वन विभाग में आउटसोर्सिंग के खिलाफ कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, काली पट्टी बांधकर नौगढ़ से पहुंचे डीएफओ दफ्तर!

 

वन विभाग में आउटसोर्सिंग व्यवस्था लागू करने के विरोध में कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। नौगढ़ और चकिया के वनकर्मी तीन दिन से काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं। मांगें न मानी गईं तो 25 अगस्त को लखनऊ में बड़ा प्रदर्शन होगा।

 
 

आउटसोर्सिंग के खिलाफ वनकर्मियों का विरोध

तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर काम

नौगढ़ से रामनगर पहुंचकर डीएफओ को ज्ञापन

कर्मचारियों के रोजगार और भविष्य पर संकट

25 अगस्त को लखनऊ में प्रदर्शन

चंदौली जिले के चकिया और नौगढ़ क्षेत्र से वन विभाग के कर्मचारियों के बड़े विरोध की खबर सामने आ रही है। विभाग में आउटसोर्सिंग व्यवस्था लागू किए जाने के फैसले से दैनिक और न्यूनतम वेतन पर काम कर रहे वनकर्मी बेहद नाराज हैं। अपनी नौकरी और भविष्य को खतरे में देखकर कर्मचारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। पिछले तीन दिनों से कर्मचारी हाथों पर काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं और सरकार तथा विभाग की इस नई नीति के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज करा रहे हैं।

जंगल सुरक्षा और पौधरोपण निजी कंपनियों को क्यों
कर्मचारियों का आरोप है कि जो काम वे सालों से निष्ठापूर्वक करते आ रहे हैं, उन्हें अब निजी कंपनियों को सौंपने की साजिश हो रही है। पौधरोपण, जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण जैसे संवेदनशील काम अगर आउटसोर्सिंग के हवाले कर दिए जाएंगे, तो वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के सामने जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

गुरुवार को आंदोलन के तीसरे दिन न्यूनतम वेतन/दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ के संरक्षक रमाशंकर सिंह यादव के नेतृत्व में कर्मचारी नौगढ़ से रामनगर स्थित प्रभागीय वनाधिकारी  कार्यालय पहुंचे। वहां प्रतिनिधिमंडल ने डीएफओ बी. शिव शंकर को मांग पत्र सौंपा और कर्मचारियों के हित में जल्द फैसला लेने की अपील की।

शासनादेश का दिया हवाला: 'जब रोक की बात थी तो आउटसोर्सिंग क्यों?'
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने साफ शब्दों में कहा कि जंगल किसी निजी कंपनी की जागीर नहीं है, बल्कि इसकी सुरक्षा सरकार और वन विभाग की स्थायी जिम्मेदारी है। ऐसे में पुराने कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किए बिना आउटसोर्सिंग लागू करना सरासर अन्याय है।

कर्मचारियों ने 5 मार्च 2026 को जारी उस शासनादेश का भी जिक्र किया, जिसमें आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा पर रोक लगाने की बात कही गई थी। कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि जब शासन स्तर पर इस प्रथा पर रोक के निर्देश हैं, तो फिर वन विभाग में इसे पिछले दरवाजे से आगे बढ़ाने की तैयारी क्यों की जा रही है?

25 अगस्त को लखनऊ वन मुख्यालय पर घेराव
कर्मचारी नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन सिर्फ चंदौली या नौगढ़ तक सीमित नहीं रहेगा। इसे पूरे प्रदेश स्तर पर ले जाया जाएगा। कर्मचारी संघ ने 25 अगस्त को राजधानी लखनऊ स्थित वन मुख्यालय पर विशाल 'गेट मीटिंग' और उग्र प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस प्रदर्शन में पूरे प्रदेश के जिलों से हजारों दैनिक एवं न्यूनतम वेतन भोगी वन कर्मचारी शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।