नौगढ़ में DM का आदेश तार-तार: कागजों में सिमटा जन चौपाल का रोस्टर, चौपाल से नदारद रहे SDM और BDO

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चंदौली के नौगढ़ में जन चौपाल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। डीएम चंद्र मोहन गर्ग के सख्त आदेश के बावजूद एसडीएम, सीओ और बीडीओ जैसे बड़े अधिकारी चौपाल से गायब हैं, जिससे फरियादी दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

 
 

डीएम के आदेशों की सरेआम अनदेखी

पंचायत सचिवों के भरोसे जन चौपाल

एसडीएम विकास मित्तल का रोस्टर फेल

फरियादियों को मिल रहे खोखले आश्वासन

अधिकारियों की गैरहाजिरी से ग्रामीण आक्रोशित

चंदौली जिले के नौगढ़ इलाके में उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा के अनुसार काम करने में अफसरों को दिक्कत हो रही है। सरकार व जिलाधिकारी का मंशा है कि गांव की समस्या का समाधान गांव में ही हो जाए, इसके लिए जन चौपाल जैसी व्यवस्था की गई है। लेकिन चंदौली जिले की तहसील नौगढ़ में हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। यहाँ जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के निर्देशों को स्थानीय अधिकारी ठेंगा दिखा रहे हैं। एसडीएम विकास मित्तल द्वारा जारी किया गया रोस्टर महज एक कागज का टुकड़ा साबित हो रहा है।

चौपाल से बड़े अधिकारी नदारद, जनता परेशान
नौगढ़ तहसील में जन चौपाल का आयोजन तो किया जा रहा है, लेकिन वहां फरियादियों की बात सुनने वाला कोई जिम्मेदार अफसर मौजूद नहीं रहता। तय तारीखों पर लगने वाली चौपाल में न तो एसडीएम पहुंच रहे हैं और न ही क्षेत्राधिकारी (सीओ)। यहाँ तक कि विकास कार्यों के मुख्य कड़ी खंड विकास अधिकारी (बीडीओ), तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी चौपाल से दूरी बनाए हुए हैं। प्रशासनिक इच्छाशक्ति के अभाव में जनता अपनी समस्याओं को लेकर खुद से ही लड़ रही है।

सिर्फ खानापूर्ति और पंचायत सचिव का भरोसा
जमीनी हकीकत यह है कि चौपाल अब जन सुनवाई का माध्यम न होकर महज खानापूर्ति का मंच बन गई है। पूरी व्यवस्था पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान के भरोसे छोड़ दी गई है। अगर कोई ग्रामीण हिम्मत जुटाकर अपनी शिकायत लेकर पहुँचता भी है, तो उसे "देख लेंगे" या "फाइल आगे भेज देंगे" जैसे रटे-रटाए आश्वासन देकर टरका दिया जाता है। मौके पर निस्तारण तो दूर, विभागीय हस्तक्षेप भी शून्य बना हुआ है।

शिक्षा और कल्याण विभागों की भारी बेपरवाही
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब ग्रामीणों के जीवन से जुड़े विभाग जैसे—बेसिक शिक्षा (ABSA), महिला कल्याण, बाल विकास परियोजना और वन विभाग के अधिकारी भी चौपाल में नहीं आते। शिक्षा, पेंशन, आंगनबाड़ी और वन भूमि से जुड़े सैकड़ों मामले लंबित पड़े हैं। इन विभागों की बेरुखी से साफ है कि जन चौपाल अब समाधान का नहीं, बल्कि सरकारी उदासीनता का प्रतीक बन चुकी है।

डीएम साहब! जवाबदेही कब तय होगी?
अब सबसे बड़ा सवाल जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग से है। क्या आपके निर्देशों की अवहेलना करने वाले इन अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई होगी? एसडीएम के रोस्टर की मॉनिटरिंग आखिर क्यों नहीं की जा रही? अगर अधिकारियों की उपस्थिति की समीक्षा नहीं हुई, तो जन चौपाल जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था पूरी तरह दम तोड़ देगी। ग्रामीण जनता अब केवल आदेश नहीं, बल्कि धरातल पर समाधान और लापरवाह अधिकारियों पर जवाबदेही चाहती है।