जूते हाथ में लेकर स्कूल जाने को मजबूर नौगढ़ के बच्चे, बदहाल सड़क को लेकर ग्रामीणों ने दी तालाबंदी की चेतावनी
चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक अंतर्गत पिपराही गांव में बदहाल सड़क से परेशान होकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। बच्चे हाथों में जूते लेकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। परेशान ग्रामीणों ने 7 दिन में सड़क न बनने पर तहसील में तालाबंदी की चेतावनी दी है।
हाथ में जूते लेकर स्कूल जा रहे बच्चे
पिपराही गांव की सड़क बनी कीचड़ का दलदल
समाधान दिवस में शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं
मरीजों को चारपाई पर ले जाने की मजबूरी
7 दिनों के भीतर तहसील तालाबंदी की दी चेतावनी
एक तरफ सरकार शिक्षा, निपुण भारत मिशन और गांव-गांव विकास पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, तो दूसरी तरफ नौगढ़ ब्लॉक के पिपराही गांव की जमीनी तस्वीर इन सभी दावों की हवा निकाल रही है। गांव में डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क और प्राथमिक विद्यालय को जोड़ने वाली सड़क सालों से गड्ढों और कीचड़ में तब्दील है।
हाथ में जूते लेकर स्कूल जाने को मजबूर मासूम
बरसात के दिनों में इस सड़क की हालत इतनी ज्यादा खराब हो जाती है कि स्कूली बच्चों को अपने जूते हाथ में लेकर कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार मासूम बच्चे कीचड़ में गिरकर चोटिल हो जाते हैं और उनकी कॉपियां-किताबें भी खराब हो जाती हैं। हर दिन अभिभावक किसी बड़े हादसे के डर के साये में जीने को मजबूर हैं।
मरीजों को चारपाई पर ले जाने की लाचारी
सड़क की इस दुर्दशा का खामियाजा सिर्फ बच्चों को ही नहीं, बल्कि पूरे गांव को भुगतना पड़ रहा है। कीचड़ के कारण गांव में एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाती है, जिससे बीमार लोगों को चारपाई पर लादकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि समाधान दिवस से लेकर नेताओं तक दर्जनों बार शिकायत की गई, लेकिन सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले।
7 दिनों का अल्टीमेटम, फिर तहसील में होगी तालाबंदी
बुधवार को आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीणों ने खराब सड़क पर उतरकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर सड़क की मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ, तो वे नौगढ़ तहसील पहुंचकर तालाबंदी करेंगे और बड़ा जनआंदोलन शुरू करेंगे।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
इस दौरान विनोद कुमार, विमलेश कुमार, बूडूक, कमला देवी, रमेश, कमलेश, शंभू, सुरेश, कालीचरण, संजय, संत कुमार और अशोक समेत गांव के कई लोग उपस्थित रहे। अब देखना यह है कि प्रशासन बच्चों और ग्रामीणों की समस्या पर ध्यान देता है या गांव का यह गुस्सा बड़े आंदोलन का रूप लेता है।