नौगढ़ के सरकारी स्कूलों में 'तीन कांड': करंट, पिटाई और कुत्ते का जूठा खाना; 3 घटनाओं ने खोली शिक्षा विभाग की पोल

 

चंदौली के नौगढ़ में एक हफ्ते के अंदर तीन सरकारी स्कूलों से शर्मनाक और खतरनाक मामले सामने आए हैं। छात्र का करंट से झुलसना, छात्रा की बेरहमी से पिटाई और बच्चों को कुत्ते का जूठा खाना परोसने से शिक्षा विभाग पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

 
 

नौगढ़ तहसील के सरकारी स्कूलों से सामने आए तीन गंभीर मामले

अमरूद तोड़ने गया छात्र खुले गेट के कारण करंट से झुलसा

शिक्षामित्र की पिटाई से छात्रा अस्पताल पहुंची, प्रधानाध्यापक निलंबित

प्राथमिक विद्यालय जमसोत में बच्चों को परोसा गया जूठा खाना

हादसों के बाद जागा विभाग, निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील अंतर्गत संचालित सरकारी विद्यालयों से एक ही हफ्ते के भीतर तीन बेहद गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं ने जिले के बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और उसकी निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह से कठघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां एक विद्यालय में मासूम छात्र करंट लगने से झुलस गया, वहीं दूसरे स्कूल में शिक्षामित्र की बेरहम पिटाई से बच्ची को अस्पताल पहुंचना पड़ा। तीसरे मामले ने तो हद ही कर दी, जहां बच्चों की थाली में कुत्ते का जूठा खाना परोसने का मामला सामने आया है।

पहला मामला: लापरवाही के कारण करंट से झुलसा छात्र

पहला मामला एबीएसए (ABSA) कार्यालय के ठीक बगल में स्थित कंपोजिट विद्यालय नौगढ़ का है। भोजनावकाश के दौरान कक्षा छह का छात्र अमरेश अमरूद तोड़ने के लिए विद्यालय परिसर से बाहर चला गया। पास के ही खेत की बाड़ में दौड़ रहे बिजली के करंट की चपेट में आने से मासूम गंभीर रूप से झुलस गया। जांच में पता चला कि लंच के दौरान स्कूल का मुख्य गेट खुला छोड़ा गया था और बच्चों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा था। इस भारी लापरवाही पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सचिन कुमार ने प्रधानाध्यापक रमाकांत यादव के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि जारी की है।

दूसरा मामला: छात्रा की पिटाई से हड़कंप, प्रधानाध्यापक निलंबित

दूसरी घटना प्राथमिक विद्यालय कैसार की है, जिसने पूरे जिले में गुस्सा भर दिया। यहाँ एक शिक्षामित्र ने कक्षा पांच की छात्रा प्रियंका की इतनी बेरहमी से पिटाई कर दी कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्रधानाध्यापक सियाराम को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके अलावा स्कूल के सात अन्य शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि मारपीट करने वाले आरोपी शिक्षामित्र को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

तीसरा मामला: मिड-डे मील में बच्चों को परोसा गया जूठा चावल

तीसरा शर्मनाक मामला प्राथमिक विद्यालय जमसोत से सामने आया। यहाँ नौनिहालों को भोजन में कुत्ते का जूठा किया हुआ चावल परोसने की शिकायत मिली। मामला सामने आते ही खंड शिक्षा अधिकारी (ABSA) लालमणिराम कन्नौजिया ने प्रधानाध्यापक और रसोइया से जवाब-तलब किया है। विभाग का कहना है कि बच्चों के खाने की स्वच्छता और गुणवत्ता के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि ऐसी नौबत आई ही क्यों?

अधिकारियों की निरीक्षण व्यवस्था कहां सो रही थी?

तीनों घटनाएं भले ही अलग-अलग स्कूलों की हों, लेकिन ये सभी बेसिक शिक्षा विभाग की ढीली निगरानी प्रणाली को दर्शाती हैं। नियमित रूप से स्कूलों की जांच करना, बच्चों की सुरक्षा देखना और मिड-डे मील की गुणवत्ता जांचना बीएसए और एबीएसए स्तर के अधिकारियों की सीधी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में एक के बाद एक तीन बड़ी घटनाओं का सामने आना यह साबित करता है कि धरातल पर निरीक्षण सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है।

क्या सिर्फ निलंबन और नोटिस ही अंतिम समाधान है?

हर हादसे के बाद नीचे के शिक्षकों या कर्मचारियों पर कार्रवाई करके पल्ला झाड़ लेना कोई स्थायी समाधान नहीं है। अब समय आ गया है कि इस बात की भी समीक्षा हो कि इन विद्यालयों का आखिरी बार निरीक्षण कब हुआ था और उस वक्त अधिकारियों ने क्या रिपोर्ट दी थी। यदि समय-समय पर सच में सुरक्षा और भोजन की जांच की गई होती, तो शायद आज ये तीन हादसे न होते। नौगढ़ की इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि अगर निगरानी तंत्र समय पर सक्रिय होता, तो नौनिहालों का भविष्य और स्वास्थ्य इस तरह खतरे में न पड़ता।