5 साल की लंबी परीक्षा के बाद मझगांवा की जर्जर पुलिया को मिला 50 लाख का 'मरहम', नौगढ़ में 12 गांवों को होगा फायदा
चंदौली के नौगढ़ में 5 साल से जर्जर मझगांवा पुलिया के दिन अब बहुरने वाले हैं। लोक निर्माण विभाग ने 50 लाख रुपये की लागत से नई पुलिया बनाने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। जानिए किसे मिलेगा लाभ!
मझगांवा की जर्जर पुलिया के बदलेगा दिन
50 लाख की लागत से नई पुलिया का प्रस्ताव
12 गांवों के लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
अमरा भगवती मंदिर जाने का रास्ता होगा आसान
पीडब्ल्यूडी ने शासन को भेजा नया बजट प्रस्ताव
चंदौली जिले की नौगढ़ तहसील के मझगांवा में जर्जर पुलिया से गुजरना पिछले पांच सालों से लोगों की मजबूरी बना हुआ था। मझगांवा-तिवारीपुर मार्ग पर स्थित इस पुलिया की रेलिंग टूटकर नहर में गिर चुकी थी और सड़क पर जगह-जगह खतरनाक गड्ढे हो गए थे। बरसात के दिनों में गड्ढों का पता ही नहीं चलता था, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों और आम राहगीरों के लिए हर पल हादसे का डर बना रहता था।
12 गांवों के आवागमन का मुख्य जरिया
यह पुलिया सिर्फ एक गाँव के लिए नहीं, बल्कि मझगांवा, तेंदुआ, नर्वदापुर और जयमोहनी समेत आसपास के करीब 12 गांवों के लोगों के लिए मुख्य रास्ता है। रामनाथ चौबे इंटर कॉलेज, पुलिस चौकी, आयुर्वेदिक अस्पताल, उप स्वास्थ्य केंद्र और साधन सहकारी समिति जाने के लिए रोज सैकड़ों लोग इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। पुलिया की बदहाली से इस पूरी आबादी का जनजीवन प्रभावित हो रहा था।
अमरा भगवती मंदिर के श्रद्धालुओं को भी मिलेगी राहत
यह मार्ग क्षेत्र की धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ है। प्रसिद्ध अमरा भगवती मंदिर जाने के लिए यही मुख्य रास्ता है। नवरात्रि और अन्य पर्वों पर दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को इस टूटी पुलिया के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब नई पुलिया बनने से भक्तों का सफर भी safe और आसान हो जाएगा।
शासन को भेजा गया 50 लाख का प्रस्ताव
ग्रामीणों की लंबी मांग के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) निर्माण खंड चंदौली ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला है। विभाग ने करीब 50 लाख रुपये की लागत से नई पुलिया बनाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को स्वीकृति के लिए भेज दिया है। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता कृष्ण कुमार ने बताया कि बजट की मंजूरी मिलते ही तुरंत निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
अब शासन से बजट मंजूरी का इंतजार
प्रस्ताव भेजे जाने के बाद 12 गांवों के ग्रामीणों में एक नई उम्मीद जगी है। 5 साल की लंबी परेशानी के बाद अब हर किसी की निगाहें शासन की हरी झंडी पर टिकी हैं। अगर बजट को जल्द मंजूरी मिल जाती है, तो पांच साल से चल रहा हादसों का खतरा खत्म हो जाएगा और इलाके के विकास को रफ्तार मिलेगी।