नौगढ़ के जंगलों से उठी आत्मनिर्भरता की गूंज: 8 गांवों की 70 बेटियों ने थामी स्कूटी की हैंडल, समर कैंप में रचा इतिहास

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चंदौली के नौगढ़ स्थित लालतापुर में ग्राम्या संस्थान द्वारा आयोजित समर कैंप के पहले ही दिन 8 वनवासी गांवों की 70 किशोरियों ने स्कूटी चलाना सीखकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए हैं, जो सामाजिक बदलाव की नई मिसाल है।

 
 

Summary  हाइलाइट्सर

70  बेटियों ने थामी स्कूटी हैंडल

नौगढ़ के वनवासी क्षेत्र में बदलाव

आठ गांवों की किशोरियां शामिल हुईं

ग्राम्या संस्थान का अनोखा समर कैंप

बेटियों के सपनों को मिली रफ्ता

 चंदौली जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र नौगढ़ से महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की एक बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। क्या जंगल और पहाड़ों के दुर्गम गांवों में रहने वाली बेटियां अब अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहेंगी? इस सवाल को लालतापुर गांव स्थित ग्राम्या संस्थान में शुक्रवार से शुरू हुए एक विशेष समर कैंप ने नई और मजबूत ताकत दे दी है।

कैंप के पहले ही दिन क्षेत्र के 8 अलग-अलग गांवों की 70 किशोरियां प्रशिक्षण लेने के लिए आयोजन स्थल पर पहुंचीं। इन बेटियों ने पूरे उत्साह के साथ स्कूटी की हैंडल थामकर वनवासी क्षेत्र में सामाजिक बदलाव और आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है।

8 गांवों की 70 किशोरियां बनीं नए युग की पहचान
इस समर कैंप में विकास खंड नौगढ़ के बेहद पिछड़े और पहाड़ी रास्तों वाले परसिया, परसहवा, भैसौड़ा, लालतापुर, हनुमानपुर, बसौली, मझगाई और ठठवा गांव की किशोरियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पहले दिन प्रशिक्षण के दौरान इन बेटियों का आत्मविश्वास और जज्बा देखने लायक था।

इनमें से कई किशोरियां ऐसी थीं जिन्होंने अपने जीवन में पहली बार स्कूटी के हैंडल को छुआ था। शिविर के प्रशिक्षकों की देखरेख में उन्होंने पहले ही दिन वाहन का संतुलन बनाने और उसे संचालित करने के शुरुआती गुर बेहद आसानी से सीख लिए।

संस्थान की कोऑर्डिनेटर नीतू सिंह खुद सिखा रहीं स्कूटी
ग्राम्या संस्थान की कोऑर्डिनेटर नीतू सिंह ने बताया कि इस समर कैंप का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और वनवासी क्षेत्र की किशोरियों को केवल छुट्टियों की गतिविधियों से जोड़ना नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन में काम आने वाले जरूरी कौशल (लाइफ स्किल्स) सिखाकर आत्मनिर्भर बनाना है।

कैंप के दौरान एक बेहद खास और सकारात्मक दृश्य तब देखने को मिला जब कोऑर्डिनेटर नीतू सिंह खुद स्कूटी पर बैठकर किशोरियों को बैलेंस बनाना और गाड़ी चलाना सिखाती नजर आईं। उनके इस प्रयास ने वहां मौजूद सभी प्रतिभागी बेटियों का हौसला दोगुना कर दिया।

सिर्फ वाहन चलाना नहीं, सपनों को उड़ान देने की कोशिश
भौगोलिक रूप से देखा जाए तो ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन के साधनों की भारी कमी होती है। इस कमी के कारण अक्सर इन बेटियों की उच्च शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार की राह में बड़ी बाधाएं आती हैं। ऐसे में स्कूटी चलाने का यह प्रशिक्षण इन बेटियों को स्वतंत्र रूप से समाज में आगे बढ़ने की असीम ताकत देगा।

सामाजिक जानकारों का मानना है कि जब गांव की एक बेटी आत्मनिर्भर बनती है, तो उसका सकारात्मक असर पूरे परिवार और ग्रामीण परिवेश पर पड़ता है। यह समर कैंप आने वाले दिनों में इन बेटियों को व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता और संवाद कौशल जैसी अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों से भी जोड़ेगा।