क्या अगली पीढ़ी को मिलेगा पानी? नौगढ़ के रेंजर की भावुक अपील-आज की बचत ही कल का जीवन

 

नौगढ़ के रिठिया विद्यालय में भू-जल सप्ताह के तहत वन विभाग ने अनोखा अभियान शुरू किया। रेंजर अमित श्रीवास्तव ने भावुक अपील करते हुए कहा कि पानी की हर बूंद आने वाली पीढ़ियों के लिए अमृत बनेगी, इसलिए जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाएं।

 
 

नौगढ़ के रिठिया से जल संरक्षण मुहिम

रेंजर अमित श्रीवास्तव की भावुक अपील

भू-जल स्तर गिरने पर गंभीर चेतावनी

बच्चों और ग्रामीणों ने ली सामूहिक शपथ

वर्षा जल संचयन और पौधारोपण पर जोर

आज जिस तेजी से जमीन के नीचे का पानी खत्म हो रहा है, वह आने वाले दिनों में बहुत बड़े जल संकट की ओर इशारा कर रहा है। अगर हमने समय रहते पानी की बर्बादी नहीं रोकी, तो हमारी आने वाली पीढ़ी प्यासी रह सकती है। इसी गंभीर खतरे को देखते हुए चंदौली जिले की नौगढ़ तहसील के पूर्व माध्यमिक विद्यालय रिठिया से एक बहुत ही खास और भावुक मुहिम की शुरुआत हुई है।

वन विभाग ने आयोजित किया जागरूकता कार्यक्रम
काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर वाराणसी के प्रभागीय वनाधिकारी बी. शिव शंकर के निर्देशों के तहत यह पहल की गई। जयमोहनी रेंज की टीम ने मंगलवार को रिठिया स्कूल में भू-जल सप्ताह के तहत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम रखा। इस कार्यक्रम का मकसद सिर्फ स्कूली बच्चों को समझाना ही नहीं, बल्कि गाँव-गाँव और हर घर तक पानी की एक-एक बूंद बचाने का संदेश पहुँचाना था।

रेंजर अमित श्रीवास्तव की भावुक अपील
कार्यक्रम में मौजूद जयमोहनी Range के वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) अमित श्रीवास्तव ने लोगों को संबोधित करते हुए बेहद भावुक बात कही। उन्होंने कहा, "जल संरक्षण कोई सिर्फ सरकारी कागजी अभियान नहीं है, बल्कि यह हर परिवार की अपनी जिम्मेदारी है। आज अगर हम अपने घर में सिर्फ एक लोटा पानी भी बचाते हैं, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए किसी अमृत से कम नहीं होगा।"

पानी की हर बूंद जीवन से जुड़ी है
रेंजर अमित श्रीवास्तव ने पानी का मोल समझाते हुए आगे कहा कि हमारे द्वारा बचाई गई पानी की एक-एक बूंद किसी गरीब किसान की लहलहाती फसल, किसी माँ की रसोई और किसी नन्हे बच्चे की प्यास से जुड़ी है। उन्होंने सभी से संकल्प लेने को कहा कि पानी को कभी बेवजह बहने नहीं देंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे बच्चों के लिए भविष्य की सबसे बड़ी विरासत कोई धन-दौलत नहीं, बल्कि पीने के लिए सुरक्षित जल होगा।

भू-जल गिरा तो सबसे पहले संकट में आएंगे गाँव
कार्यक्रम में रेंजर ने बच्चों और ग्रामीणों को चेताया कि पीने का पानी, खेती और बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों का ज्यादातर काम जमीन के अंदर के पानी पर ही टिका है। लोग लगातार पानी खींच रहे हैं लेकिन बारिश के पानी को सहेज नहीं रहे, जिससे जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है। अगर हमने अपनी आदतें नहीं बदलीं, तो सबसे पहले गाँवों में पीने के पानी का भारी संकट पैदा हो जाएगा।

बच्चों और ग्रामीणों ने ली जल संरक्षण की शपथ
कार्यक्रम के दौरान वन दरोगा वीरेंद्र पांडे ने बच्चों को पानी बचाने के आसान तरीके सिखाए। उन्होंने नल को खुला न छोड़ने, बारिश के पानी को जमा करने, ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने और जरूरत के हिसाब से पानी का इस्तेमाल करने की सलाह दी। कार्यक्रम के आखिर में स्कूल के प्रधानाध्यापक लाल बहादुर, शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों ने एक साथ हाथ उठाकर पानी बचाने की कसम खाई और इसे अपने गाँव तक पहुँचाने का संकल्प लिया।