सोनभद्र बॉर्डर तक पैदल पहुंचे रेंजर मोहन सिंह: 40 हेक्टेयर वनभूमि पर मिला कब्जा, निरस्त पट्टे की आड़ में उगाई मिर्च-टमाटर की फसल
मझगाई रेंज के नए रेंजर मोहन सिंह ने सोनभद्र सीमा तक पैदल निरीक्षण कर 40 हेक्टेयर वनभूमि पर अवैध खेती का पर्दाफाश किया। निरस्त पट्टे की आड़ में उगाई जा रही मिर्च-टमाटर की फसल पर अब जेसीबी चलेगी।
नौगढ़ जंगल में 40 हेक्टेयर अतिक्रमण
रेंजर मोहन सिंह का पैदल निरीक्षण
निरस्त पट्टे की आड़ में अवैध खेती
वन दरोगा और वनरक्षक को नोटिस
सितंबर में जेसीबी से हटेगा अतिक्रमण
नौगढ़ क्षेत्र के जंगल में अब निगरानी सिर्फ कागजों और रजिस्टरों तक सीमित नहीं रहेगी। मझगाई रेंज के नए वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) मोहन कुमार सिंह गुरुवार को केसार के सेमरहवा जंगल के निरीक्षण पर पहुंचे। उन्होंने गाड़ियों के बजाय जंगल के भीतर पैदल पड़ताल शुरू कर दी। सोनभद्र बॉर्डर तक पैदल चलते हुए जब उन्होंने वनभूमि को खंगाला, तो करीब 40 हेक्टेयर जमीन पर अवैध रूप से खेती किए जाने और मिर्च-टमाटर के हजारों पौधे लगाए जाने का मामला उजागर हो गया।
स्टाफ को लगाई सख्त फटकार, नोटिस जारी
जंगल के बीचों-बीच मिर्च और टमाटर के पौधों की कतारें देखकर रेंजर ने मौके पर ही जिम्मेदार कर्मचारियों से तीखे सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि जब इतने बड़े पैमाने पर ट्रैक्टर चला, जमीन जोती गई और पौधे लगाए गए, तो निगरानी करने वाले कर्मचारियों को इसकी खबर क्यों नहीं हुई? रेंजर ने सख्त रुख अपनाते हुए वन दरोगा और वनरक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
निरस्त पट्टे की आड़ में चल रहा था अवैध खेल
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, जिस जमीन पर खेती करने की कोशिश की जा रही थी, उसका पट्टा वर्षों पहले ही निरस्त हो चुका है। इसके बावजूद अतिक्रमणकारियों ने निरस्त पट्टे का सहारा लेकर आरक्षित वनभूमि को खेती की जमीन में बदलने की कोशिश की। रेंजर के इस अचानक किए गए निरीक्षण और सोनभद्र सीमा तक पैदल मार्च से अतिक्रमणकारियों में खलबली मच गई है और पूरे मझगाई रेंज के स्टाफ में हड़कंप व्याप्त है।
सितंबर में जेसीबी और रोटावेटर से होगी कार्रवाई
वन क्षेत्राधिकारी मोहन कुमार सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आरक्षित वनभूमि पर किसी भी कीमत पर अवैध खेती नहीं चलने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि सितंबर महीने में वह खुद मौके पर मौजूद रहकर जेसीबी और रोटावेटर की मदद से फसल को नष्ट करवाएंगे। अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीन पर गहरे गड्ढे खुदवाए जाएंगे ताकि भविष्य में दोबारा खेती न हो सके। इसके बाद सामाजिक वानिकी योजना के तहत वहां सागौन, शीशम और बांस के पौधे लगाकर फिर से हरा-भरा जंगल तैयार किया जाएगा।