नौगढ़ में IGRS का बड़ा फर्जीवाड़ा बेनकाब, ADM रतन वर्मा ने दी चेतावनी .... जानिए क्या है मामला
चंदौली के नौगढ़ में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के फर्जी निस्तारण का भंडाफोड़ हुआ है। क्रॉस चेकिंग में 316 मामलों में गड़बड़ी मिलने के बाद एडीएम ने अधिकारियों को गांव-गांव जाकर 30 जून तक दोबारा जांच करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
कागजों पर निस्तारित दिखाई गईं 316 सरकारी शिकायतें
शिकायतकर्ताओं के फीडबैक से खुली ऑनलाइन सिस्टम की पोल
अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जांची जाएगी निस्तारण की गुणवत्ता
रास्ता, चकरोड और अवैध कब्जों पर चलेगा विशेष अभियान
लापरवाही बरतने वाले राजस्व कर्मियों पर होगी कठोर कार्रवाई
चंदौली जिले में जनसुनवाई और जनशिकायतों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण का दम भरने वाली आईजीआरएस (IGRS) व्यवस्था की तहसील नौगढ़ में एक बड़ी विफलता सामने आई है। शासन स्तर पर कराई गई रैंडम क्रॉस चेकिंग में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिन 316 मामलों को फाइलों में पूरी तरह निस्तारित दिखाकर बंद कर दिया गया था, असल में उन कार्रवाइयों से शिकायतकर्ता रत्ती भर भी संतुष्ट नहीं हैं। अधिकारियों ने ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी रैंकिंग सुधारने के लिए शिकायतों को बंद तो कर दिया, लेकिन धरातल पर पीड़ितों की समस्या जस की तस बनी हुई है।
इस गंभीर लापरवाही के उजागर होने के बाद शासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। अब कागजी बाजीगरी करने वाले लेखपाल और कानूनगो से लेकर तहसीलदार राहुल सिंह और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) विकास मित्तल तक की जवाबदेही तय की जा रही है। शासन ने आदेश दिया है कि इन सभी चिन्हित 316 मामलों की दोबारा से विस्तृत जांच की जाए और इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों को खुद गांव-गांव जाकर मौके का भौतिक सत्यापन करना होगा।
अब एआई (AI) तकनीक की निगरानी में परखी जाएगी रिपोर्ट की सच्चाई
इस बार शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार का घालमेल रोकने के लिए शासन ने तकनीक का सहारा लिया है। अब शिकायत निस्तारण की वास्तविक गुणवत्ता को जांचने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक डिजिटल टूल्स का उपयोग शुरू कर दिया गया है। जिलाधिकारी स्तर पर लागू किए गए इस एआई आधारित सिस्टम के जरिए यह बारीकी से ट्रैक किया जाएगा कि शिकायत का जमीन पर कोई ठोस समाधान हुआ है या केवल औपचारिक रिपोर्ट लगाकर केस को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।
इसी तकनीकी जांच और आवेदकों के वास्तविक फीडबैक के आधार पर अब राजस्व विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यस्थल ग्रेडिंग तय की जाएगी। यदि इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर थोड़ी सी भी लापरवाही या फर्जीवाड़ा दोबारा पकड़ा जाता है, तो संबंधित दोषी कर्मचारी के खिलाफ सीधे अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भू-माफियाओं और अवैध कब्जों पर भी चलेगा प्रशासन का विशेष डंडा
उपजिलाधिकारी (एसडीएम) विकास मित्तल ने इस संबंध में बताया कि दोबारा शुरू हो रही इस सघन जांच के दौरान सार्वजनिक, ग्राम समाज और सरकारी संपत्तियों पर किए गए अवैध कब्जों को भी प्रमुखता से चिह्नित किया जाएगा। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि चिन्हित किए गए सभी अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में कड़ी कानूनी और विधिक कार्रवाई की जाएगी।
शासन के सख्त निर्देशों के तहत इस अभियान में रास्ता और चकरोड विवाद, नाली पर किए गए अतिक्रमण, भूमि की वरासत से जुड़े लंबित मामले, विभिन्न न्यायालयों के आदेशों का अनुपालन, पट्टे और तालाब की जमीनों पर अवैध कब्जे, आबादी भूमि के पुराने विवाद, भू-माफियाओं द्वारा कब्जाई गई जमीनें, भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजे से जुड़े तकनीकी प्रकरण, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना से संबंधित शिकायतें, राजस्व अभिलेखों में संशोधन और पैमाइश (नापी) संबंधी विवादों की एक बार फिर से गहनता से री-चेकिंग की जाएगी।
30 जून तक का अल्टीमेटम, एडीएम रतन वर्मा ने दिए कड़े निर्देश
शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर जनसुनवाई के लिए नौगढ़ तहसील पहुंचे अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रतन वर्मा ने इस मामले पर बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि तहसील नौगढ़ में सामने आए इन सभी 316 संदिग्ध निस्तारणों की दोबारा पारदर्शिता के साथ जांच करने के लिए तहसील प्रशासन, वन विभाग और विकास खंड स्तर के अधिकारियों की संयुक्त टीमें गठित कर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
एडीएम न्यायिक ने सख्त समय-सीमा निर्धारित करते हुए सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इन सभी मामलों का हर हाल में धरातल पर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित कर आगामी 30 जून 2026 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट जिला मुख्यालय को प्रस्तुत करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी हीला-हवाली करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोरतम सेवा संबंधी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि रैंकिंग चमकाने के चक्कर में बंद की गई शिकायतों को प्रशासन अब जमीन पर कितना सुलझा पाता है।