भारी बारिश भी नहीं डिगा सकी हौसला: नौगढ़ में 51 साल पुरानी परंपरा निभाने के लिए 100 से अधिक कांवरिए बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना
नौगढ़ में तेज बारिश और कीचड़ के बावजूद शिवभक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। 51 साल पुरानी परंपरा को निभाते हुए पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी कांवर उठाई और बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हुईं।
नौगढ़ से बाबा बैद्यनाथ धाम कांवर यात्रा
51 साल पुरानी अटूट धार्मिक परंपरा
बारिश और कीचड़ पर भारी पड़ी आस्था
महिलाओं ने भी उठाई पवित्र कांवर
24 घंटे की पैदल यात्रा का संकल्प
सावन के चौथे सोमवार से पहले नौगढ़ क्षेत्र में गुरुवार तड़के चार बजे से मूसलाधार बारिश होती रही। जगह-जगह जलभराव और सड़कों पर कीचड़ हो गया, लेकिन यह खराब मौसम शिवभक्तों के मजबूत हौसले को नहीं तोड़ सका। नौगढ़ दुर्गा मंदिर से 100 से भी ज्यादा कांवरिए "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के गगनभेदी नारों के बीच झारखंड स्थित प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हुए।
विधि-विधान से पूजा के बाद मिली विदाई
सुबह सात बजे तक बारिश के बीच भी नौगढ़ का दुर्गा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से पूरी तरह भर चुका था। मुख्य पुजारी ने पूरे विधि-विधान से पूजन-अर्चन संपन्न कराया और सभी कांवरियों के माथे पर चंदन का तिलक लगाकर व प्रसाद देकर यात्रा के लिए विदा किया। इसके बाद कांवरियों का जत्था बाबा धाम के लिए निकल पड़ा, जिससे पूरा इलाका भक्तिमय हो गया।
महिलाओं ने भी संभाली कांवर, बनीं शिवदूत
इस यात्रा की सबसे खास बात महिलाओं की भारी भागीदारी रही। शाहपुर के प्रधान कृष्ण कुमार जायसवाल, श्रीवंत यादव, अरविंद, हृदय नारायण, राजेश और राजकुमार केशरी के साथ-साथ खुशबू, शोभा, रागिनी, कौशिल्या, रजनी और सुमन जैसी कई महिलाओं ने भी अपने कंधों पर कांवर उठाई। इन महिला श्रद्धालुओं ने संदेश दिया कि शिवभक्ति में कोई भेद नहीं होता। सभी शिवदूतों ने लगभग 24 घंटे की कठिन पैदल यात्रा कर बाबा बैद्यनाथ को गंगाजल चढ़ाने का संकल्प लिया।
51 वर्षों से लगातार चली आ रही है यह परंपरा
स्थानीय बुजुर्ग रामदेव साह ने बताया कि नौगढ़ से बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए कांवर ले जाने की यह परंपरा पिछले 51 सालों से बिना रुके चली आ रही है। मौसम चाहे कितना भी खराब क्यों न हो, भोलेनाथ के भक्त कभी पीछे नहीं हटते। इस यात्रा की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और नौगढ़ पुलिस ने भी रास्ते भर पुख्ता इंतजाम किए हैं।