डीएम की चेतावनी का बड़ा असर: नौगढ़ में खुली जमीन की फाइलें, एक ही गांव में 7 खतौनियों में मिली बड़ी गड़बड़ी

 

चंदौली के जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के कड़े रुख के बाद नौगढ़ तहसील में जमीनों की जांच तेज हो गई है। अमृतपुर गांव में चौपाल के दौरान खतौनी पढ़ने पर 7 जमीनी कागजातों में त्रुटियां मिलने से हड़कंप मच गया है।

 
 

डीएम की चेतावनी का बड़ा असर

नौगढ़ तहसील में खुली फाइलें

सात खतौनियों में मिली गड़बड़ी

गांव में पढ़ी गई खतौनी

भूमि विवाद रोकने की पहल

चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील क्षेत्र में राजस्व अभिलेखों की परतें अब खुलनी शुरू हो गई हैं। जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के सख्त निर्देश का जमीन पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है। तहसील प्रशासन ने गांवों का रुख करना शुरू कर दिया है, जिससे वर्षों से सरकारी फाइलों में दबे जमीनी विवादों और कागजी कमियों का सच अब जनता के सामने आने लगा है।

एक ही गांव में मिलीं 7 बड़ी गड़बड़ियां
अमृतपुर गांव में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब राजस्व विभाग की टीम ग्रामीणों के बीच पहुंची। अधिकारियों ने गांव वालों के सामने बैठकर जैसे ही खतौनी पढ़ी और रिकॉर्ड का मिलान शुरू किया, वैसे ही जमीनी खेल की पोल खुल गई। मौके पर ही सात खतौनियों में गंभीर त्रुटियां (कमियां) सामने आईं। इस खुलासे के बाद अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि यदि एक छोटे से गांव में इतनी कमियां हैं, तो पूरे नौगढ़ क्षेत्र का क्या हाल होगा?

गांव में पढ़ी गई खतौनी, सामने आई हकीकत
आपको बता दें कि बीते शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम चंद्र मोहन गर्ग ने एसडीएम को साफ लहजे में चेतावनी दी थी कि गांव-गांव चौपाल लगाकर जनता की समस्याएं मौके पर ही निपटाई जाएं। इसी कड़ी में अमृतपुर गांव में अंश निर्धारण एवं खतौनी दुरुस्ती अभियान चलाया गया। यहाँ लेखपाल मनीष सिंह ने सबके सामने खतौनी पढ़कर सुनाई। जब खातेदारों ने अपने रिकॉर्ड का मिलान किया, तो वास्तविक जमीन और कागजी प्रविष्टियों में भारी अंतर मिला। मौके पर ही त्रुटियां दर्ज कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए गए।

तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर परखी पूरी प्रक्रिया
इस पूरे अभियान की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार राकेश सिंह ने खुद मौके पर पहुंचकर औचक निरीक्षण किया। उन्होंने मातहतों को कड़े निर्देश दिए कि किसी भी गरीब या किसान का जमीनी अंश गलत नहीं होना चाहिए। सभी रिकॉर्ड को दस्तावेजी सबूतों के आधार पर पूरी पारदर्शिता के साथ दुरुस्त किया जाए। इस दौरान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि बच्चा यादव सहित शैलेन्द्र, गोरख, नरसिंह, अमरनाथ, सूबेदार और रामजन्म समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

भूमि विवाद रोकने और पारदर्शिता की ओर बड़ा कदम
राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जमीनी कागजातों को पूरी तरह साफ-सुथरा बनाना है, ताकि भविष्य में होने वाले भाई-भाई के झगड़ों और मुकदमेबाजी को रोका जा सके। अक्सर गलत अंश और अधूरी प्रविष्टियों के कारण किसान सालों-साल कोर्ट के चक्कर काटते हैं। ऐसे में गांव स्तर पर हो रही यह खुली जांच किसानों के लिए बेहद राहत भरी साबित हो रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस जांच को पूरे तहसील क्षेत्र में कब तक लागू करता है।