संत रविदास जी के 650वें जयंती वर्ष पर नौगढ़ पहुंची 'समरसता कलश यात्रा',  5 संत रविदास मंदिरों में होंगे विशेष आयोजन

 

संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के 650वें जयंती वर्ष पर निकली 'समरसता कलश वंदन यात्रा' नौगढ़ पहुंच गई है। यात्रा क्षेत्र के 5 प्रसिद्ध रविदास मंदिरों में जाएगी, जहां स्वच्छता अभियान, पौधरोपण और फल-वस्त्र वितरण जैसे सेवा कार्य आयोजित किए जाएंगे।

 
 

नौगढ़ पहुंची समरसता कलश वंदन यात्रा

5 प्रसिद्ध संत रविदास मंदिरों में पूजा

मंदिरों में चलेगा विशेष स्वच्छता अभियान

जरूरतमंदों को बांटे जाएंगे फल और वस्त्र

सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश

संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के 650वें जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे समरसता संकल्प अभियान की 'कलश वंदन यात्रा' सोमवार को नौगढ़ मंडल पहुंची। नौगढ़ बॉर्डर पर स्थित जमसोती के श्री महुआ बाबा आश्रम पर चकिया दक्षिणी के मंडल अध्यक्ष त्रिलोकी बिंद ने पवित्र कलश नौगढ़ मंडल अध्यक्ष सर्वजीत सिंह खरवार को सौंपा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने 'जय रविदास' के जोरदार जयकारे लगाए।

क्षेत्र के 5 संत रविदास मंदिरों में पहुंचेगा कलश
मंडल अध्यक्ष सर्वजीत सिंह खरवार ने बताया कि यह पवित्र कलश यात्रा अब नौगढ़ मंडल के विभिन्न गांवों का भ्रमण करेगी। यात्रा के तहत देवखत, मलेवर, अमदहां, झुमरिया और नौगढ़ स्थित 5 प्रमुख संत रविदास मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन का आयोजन किया जाएगा। प्रत्येक मंदिर परिसर में संकल्प सभाएं आयोजित कर संत रविदास जी के समता और सामाजिक भाईचारे के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

संत रविदास जी के विचारों को किया याद
सर्वजीत सिंह खरवार ने संत रविदास जी के प्रसिद्ध दोहे को याद करते हुए कहा, "ऐसी चहौं राज में, मिले सबन को अन्न। छोट-बड़े सब बसें, रैदास रहे प्रसन्न।" उन्होंने कहा कि 650 वर्ष पूर्व संत रविदास जी ने जिस समतामूलक समाज की कल्पना की थी, यह यात्रा उसी सपने को साकार करने और जात-पात का भेद मिटाकर 'एक भारत' बनाने का प्रयास है। उन्होंने सभी समाज के लोगों से इस यात्रा में भाग लेने की अपील की।

पूजन के साथ चलाए जाएंगे सेवा कार्य
कलश वंदन यात्रा के दौरान केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर सेवा कार्य भी आयोजित किए जाएंगे। सभी 5 मंदिर परिसरों में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधरोपण किया जाएगा। इसके साथ ही गरीब और जरूरतमंद लोगों के बीच फल एवं वस्त्रों का वितरण किया जाएगा ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक संत रविदास जी की कृपा और सेवा का भाव पहुंच सके।