नौगढ़ में 24 घंटे में दो को सांप ने डसा: झाड़-फूंक छोड़ तुरंत पहुंचे अस्पताल, सही समय पर इलाज से बच गयी जान
चंदौली के नौगढ़ में 24 घंटे के अंदर सर्पदंश के दो अलग-अलग मामले सामने आए। झाड़-फूंक के बजाय समय पर सीएचसी नौगढ़ पहुंचने और एंटी स्नेक वेनम मिलने से 13 साल के बच्चे और 25 साल के युवक की जान बच गई।
नौगढ़ में 24 घंटे में सर्पदंश के दो मामले
झाड़-फूंक छोड़ अस्पताल पहुंचने से बची दो जानें
बारिश के मौसम में जहरीले सांपों का बढ़ता आतंक
सीएचसी नौगढ़ में एंटी स्नेक वेनम से हुआ सफल इलाज
चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील क्षेत्र में जहरीले सांपों का दहशत थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में एक गर्भवती महिला और मासूम की मौत के बाद, बीते 24 घंटे के भीतर सर्पदंश की दो नई घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, इस बार परिजनों की समझदारी और डॉक्टरों की मुस्तैदी से बड़ा हादसा टल गया।
पहला मामला चकरघट्टा थाना क्षेत्र के केसार गांव का है। शुक्रवार शाम करीब छह बजे 25 वर्षीय हृदय लाल अपने खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान घास में छिपे जहरीले सांप ने उनके दाहिने पैर की अंगुली में काट लिया। कुछ ही देर में उन्हें चक्कर और शरीर में झनझनाहट महसूस होने लगी, जिसके बाद परिजन तुरंत उन्हें अस्पताल ले गए।
खेल रहे 13 साल के बच्चे को भी सांप ने डसा
दूसरी घटना ठठवा गांव की है, जहां कृष्ण कुमार का 13 वर्षीय बेटा चंद्रकेश अपने दोस्तों के साथ खेत के पास खेल रहा था। अचानक झाड़ियों से निकले सांप ने उसके पैर में काट लिया। बालक ने हिम्मत दिखाकर तुरंत अपने पिता को जानकारी दी। पिता ने बिना एक पल गंवाए उसे गाड़ी पर बैठाया और सीधे अस्पताल की ओर दौड़ पड़े।
अस्पताल में तुरंत मिला इलाज, एंटी स्नेक वेनम से बची जान
दोनों मरीजों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नौगढ़ लाया गया। सीएचसी में तैनात डॉ. सिद्धार्थ ने बिना देरी किए दोनों का इलाज शुरू किया और एंटी स्नेक वेनम का इंजेक्शन दिया। डॉक्टरों के मुताबिक सही समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण दोनों मरीजों की हालत अब खतरे से बाहर है और उन्हें निगरानी में रखा गया है।
अंधविश्वास छोड़ अस्पताल पहुंचना ही एकमात्र उपाय
कुछ दिन पहले नौगढ़ के कोठी घाट की एक महिला और उदितपुर सुर्रा गांव के बालक की सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में मौत हो गई थी। सीएचसी नौगढ़ के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अवधेश पटेल ने ग्रामीणों से अपील की है कि बारिश के मौसम में सांप बिलों से बाहर निकलते हैं। सर्पदंश की स्थिति में ओझा-गुनी के चक्कर में समय बर्बाद न करें और सीधे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र आएं।