नौगढ़ में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान में बड़ा खेल, पोर्टल पर हरियाली लेकिन जमीन पर सूख रहे पौधे
चन्दौली के नौगढ़ में सरकारी पौधारोपण अभियान में बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहाँ एक तरफ कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर पौधा लगा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ मरवटिया में सैकड़ों पौधे सड़क और तालाब किनारे लावारिस पड़े सूख रहे हैं।
नौगढ़ में पौधारोपण में बड़ा खेल
सड़क किनारे पड़े मिले सैकड़ों पौधे
पोर्टल पर एंट्री, जमीन पर वीरानी
नोडल अधिकारी की निगरानी पर सवाल
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान को जनआंदोलन बनाकर करोड़ों पौधे लगाने का दावा कर रही है। रविवार को चन्दौली के जलेबिया मोड़ स्थित चंद्रप्रभा रेंज की वनदेवी में कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर खुद पौधारोपण कर पर्यावरण बचाने का संदेश दे रहे थे। लेकिन दूसरी तरफ नौगढ़ विकासखंड की मरवटिया ग्राम पंचायत से आई तस्वीरों ने इस पूरे अभियान की हवा निकाल दी है।
चंदौली समाचार की ग्राउंड रिपोर्ट में मरवटिया में वृक्षारोपण के लिए लाए गए सैकड़ों पौधे तालाब के किनारे और सड़क पर लावारिस पड़े मिले। सरकारी लापरवाही का आलम यह है कि कई पौधे बोरों में ही बंद रह गए और कई तेज धूप में सूखकर दम तोड़ रहे हैं। मौके पर न तो गड्ढे खोदे गए हैं और न ही वहां कोई पौधा लगाया गया है।
पोर्टल पर हरियाली, जमीन पर वीरानी
स्थानीय लोगों और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जी-रामजी योजना के तहत विकास खंड नौगढ़ की कई ग्राम पंचायतों में कागजी तौर पर बड़ा खेल चल रहा है। सरकारी पोर्टल पर बड़े पैमाने पर गड्ढा खुदाई और पौधारोपण की फर्जी प्रविष्टियां (एंट्री) दर्ज कर दी गई हैं। मरवटिया की हकीकत देखकर यह साफ है कि सिर्फ रिकॉर्ड चमकाने के लिए ऑनलाइन डेटा भर दिया गया और हकीकत में पौधों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
नौगढ़ में जी-रामजी योजना के नोडल अधिकारी डीसी मनरेगा हैं। ऐसे में ऑनलाइन रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में इतना बड़ा अंतर आने के बाद उनकी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि कुछ जगहों पर सिर्फ फोटो और वीडियो बनाने के लिए औपचारिक रूप से पौधे गाड़े गए, जबकि बड़ी खेप बिना लगाए ही फेंक दी गई।
जांच हुई तो खुलेगा बड़ा राज
एक स्थानीय ग्रामीण ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "ऊपर मंत्री जी पौधा लगाने का बड़ा-बड़ा संदेश दे रहे हैं और नीचे जमीनी स्तर पर पौधे सड़क व तालाब किनारे सड़ रहे हैं। आखिर इन बेजुबान पौधों की मौत का जिम्मेदार कौन है?" यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हो रही धोखाधड़ी का है।
अगर प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कराए और पंचायत में पोर्टल पर दर्ज प्रत्येक गड्ढे और पौधे का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करे, तो एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हो सकता है। जब इस पूरे मामले को लेकर खंड विकास अधिकारी (BDO) राकेश सिंह से बात की गई, तो उन्होंने बेहद संक्षिप्त और रटा-रटाया जवाब देते हुए कहा, "देखते हैं।" अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर क्या एक्शन लेता है।