ये भी है अजब का घोटाला: नौगढ़ में किसानों के लिए आया लाखों का यंत्र गायब, सरकारी खाते से पैसे भी कट गए!

 

चंदौली के नौगढ़ में किसानों की सहूलियत के लिए सब्सिडी पर आया लाखों का कृषि यंत्र अचानक गायब हो गया है। सरकारी कागजों में भुगतान पूरा हो चुका है, लेकिन जमीन पर मशीन का कोई अता-पता नहीं है। पूरी खबर पढ़ें...

 
 

नौगढ़ में किसानों का यंत्र गायब

पंचायत खाते से लाखों का भुगतान

मरवटिया ग्राम पंचायत में मचा हड़कंप

पंचायत सचिव की भूमिका पर सवाल

एडीओ पंचायत ने दिए जांच के आदेश

चंदौली जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। विकास खंड नौगढ़ की मरवटिया ग्राम पंचायत में किसानों की खेती-किसानी को आसान बनाने के नाम पर खरीदा गया एक कीमती कृषि यंत्र रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया है। सरकारी सब्सिडी योजना के तहत इस यंत्र की खरीदारी के लिए पंचायत निधि से लाखों रुपये का भुगतान भी कर दिया गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पूरे गांव में इस मशीन का कहीं कोई अता-पता नहीं है। इस अजब घोटाले को लेकर अब स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

लाखों रुपये खाते से साफ, ग्रामीण पूछ रहे- आखिर कहां गई मशीन?
मरवटिया गांव के निवासियों के अनुसार, किसानों को आधुनिक खेती का लाभ देने के लिए इस यंत्र को खरीदने की योजना बनी थी। पंचायत के सरकारी अभिलेखों और दस्तावेजों में इसके लिए लगभग 1 लाख 23 हजार रुपये और एक अन्य मद में 39 हजार 720 रुपये के भुगतान का साफ जिक्र है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकारी खजाने से पूरी रकम ठेकेदार या फर्म को ट्रांसफर की जा चुकी है, तो यह मशीन पंचायत में क्यों नहीं है? अगर मशीन खरीदी गई थी, तो उसे किसानों के उपयोग के लिए सामने क्यों नहीं लाया जा रहा?

संदेह के घेरे में सचिव, ग्रामीणों ने उठाए प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
इस पूरे मामले में मरवटिया पंचायत के सचिव अश्वनी गौतम की भूमिका को लेकर भी गांव में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जब पंचायत निधि से लाखों रुपये का भुगतान हो रहा था, तो मशीन के रखरखाव, उसकी भौतिक मौजूदगी और कागजी रिकॉर्ड को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी पंचायत सचिव की थी। यदि मशीन पंचायत के कब्जे में नहीं है, तो उसका रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? लोगों को अंदेशा है कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोची-समझी वित्तीय अनियमितता है।

दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग, एडीओ पंचायत ने बैठाई जांच
मामला तब और पेचीदा हो गया जब ग्रामीणों ने पूछा कि यदि यह मशीन कहीं और भेजी गई है, तो उसकी बिक्री या ट्रांसफर से आया पैसा किस सरकारी खाते में जमा हुआ है? ग्रामीण अब इस खरीद-फरोख्त से जुड़े सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सहायक विकास अधिकारी (एडीओ पंचायत) उपेंद्र साहनी ने बताया कि इस शिकायत को संज्ञान में ले लिया गया है। भुगतान की प्रक्रिया, मशीन की वर्तमान स्थिति और इससे जुड़े सभी सरकारी अभिलेखों की गहन जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।