चंदौली में डीएम का मेगा एक्शन: नौगढ़ के जंगलों में चलीं 6 जेसीबी मशीनें, 250 अवैध ढांचे किए ध्वस्त
नौगढ़ के मझगांई रेंज में महीनों से जारी अतिक्रमण के खेल पर प्रशासन ने सर्जिकल स्ट्राइक की है। डीएम चंद्र मोहन गर्ग के निर्देश पर 6 जेसीबी मशीनों ने 250 अवैध कब्जों को जमींदोज कर 20 हेक्टेयर प्लांटेशन को आजाद कराया।
नौगढ़ के जंगल में चलीं 6 जेसीबी
250 अवैध ढांचे एक दिन में ध्वस्त
20 हेक्टेयर प्लांटेशन हुआ अतिक्रमण मुक्त
रेंजर अमित श्रीवास्तव की सफल रणनीति
कथित अधिवक्ता की चाल हुई नाकाम
चंदौली जिले में तहसील नौगढ़ के मझगांई रेंज के जंगल में महीनों से चल रहे अतिक्रमण के खेल पर आखिरकार प्रशासन ने एक ही दिन में पूर्ण विराम लगा दिया। रेंजर अमित श्रीवास्तव की रणनीति और जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के सख्त निर्देश के बाद मंगलवार को जंगल में 6 जेसीबी मशीनें उतारी गईं और प्लांटेशन काटकर बसाए गए अवैध कब्जों को जमींदोज कर दिया गया।
कार्रवाई से पहले चकरघट्टा थाना परिसर में अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें हर स्थिति से निपटने के लिए रणनीति तय की गई और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बताया जा रहा है कि पूरे प्रकरण में एक कथित हाईकोर्ट अधिवक्ता की भूमिका भी चर्चा में रही, जिसके बारे में स्थानीय स्तर पर आरोप है कि पैसा लेने के बाद पट्टा देने की बात कहकर वन भूमि पर कब्जा करने के लिए उकसाया गया। हालांकि, प्रशासन की सख्ती और वन विभाग की रणनीति के आगे यह पूरा तंत्र धराशायी हो गया और अतिक्रमण का नेटवर्क एक ही दिन में टूट गया।
20 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण मुक्त, 250 मकानों ढांचे कर दिए गए ध्वस्त
मझगांई रेंज के ‘ओखरीहवा रोपावनी’ प्लांटेशन क्षेत्र में करीब 20 हेक्टेयर वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जे के खिलाफ मंगलवार को बड़ा संयुक्त अभियान चलाया गया। प्लांटेशन के अंदर करीब डेढ़ सौ लोगों द्वारा बनाए गए 250 से अधिक कच्चे ढांचों को 6 जेसीबी मशीनों की मदद से ध्वस्त कर दिया गया।
यह वही मामला है, जिसे 9 मार्च को “चंदौली समाचार” ने प्रमुखता से उठाया था। खबर में बताया गया था कि डीएफओ बी. शिवशंकर द्वारा पुलिस फोर्स की मांग के बावजूद कार्रवाई नहीं हो पा रही थी और अतिक्रमणकारी जंगल में मकान बनाने लगे थे। खबर के बाद प्रशासन हरकत में आया और जिलाधिकारी ने तत्काल सख्त कदम उठाए।
रेंजर अमित श्रीवास्तव की रणनीति से चला पूरा अभियान
बताया जा रहा है कि रेंजर अमित श्रीवास्तव ने अतिक्रमण को जड़ से खत्म करने के लिए एसडीएम विकास मित्तल और सीओ नागेंद्र कुमार रावत के साथ लगातार बैठकों के बाद पहले ही विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली थी। इसी योजना के तहत एक साथ 6 जेसीबी मशीनें उतारकर पूरे क्षेत्र में सुनियोजित तरीके से ध्वस्तीकरण कराया गया।
अभियान में उतरी पूरी प्रशासनिक मशीनरी
अतिक्रमणहटाओ अभियान के दौरान प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरी। तहसीलदार अनुराग सिंह एसडीओ वरुण प्रताप सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी नागेंद्र कुमार रावत के साथ चकिया व नौगढ़ सर्किल के कई थानों की पुलिस, थाना प्रभारी, चौकी इंचार्ज, भारी पुलिस बल व पीएसी बल भी रहा।
वन विभाग की उड़न दस्ता टीम, प्रभाग के सभी रेंजों के वन क्षेत्राधिकारी, महिला वन दरोगा तथा रेंजर अमित श्रीवास्तव के नेतृत्व में पूरी टीम अभियान में शामिल रही।
विरोध के बीच महिलाओं के द्वारा आगजनी की कोशिश
कार्रवाई के दौरान कुछ महिलाओं द्वारा झोपड़ियों में आग लगाकर माहौल बिगाड़ने और अभियान को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, मौके पर मौजूद महिला पुलिस, और वन विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए स्थिति को तुरंत नियंत्रण में ले लिया। समय रहते हालात संभाल लिए गए और अभियान बिना किसी बाधा के जारी रहा।
जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने कहा है कि वन भूमि पर कब्जा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह अभियान अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई का हिस्सा है। आगे भी लगातार निगरानी रखी जाएगी और जहां भी इस तरह के मामले सामने आएंगे, वहां तत्काल कार्रवाई होगी। प्रशासन इस विषय में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है।
डीएफओ बी. शिवशंकर बोले-
“अतिक्रमण की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी, जिसके चलते पहले ही पुलिस बल की मांग की गई थी। संयुक्त टीम के सहयोग से पूरे क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया है। आगे भी वन भूमि की सुरक्षा के लिए नियमित अभियान चलाए जाएंगे।
सीओ नागेंद्र कुमार रावत ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के बाद अब हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि दोबारा कब्जा न हो। इसके लिए चकरघट्टा थाना पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम नियमित रात्रि गश्त करेगी। संवेदनशील क्षेत्रों की विशेष निगरानी की जाएगी।
रेंजर अमित श्रीवास्तव ने चंदौली समाचार को बताया कि अतिक्रमण को पूरी तरह समाप्त करने के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना के तहत यह अभियान चलाया गया है। हमारा उद्देश्य सिर्फ कब्जा हटाना नहीं, बल्कि जंगल को स्थायी रूप से सुरक्षित करना है। आगे भी लगातार निगरानी और कार्रवाई जारी रहेगी—अब किसी भी अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जंगल की जमीन पर कब्जा करने के पीछे चाहे जितना बड़ा नेटवर्क क्यों न हो, वन विभाग और प्रशासनिक सख्ती के आगे टिक पाना मुश्किल है। इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के लिए अब सिर्फ एक ही रास्ता है—खाली करो या कार्रवाई झेलो।