है कि भुगतान 'तकनीकी कारणों' से रुका हुआ है और जल्द जारी कर दिया जाएगा। पीड़ित राजेंद्र का कहना है कि यदि उन्हें दूसरी किस्त अटकने का पहले से अंदेशा होता, तो वे अपना पुराना घर कभी नहीं तोड़ते। वहीं रामवती देवी का कहना है कि बरसात में उनके छोटे-छोटे बच्चे भीग रहे हैं और समझ नहीं आ रहा कि वे कहां जाएं।

समीक्षा बैठकों और व्यवस्था की जवाबदेही पर उठे सवाल
जब जिला स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार समीक्षा बैठकें की जाती हैं, तो सवाल उठता है कि सात महीनों से तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर इन 14 परिवारों की चीख किसी अफसर तक क्यों नहीं पहुँची? यदि भुगतान प्रक्रिया में कोई तकनीकी अड़चन थी, तो उसका निस्तारण समय रहते क्यों नहीं किया गया?

ग्रामीणों ने दी ब्लॉक मुख्यालय के घेराव की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर अब स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी बकाया दूसरी किस्त जारी नहीं की गई, तो वे सभी एकजुट होकर ब्लॉक मुख्यालय का घेराव करेंगे और उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत प्रदान करता है या फिर यह मामला भी प्रशासनिक फाइलों में ही दबा रह जाएगा।