PM आवास की खुली बैठकों में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा; 15-20 लोगों की मौजूदगी में पढ़ दिए 774 नाम, उठे गंभीर सवाल
विकास खंड नौगढ़ की चार ग्राम पंचायतों में पीएम आवास योजना की खुली बैठक में भारी लापरवाही सामने आई है। महज 15-20 लोगों की मौजूदगी में 774 नाम पढ़े गए, जिनमें से 41 अपात्र नामों पर ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराई है।
नौगढ़ विकास खंड की चार ग्राम पंचायतों में बुलाई गई खुली बैठकें
774 संभावित लाभार्थियों की सूची में से 41 नामों पर ग्रामीणों ने जताई कड़ी आपत्ति
बैठक में सिर्फ 15 से 20 लोग ही रहे मौजूद, व्यापक सूचना न देने का आरोप
पक्के मकान वालों के नाम भी सूची में शामिल, दोबारा निष्पक्ष जांच की मांग
पंचायत सचिवों ने आपत्तियां रिकॉर्ड में दर्ज कर निष्पक्ष जांच का दिया भरोसा
चंदौली जिले के विकास खंड नौगढ़ से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के चार ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों के चयन के लिए खुली बैठकों का आयोजन किया गया था। लेकिन इन बैठकों ने पारदर्शी चयन प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पूरे गांव को बिना सूचना दिए, महज 15 से 20 लोगों की मौजूदगी में ही सैकड़ों नामों की सूची पढ़ दी गई।
चार गांवों की सूची में 41 नामों पर भारी विरोध
खुली बैठक के दौरान जैसे ही पंचायत सचिवों ने संभावित लाभार्थियों की लिस्ट पढ़नी शुरू की, वहाँ मौजूद मुट्ठी भर ग्रामीणों ने अपात्र लोगों के नामों पर खुलकर विरोध जताना शुरू कर दिया। चारों ग्राम पंचायतों को मिलाकर कुल 774 संभावित लाभार्थियों की सूची पेश की गई थी, जिसमें से सजग ग्रामीणों ने मौके पर ही 41 संदिग्ध और अपात्र नामों पर कड़ी आपत्ति दर्ज करा दी।
जानिए किस गांव में कितने नामों पर हुआ विवाद?
ग्राम पंचायत जरहर: यहाँ ग्राम पंचायत अधिकारी वरुण सिंह ने 75 लाभार्थियों की सूची पढ़ी, जिसमें से ग्रामीणों ने 10 नामों को गलत बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई। बैठक में ग्राम प्रधान सुशीला देवी मौजूद रहीं।
ग्राम पंचायत बरबसपुर: यहाँ ग्राम पंचायत अधिकारी सुधाकर पटेल ने 180 नाम सामने रखे, जिनमें से 15 नामों पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए। बैठक में ग्राम प्रधान जलिमुननिशा मौजूद थीं।
ग्राम पंचायत मझगाई: यहाँ ग्राम विकास अधिकारी मनीष सिंह ने 251 लोगों की सूची प्रस्तुत की। ग्रामीणों ने 4 नामों पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि इनके पास पहले से ही पक्के मकान हैं। यहाँ ग्राम प्रधान संतोष कुमार मौजूद रहे।
ग्राम पंचायत बजरडीहा: यहाँ ग्राम पंचायत अधिकारी संदीप प्रताप सिंह ने सबसे लंबी 268 नामों की सूची पढ़ी, जिसमें से 12 नामों पर ग्रामीणों ने आपत्ति की। इस दौरान ग्राम प्रधान संजय यादव उपस्थित रहे।
ग्रामीणों का बड़ा सवाल— पूरा गांव होता तो क्या होता?
इस घटना के बाद से नौगढ़ के ग्रामीण इलाकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि जब महज 15-20 लोगों ने ही सूची में इतनी बड़ी गड़बड़ी (41 अपात्र नाम) पकड़ ली, तो अगर बैठक की जानकारी पूरे गांव को होती और सभी लोग आते, तो न जाने कितने और फर्जी नाम सामने आते। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस सूची को सार्वजनिक करने से पहले गांवों में न तो कोई ढोल बजाकर मुनादी कराई गई और ना ही सभी वार्डों के लोगों तक इसकी सूचना पहुंचने दी गई।
घर-घर जाकर दोबारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब और बेघर परिवारों का जीवन बदलने वाली योजना है। ऐसे में किसी भी अपात्र या अमीर व्यक्ति का चयन किसी वास्तविक गरीब का हक छीनने जैसा है। लोगों ने मांग की है कि इस पूरी सूची की घर-घर जाकर दोबारा निष्पक्ष जमीनी जांच कराई जाए। उधर, मामले को बढ़ता देख पंचायत सचिवों ने सभी 41 आपत्तियों को रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया है और उच्चाधिकारियों को भेजकर निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया है।