नौगढ़ में वन भूमि पर माफिया का कब्जा, 20 हेक्टेयर जंगल काटकर दी वन विभाग को खुली चुनौती, ये है DFO की दलील
चंदौली के नौगढ़ में वन विभाग की 20 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा जमा लिया है। डीएफओ द्वारा जिलाधिकारी से पुलिस फोर्स की मांग के बावजूद 15 दिन बीतने पर भी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
नौगढ़ में 20 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जा
DFO की जिलाधिकारी से पुलिस फोर्स की मांग
सरकारी जमीन पर भू-माफिया का कब्जा और चुनौती
प्रशासन की चुप्पी से जंगल माफिया के हौसले बुलंद
चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील में वन विभाग की बेशकीमती भूमि पर अतिक्रमणकारियों ने धावा बोल दिया है। मझगांई रेंज के रामपुर चिकनवा क्षेत्र में करीब 20 हेक्टेयर इलाके में लगे प्लांटेशन को काटकर माफियाओं ने अवैध कब्जा जमा लिया है। "जो जमीन सरकारी है, वह जमीन हमारी है" के नारों के साथ अतिक्रमणकारियों ने वन विभाग और जिला प्रशासन को खुली चुनौती दे दी है। यह स्थिति न केवल वन संपदा को नुकसान पहुँचा रही है, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
“जो जमीन सरकारी है, वह हमारी है” के नारे के साथ जंगल पर कब्जा
चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ क्षेत्र में वन भूमि पर बढ़ता अतिक्रमण अब प्रशासन के लिए खुली चुनौती बनता जा रहा है। मझगांई रेंज के रामपुर चिकनवा क्षेत्र में करीब 20 हेक्टेयर प्लांटेशन को काटकर अतिक्रमणकारियों ने धावा बोलकर जमीन पर कब्जा जमा लिया है। कब्जाधारी खुलेआम “जो जमीन सरकारी है, वह जमीन हमारी है” का नारा लगाते हुए वन विभाग और प्रशासन को सीधी चुनौती दे रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि वन विभाग को अब कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन से गुहार लगानी पड़ रही है।
DFO बी. शिवशंकर ने जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग को बाकायदा पत्र लिखकर वन भूमि से कब्जा हटाने के लिए पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने की मांग की है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पत्र भेजे जाने के करीब 10 दिन बीत जाने के बाद भी वन विभाग को फोर्स उपलब्ध नहीं कराई जा सकी, जिससे कार्रवाई पूरी तरह अधर में लटक गई है।
2023 में हुआ था ‘ओखरीहवा रोपानी’ प्लांटेशन .....
वन विभाग के अभिलेखों के अनुसार चकरघट्टा वीट के कंपार्टमेंट नंबर-9 में वर्ष 2023-24 में ‘ओखरीहवा रोपावनी’ के नाम से सामाजिक वानिकी योजना के तहत करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्र में प्लांटेशन कराया गया था। दो वर्षों की देखभाल के बाद वहां लगे पौधे करीब 10 से 12 फीट तक विकसित हो चुके थे और जंगल का स्वरूप लेने लगे थे। लेकिन अब वही विकसित हो चुके पेड़-पौधे अतिक्रमणकारियों के निशाने पर आ गए। पौधों को काटकर जमीन को खाली किया गया और धीरे-धीरे उस पर कब्जा जमा लिया गया।
डेढ़ सौ लोगों ने बोला धावा, पेड़ काटकर डाल दी झोपड़ियां
सूत्रों के अनुसार चकरघट्टा थाना क्षेत्र में परसिया गांव के आइस क्रीममहिला-पुरुषों समेत करीब डेढ़ सौ लोगों की भीड़ ने एकजुट होकर प्लांटेशन क्षेत्र में धावा बोल दिया। देखते ही देखते विकसित हो चुके पेड़-पौधों को काट दिया गया और जमीन पर झोपड़ियां डाल दी गईं। इतना ही नहीं, अब वहां कच्चे मकान बनाने की भी शुरुआत कर दी गई है, जिससे साफ संकेत मिल रहा है कि अतिक्रमणकारी इस जमीन पर स्थायी कब्जा करने की तैयारी में हैं।
70 से अधिक अतिक्रमणकारियों पर केस, फिर भी नहीं रुका कब्जा
मझगांई रेंज के रेंजर अमित श्रीवास्तव ने करीब 70 से अधिक अतिक्रमणकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। साथ ही उन्होंने रामपुर चिकनवा क्षेत्र में प्लांटेशन पर कब्जा होने की रिपोर्ट भी उच्च अधिकारियों को पहले ही भेज दी थी। इसके बावजूद जमीन से कब्जा हटाने की ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी। उल्टा अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वे खुलेआम वन भूमि पर अपना दावा जता रहे हैं।
एसडीम, सीओ भी जाने के बाद उल्टा लौटे ....
डीएफओ का पत्र जिलाधिकारी तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक हलचल जरूर हुई। एसडीएम विकास मित्तल और पुलिस क्षेत्राधिकारी नामेन्द्र कुमार रावत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। हालांकि मौके पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय अधिकारी अतिक्रमणकारियों से अनुनय-विनय करते नजर आए। अधिकारियों ने उन्हें दो दिन के भीतर जमीन खाली करने की चेतावनी देकर लौटना ही उचित समझा।
अधिकारियों की चेतावनी के बाद उम्मीद थी कि कब्जाधारी पीछे हटेंगे। लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है और जमीन से कब्जा नहीं हट सका है। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि प्रशासनिक चेतावनी का अतिक्रमणकारियों पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है।
पीएसी, दो थाने और चार चौकियां…फिर भी नहीं हट सका कब्जा
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस इलाके में पीएसी बल की मौजूदगी के साथ दो थाने और करीब चार पुलिस चौकियां सक्रिय हैं, वहां भी 20 हेक्टेयर वन भूमि से अतिक्रमण हटाने में प्रशासन को पसीना क्यों आ रहा है।
इतने बड़े सुरक्षा तंत्र के बावजूद कब्जाधारियों का डटे रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो जंगल की बची हुई जमीन भी धीरे-धीरे अतिक्रमणकारियों के कब्जे में चली जाएगी और वर्षों की मेहनत से तैयार किया गया प्लांटेशन पूरी तरह खत्म हो सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि शासन और जिला प्रशासन इस खुले चुनौतीपूर्ण मामले में कब सख्त कदम उठाता है।