अंधविश्वास का खौफ: दो मौतों के बाद ओझा ने दी चेतावनी, डर के मारे घर छोड़ने लगे वनवासी परिवार

 

चंदौली के नौगढ़ में अंधविश्वास के चलते वनवासी बस्ती में दहशत का माहौल है। दो लोगों की मौत के बाद ओझा की एक खौफनाक भविष्यवाणी से डरे कई परिवार घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें...

 
 

नैया घाट वनवासी बस्ती में खौफ

ओझा के दावे से फैला भारी डर

इलाज की जगह झाड़-फूंक पर भरोसा

दहशत में कई परिवारों का पलायन

स्वास्थ्य विभाग और प्रधान की पहल

चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील से एक बेहद हैरान और परेशान कर देने वाली खबर सामने आ रही है। आज के इस आधुनिक दौर में भी अंधविश्वास लोगों की सोच पर किस कदर हावी है, इसका एक जीता-जागता और खौफनाक उदाहरण तहसील की बाघी ग्राम पंचायत में देखने को मिला है। यहाँ कर्मनाशा नदी के किनारे बसी नैया घाट वनवासी बस्ती में इन दिनों अजीब सा सन्नाटा और डर पसरा हुआ है।

इस बस्ती में पिछले कुछ समय में दो वनवासियों की असमय मौत हो गई। इन मौतों के बाद यहाँ झाड़-फूंक करने वाले एक ओझा ने कथित तौर पर एक ऐसी खौफनाक भविष्यवाणी कर दी, जिसने पूरी बस्ती को हिलाकर रख दिया। ओझा ने दावा किया कि "यहाँ अभी और लोगों की जान जाएगी।" इस एक बयान के बाद बस्ती में ऐसा डर फैला कि कई परिवार अपने मासूम बच्चों को समेटकर घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं।

इलाज में देरी और झाड़-फूंक बनी मौतों की वजह
स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, नैया घाट बस्ती के रहने वाले जीतलाल वनवासी की 4 जुलाई की भोर में अचानक पेट में तेज दर्द उठा था। घरवाले उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया, लेकिन बदकिस्मती से रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

वहीं, इससे करीब एक महीने पहले जून के महीने में इसी बस्ती के भोनू बनवासी को एक जहरीले सांप ने काट लिया था। उस वक्त भी लोग उन्हें डॉक्टर के पास ले जाने के बजाय काफी देर तक झाड़-फूंक के चक्कर में ओझाओं के चक्कर काटते रहे। जब भोनू की हालत पूरी तरह बिगड़ गई, तब जाकर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और रास्ते में ही उनकी भी मौत हो गई।

50-60 घरों की बस्ती में आज भी चलता है ओझाई का खेल
नैया घाट वनवासी बस्ती में करीब 50 से 60 परिवार गुजर-बसर करते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस छोटी सी बस्ती में ही 5 से 6 लोग झाड़-फूंक और ओझाई का धंधा चलाते हैं। यहाँ परंपरा सी बन गई है कि जब भी कोई बच्चा या बड़ा बीमार पड़ता है, तो लोग सबसे पहले अस्पताल का रुख नहीं करते, बल्कि इन ओझाओं के पास लाइन लगाते हैं।

बीमारी को भूत-प्रेत और ऊपरी साया मानने की इसी दकियानूसी सोच की वजह से मरीजों को सही समय पर डॉक्टरी इलाज नहीं मिल पाता है। दो मौतों के बाद ओझा द्वारा दी गई चेतावनी से डरे कई वनवासी परिवार अब पुराने बाजार क्षेत्र की वनवासी बस्ती में शरण ले चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सूरज ढलते ही बस्ती में खौफ और ज्यादा गहरा जाता है।

स्वास्थ्य विभाग के साथ ग्राम प्रधान ने कस ली है कमर
इस संवेदनशील मामले को लेकर जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) नौगढ़ के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अवधेश पटेल से बात की गई, तो उन्होंने साफ कहा कि सांप काटने या पेट दर्द जैसी गंभीर समस्याओं का एकमात्र इलाज सिर्फ अस्पताल है। झाड़-फूंक से कोई जान नहीं बचाई जा सकती। उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम जल्द ही इस बस्ती में एक बड़ा जागरूकता अभियान शुरू करेगी।

दूसरी तरफ, ग्राम प्रधान नीलम ओहरी ने भी इस मामले पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में आया है और यह बेहद गंभीर विषय है। पंचायत की तरफ से जल्द ही वनवासी बस्ती में एक चौपाल लगाई जाएगी, जहाँ लोगों को वैज्ञानिक सोच अपनाने और बीमारी की स्थिति में बिना वक्त गंवाए तुरंत अस्पताल पहुंचने के लिए प्रेरित किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान न जाए।