World Environment Day: नौगढ़ में बोले प्रधान यशवंत सिंह- 'सोशल मीडिया पर फोटो खिंचाने से नहीं, पेड़ बचाने से बचेगा पर्यावरण'

 

नौगढ़ के गोड़टुटवा प्राथमिक विद्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस पर अनोखा संदेश दिया गया। ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव और डिप्टी रेंजर आनंद दुबे ने लोगों से अपील की कि वे सिर्फ फोटो खिंचाने के लिए पौधे न लगाएं, बल्कि उन्हें पेड़ बनाने की जिम्मेदारी भी लें।

 
 

फोटो नहीं, पेड़ बचाने की जरूरत

पौधे लगाकर भूल जाते हैं लोग

हर पौधा लाता है बड़ी जिम्मेदारी

एक दिन की रस्म नहीं पौधरोपण

बच्चों को सौंपा हरियाली का भविष्य

 विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहाँ देश भर में दिखावे और केवल औपचारिकता के लिए पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं चन्दौली जिले की तहसील नौगढ़ के प्राथमिक विद्यालय गोड़टुटवा में एक ऐसा संदेश दिया गया जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दे। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत वन विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ग्राम पंचायत लौवारी कला के प्रधान यशवंत सिंह यादव ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों को आईना दिखाया।

सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करने से नहीं बचेगी प्रकृति
ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में सबसे बड़ी जरूरत केवल पौधा लगाने की नहीं, बल्कि उसे बचाने की है। लोग सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करने के उत्साह में पौधे तो लगा देते हैं, लेकिन बाद में उन्हें भूल जाते हैं। उन्होंने अपील की कि फेसबुक या व्हाट्सएप पर फोटो लगाने से ज्यादा जरूरी यह है कि हमारे द्वारा लगाया गया छोटा सा पौधा आने वाले वर्षों में एक मजबूत और छायादार पेड़ बनकर खड़ा दिखाई दे।

पौधा लगाना एक दिन की रस्म नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी है
प्रधान ने आगे कहा कि हर नया पौधा अपने साथ एक बड़ी जिम्मेदारी लेकर आता है। उसे केवल मिट्टी में रोप देना ही पर्यावरण की रक्षा नहीं है। असली परीक्षा और काम तो उसके बाद शुरू होता है, जब उस कोमल पौधे को नियमित पानी, सुरक्षा और उचित देखभाल की आवश्यकता होती है। यदि समाज का हर नागरिक केवल एक पौधे को पेड़ बनाने का सच्चा संकल्प ले ले, तो धरती को हरा-भरा करने के लिए किसी भी बड़े सरकारी या निजी अभियान की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।

वर्षों का संरक्षण मिलने पर ही पौधा बनता है पेड़
इस मौके पर चकिया रेंज के डिप्टी रेंजर आनंद दुबे ने भी ग्रामीणों और बच्चों में चेतना जगाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि पौधों को लगाकर बेसहारा छोड़ देना बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। जब तक हम उन्हें आवारा पशुओं से नहीं बचाएंगे और समय पर खाद-पानी नहीं देंगे, तब तक पौधरोपण का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रहेगा। वर्षों की निरंतर निगरानी और कड़ी मेहनत के बाद ही एक अदना सा पौधा विशाल पेड़ का रूप लेता है और मानव समाज व पर्यावरण को शुद्ध ऑक्सीजन तथा जीवन देता है।

स्कूली बच्चों को सौंपा गया हरियाली का सुंदर भविष्य
इस खास कार्यक्रम के दौरान प्राथमिक विद्यालय के नन्हे बच्चों और गाँव के गणमान्य नागरिकों को पर्यावरण का महत्व समझाया गया। उन्हें बताया गया कि वृक्ष न केवल हमें ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि ये भूमिगत जल संरक्षण, जलवायु संतुलन और जैव विविधता को बनाए रखने का मुख्य आधार हैं। अंत में बच्चों को इन पौधों की निगरानी का जिम्मा सौंपते हुए यह संदेश दिया गया कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित कल देने के लिए अब सिर्फ पौधरोपण नहीं, बल्कि 'पौध संरक्षण' को अपनी प्राथमिकता बनाना होगा।