नौगढ़ में नए तरीके से पत्रकार से साइबर ठगी: न OTP दिया न PIN डाला, फिर भी 60 हजार रुपये गायब
नौगढ़ में दैनिक जागरण के पत्रकार प्रदीप केसरी साइबर ठगी का शिकार हो गए। मोबाइल पर आए 'सिस्टम अपडेट' के एक क्लिक से उनका फोन हैक हो गया और बिना OTP या PIN के 10 मिनट में खातों से 60 हजार रुपये कट गए।
नौगढ़ के पत्रकार हुए साइबर ठगी के शिकार
एंड्रॉइड सिस्टम अपडेट के नाम पर फोन हैक
बिना OTP और PIN के कटे 60 हजार
दो बैंक खातों से निकाली गई रकम
1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज
अगर एक पत्रकार, जो रोज लोगों को जागरूक करने वाली खबरें लिखता है, वही साइबर ठगों के जाल में फंस जाए, तो आम आदमी कितना सुरक्षित है? चंदौली जिले के नौगढ़ में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और खतरनाक खेल खेला है। कथित "Android System Update" के नाम पर एक पत्रकार का मोबाइल हैक कर लिया गया। महज 10 मिनट के भीतर उनके दो अलग-अलग बैंक खातों से 60 हजार रुपये उड़ा लिए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि न कोई OTP आया और न ही कोई UPI PIN दर्ज किया गया, फिर भी पैसे दूसरे खातों में ट्रांसफर हो गए।
'सिस्टम अपडेट' का एक क्लिक और फोन हो गया पूरी तरह हैंग
नौगढ़ कस्बा बाजार निवासी प्रदीप केसरी, जो एक दैनिक समाचार पत्र दैनिक जागरण के रिपोर्टर हैं, गुरुवार शाम अपने मोबाइल पर आए कथित "Android System Update" के एक नोटिफिकेशन पर क्लिक कर बैठे। क्लिक करते ही उनका मोबाइल पूरी तरह से हैंग हो गया। मोबाइल की स्क्रीन ने काम करना बंद कर दिया और फोन स्विच ऑफ भी नहीं हो रहा था। लगभग 10 मिनट तक फोन इसी स्थिति में रहा। जब मोबाइल अपने आप सामान्य स्थिति में चालू हुआ, तो PhonePe से लगातार पैसे कटने के मैसेज आने शुरू हो गए।
दो बैंक खातों से 60 हजार रुपये पार
जांच करने पर पता चला कि प्रदीप के भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के दो खातों से पैसे कट चुके हैं। उनके एक व्यक्तिगत खाते से 53 हजार रुपये और एक चालू (करंट) खाते से 7 हजार रुपये, यानी कुल 60 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। यह रकम आयुष महतो और राजू साहू नाम के व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर की गई थी। पीड़ित पत्रकार का साफ कहना है कि उन्होंने किसी से कोई OTP साझा नहीं किया और न ही कोई UPI PIN डाला था, बस अपडेट के नाम पर आए फर्जी नोटिफिकेशन पर क्लिक किया था।
1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत, पुलिस जांच में जुटी
घटना के तुरंत बाद पीड़ित पत्रकार ने 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही अगले दिन नौगढ़ थाने में लिखित तहरीर दी गई। तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और संबंधित बैंक खातों तथा ट्रांजेक्शन डिटेल्स की जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल की टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह रकम किन-किन खातों में भेजी गई और इसके पीछे कौन सा साइबर गिरोह सक्रिय है।
सबसे बड़ा सवाल—क्या आपका मोबाइल भी सुरक्षित है?
यह मामला केवल एक पत्रकार के साथ हुई ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए बड़ी चेतावनी है जो स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है। जब एक सजग और जागरूक पत्रकार इस तरह के नए फर्जीवाड़े का शिकार हो सकता है, तो आम जनता के लिए खतरा कितना बड़ा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या तकनीकी कंपनियां और साइबर एजेंसियां ऐसे फर्जी ऐप्स और अपडेट लिंक को रोकने के लिए पुख्ता कदम उठा पा रही हैं, या फिर आम लोग इसी तरह अपनी मेहनत की कमाई खोते रहेंगे?
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है
आधिकारिक माध्यम ही चुनें: मोबाइल फोन को हमेशा अपने फोन की Settings या गूगल प्ले स्टोर/एप्पल ऐप स्टोर से ही अपडेट करें।
अनजान लिंक से बचें: किसी भी मैसेज, व्हाट्सएप लिंक या पॉप-अप नोटिफिकेशन में दिख रहे 'अपडेट' पर कभी क्लिक न करें।
थर्ड पार्टी ऐप से दूरी बनाएं: किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने फोन में स्क्रीन-शेयरिंग या रिमोट-एक्सेस ऐप इंस्टॉल न करें।
तुरंत करें शिकायत: किसी भी तरह के संदिग्ध लेन-देन का एहसास होते ही तुरंत 1930 पर कॉल करें और संबंधित बैंक को सूचित करें।
चंदौली समाचार की अपील:
आज इस खबर का शिकार एक पत्रकार हुआ है, कल कोई भी आम नागरिक इसका शिकार बन सकता है। इसलिए इस खबर को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि अपने परिजनों, दोस्तों और जान-पहचान के लोगों तक जरूर शेयर करें, ताकि वे साइबर ठगों के इस नए जाल से सुरक्षित रह सकें।