चमेरबांध के पूर्व प्रधान अनिरुद्ध यादव पर कसेगा शिकंजा, वन भूमि कब्जाने के आरोप में भूमाफिया घोषित करने की तैयारी

 

चंदौली के नौगढ़ में वन भूमि पर अवैध रास्ता बनाकर कब्जा करने के मामले में चमेरबांध के पूर्व प्रधान अनिरुद्ध यादव समेत तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ है। 7 पुराने मुकदमों के आधार पर अब उन्हें भूमाफिया घोषित करने का प्रस्ताव डीएम को भेजा जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें...

 
 

पूर्व प्रधान अनिरुद्ध यादव पर केस दर्ज

जयमोहनी रेंज में वन भूमि पर कब्जे का आरोप

टीम को देखकर ट्रैक्टर लेकर भागे आरोपी

मुख्य आरोपी पर पहले से 7 मुकदमे दर्ज

डीएम चंद्र मोहन गर्ग के पास पहुंचा मामला

चंदौली जिले के नौगढ़ इलाके से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। सरकारी जंगलों और वन भूमि को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपना लिया है। तहसील नौगढ़ के जयमोहनी रेंज में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे को हिला कर रख दिया है।

चमेरबांध के पूर्व प्रधान (प्रशासक) अनिरुद्ध सिंह यादव पर वन भूमि को कब्जाने की कोशिश का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में वन विभाग ने सिर्फ मुकदमा ही दर्ज नहीं किया है, बल्कि उन्हें 'भूमाफिया' घोषित करने की पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए बाकायदा जिलाधिकारी (DM) को एक कड़ा प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

DFO के मोबाइल पर आया मैसेज और शुरू हुआ ऑपरेशन
इस पूरे मामले का खुलासा शनिवार को जारी एक प्रेस नोट के जरिए हुआ। वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) अमित श्रीवास्तव ने बताया कि जयमोहनी रेंज के भैसोड़ा कंपार्टमेंट संख्या-17 में पड़ने वाले चमेरबांध में पंचायत भवन के पास एक नाले के किनारे सरकारी वन भूमि है। वहाँ कुछ लोग छोटे-बड़े पौधों को काटकर और मिट्टी डालकर अवैध रूप से रास्ता बना रहे थे।

इस अवैध गतिविधि की गुप्त सूचना प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) रामनगर को सीधे उनके मोबाइल पर एक मैसेज के जरिए मिली। सूचना मिलते ही डीएफओ ने तुरंत एक्शन लिया और बिना एक पल गंवाए वन विभाग की एक स्पेशल टीम को मौके के लिए रवाना कर दिया ताकि सच का पता लगाया जा सके।

रास्ता बनाना तो सिर्फ बहाना था, असली मकसद था कब्जा
जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। वन भूमि पर हरे-भरे पौधों की धड़ल्ले से कटाई की गई थी और मिट्टी डालकर एक साफ रास्ता तैयार किया जा रहा था। वन विभाग का साफ कहना है कि यह रास्ता सिर्फ आने-जाने के लिए नहीं बनाया जा रहा था, बल्कि इसके पीछे सरकारी जमीन को हथियाने की एक बहुत बड़ी साजिश थी।

अगर सही समय पर वन विभाग की टीम वहां नहीं पहुंचती, तो आने वाले दिनों में इस कीमती वन भूमि पर पूरी तरह से पक्का और अवैध कब्जा हो जाता। जैसे ही वनरक्षक प्रेमनाथ सिंह और प्रमोद यादव मौके पर पहुंचे, वहां हड़कंप मच गया। टीम को देखते ही मुख्य आरोपी अनिरुद्ध यादव अपने साथियों के साथ ट्रैक्टर लेकर मौके से रफूचक्कर हो गया।

पूर्व प्रधान समेत 3 लोगों पर वन अपराध का मुकदमा दर्ज
मौके से भागने और साक्ष्य मिटाने की इस कोशिश के बाद वन विभाग का शक यकीन में बदल गया। इसे वन भूमि पर सीधा अतिक्रमण मानते हुए विभाग ने चमेरबांध के रहने वाले मुख्य आरोपी अनिरुद्ध यादव (पुत्र स्वर्गीय बाबूलाल), विमलेश (पुत्र उदयभान) और सुरेंद्र (पुत्र प्रताप) के खिलाफ वन अपराध के तहत केस दर्ज कर लिया है और कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

रेंजर अमित श्रीवास्तव ने एक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि मुख्य आरोपी अनिरुद्ध यादव का पुराना रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है। उनके खिलाफ पहले से ही अलग-अलग मामलों में कुल 7 मुकदमे दर्ज हैं। इससे पहले नौगढ़ थाने में उन पर सरकारी हैंडपंप की अवैध बोरिंग रोकने गए वनकर्मियों के साथ मारपीट करने और सरकारी काम में बाधा डालने का भी संगीन केस दर्ज है।

अब DM के दरबार में होगा अंतिम फैसला
मुख्य आरोपी के इसी आपराधिक और विवादित इतिहास को देखते हुए रेंजर अमित श्रीवास्तव ने दांव और बड़ा कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अनिरुद्ध यादव को भूमाफिया की श्रेणी में डालने और उनके निरुद्धीकरण की कड़ी कार्रवाई के लिए प्रभागीय वनाधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी चंदौली को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।

अब पूरी गेंद जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के पाले में है। अगर इस प्रस्ताव पर मुहर लग जाती है, तो जिले के अन्य अतिक्रमणकारियों को भी यह साफ संदेश जाएगा कि जंगलों की जमीन पर आंख उठाने वालों को प्रशासन आम अपराधी नहीं बल्कि एक संगठित भूमाफिया के रूप में देखेगा। फिलहाल, पूरे नौगढ़ क्षेत्र में इस बड़ी कार्रवाई को लेकर जबरदस्त चर्चा बनी हुई है।