शोषण के खिलाफ शंखनाद: वसूली और मानसिक उत्पीड़न का आरोप, हक की लड़ाई के लिए रविवार को जुटें काशी वन्य जीव प्रभाग के कर्मचारी

काशी वन्य जीव प्रभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने विनियमितीकरण की फाइलें लंबित होने पर डीएफओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार को नौगढ़ में होने वाली बड़ी बैठक में शोषण और वसूली के आरोपों पर आंदोलन की रणनीति बन रही है।
 

6 महीने से लंबित विनियमितीकरण फाइल

समान कार्य-समान वेतन की मांग

डीएफओ बी शिवशंकर पर गंभीर आरोप

न्यूनतम वेतन के कोर्ट आदेश की अनदेखी

रविवार को नौगढ़ में निर्णायक बैठक

काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर (वाराणसी) के अंतर्गत चकिया और नौगढ़ के जंगलों में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनके विनियमितीकरण (पक्का होने) की फाइलें डीएफओ बी शिवशंकर की मेज पर महीनों से धूल फांक रही हैं। इसी मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई के लिए रविवार को नौगढ़ में कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आहूत की गई थी।

मेज पर फाइल, फिर भी पेंडिंग क्यों?
न्यूनतम वेतन एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष द्वारिका मोदनवाल का कहना है कि विनियमितीकरण से जुड़ी पत्रावलियां पिछले 6 महीनों से डीएफओ कार्यालय में लंबित हैं। उन्होंने 'चंदौली समाचार' से बातचीत में सीधा सवाल किया कि जब सारी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, तो आखिर फाइलों को आगे क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा? कर्मचारियों को अंदेशा है कि इसके पीछे कहीं न कहीं वसूली की मंशा या उनका मानसिक उत्पीड़न करने की रणनीति छिपी हो सकती है।

समान कार्य और कोर्ट के आदेश की अनदेखी
दैनिक कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे नियमित कर्मचारियों की तरह ही जोखिम भरा कार्य लिया जाता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें ठगा जा रहा है। 'समान कार्य-समान वेतन' के सिद्धांत के तहत कोर्ट ने 18 हजार रुपये मासिक वेतन का आदेश दिया था, लेकिन विभाग इस पर कुंडली मारकर बैठा है। विभाग की इस उदासीनता से कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है, जिससे अब आंदोलन की स्थिति बन गई है।

वसूली और प्रताड़ना के गंभीर आरोप
रविवार की बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा कर्मचारियों पर बनाया जा रहा अनुचित दबाव और मानसिक प्रताड़ना होगा। संगठन का दावा है कि अधिकारों की आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को काम से निकालने या प्रतिकूल कार्रवाई की धमकियां दी जा रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित शोषण है, जिसका अब सामूहिक विरोध किया जाएगा।

रणनीति: सीधा जवाब या कड़ा संघर्ष
कल नौगढ़ में होने वाली इस बैठक में संगठन के नवनिर्वाचित पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कर्मचारी भाग लेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य डीएफओ से लंबित फाइलों पर सीधा जवाब मांगना और यदि संतोषजनक उत्तर न मिले, तो जिला मुख्यालय घेरने या उग्र प्रदर्शन करने की रूपरेखा तैयार करना है। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि अब वे आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर समाधान चाहते हैं।