नौगढ़ ब्लॉक में प्राइवेट लड़कों के भरोसे चल रहा सिस्टम; आखिर फील्ड में कब उतरेंगे प्रभारी बीडीओ?

 

चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक में मुख्यमंत्री आवास योजना कागजी खेल बनकर रह गई है। जमीनी स्तर पर सिर्फ 5 फीट की अधूरी दीवारें खड़ी हैं, लेकिन पोर्टल पर फर्जी सत्यापन कर मकान को पूर्ण दिखाकर किस्तें जारी कर दी गईं।

 
 

नौगढ़ में आवास योजना पर उठे सवाल

बिना छत के मकान को बताया पूर्ण

प्राइवेट लड़कों से कराई जियो-टैगिंग

समाधान दिवस में पहुंची वसूली की शिकायतें

बीडीओ विकास सिंह की कार्यशैली पर सवाल

 चंदौली जिले की नौगढ़ तहसील से मुख्यमंत्री आवास योजना में एक बड़ी लापरवाही और धांधली का मामला सामने आया है। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ की इस अत्यंत महत्वाकांक्षी और प्राथमिकता वाली योजना को स्थानीय स्तर पर कागजी आंकड़ों की बाजीगरी में उलझा दिया गया है। जमीनी हकीकत यह है कि क्षेत्र में कई लाभार्थियों के मकान सिर्फ 5 से 6 फीट तक की दीवारों पर ही अटके हुए हैं। न तो वहां छत पड़ी है और न ही प्लास्टर या रंगाई-पुताई का काम हुआ है, लेकिन सरकारी पोर्टल पर इन अधूरे मकानों को पूरी तरह 'निर्मित' दिखाकर कार्य पूर्णता रिपोर्ट अपलोड कर दी गई। इसके साथ ही योजना की दूसरी और तीसरी किस्त भी जारी करा ली गई।

प्राइवेट लड़कों के भरोसे चल रहा है पूरा सिस्टम
स्थानीय स्तर से मिल रही शिकायतों के अनुसार, कई गांवों के पंचायत सचिव मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। आरोप है कि सचिवों ने गांवों की कमान अपने स्तर पर रखे प्राइवेट लड़कों को सौंप रखी है। ये बाहरी लड़के ही गांवों में जाकर मनमाने तरीके से जियो-टैगिंग और फोटो अपलोडिंग का काम कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि कहीं अधूरी और टूटी दीवारों को अलग-अलग कोण (एंगल) से खींचकर प्रगति रिपोर्ट तैयार कर दी जा रही है, तो कहीं बिना छत के खड़े ढांचों को भी “संपूर्ण आवास” की श्रेणी में डालकर सरकारी बजट को ठिकाने लगाया जा रहा है।

सेक्टर प्रभारी ADO की मॉनिटरिंग पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे प्रकरण में केवल पंचायत सचिव ही नहीं, बल्कि ब्लॉक स्तर के जिम्मेदार अधिकारी भी कटघरे में खड़े नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री आवास योजना के सही क्रियान्वयन और निष्पक्ष जांच के लिए सेक्टर प्रभारी के रूप में एडीओ (ADO) स्तर के अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। नियमतः उन्हें मौके पर जाकर निर्माण कार्य की प्रगति देखनी थी। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इन सेक्टर प्रभारियों ने कभी गांवों का रुख किया भी या फिर दफ्तर में बैठकर ही फाइलों को आगे बढ़ा दिया? अगर धरातल पर जांच की गई होती, तो बिना छत और बिना प्लास्टर वाले मकानों की अंतिम किस्तें कभी पास नहीं हो पातीं।

समाधान दिवस में भी गूंजी वसूली की शिकायतें, बीडीओ मौन
भ्रष्टाचार की यह कहानी सिर्फ फर्जी रिपोर्ट तक सीमित नहीं है। संपूर्ण समाधान दिवस में चंद्र मोहन गर्ग के समक्ष कई महिला लाभार्थियों ने आवास योजना के नाम पर अवैध वसूली किए जाने की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, प्रशासनिक कागजों में इन शिकायतों के निस्तारण का दावा तो कर दिया गया, लेकिन धरातल पर पीड़ितों की स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। 

पूरी व्यवस्था अब सीधे तौर पर ब्लॉक प्रशासन की ढीली कार्यशैली की गवाही दे रही है। क्षेत्र की जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि आखिर खंड विकास अधिकारी (BDO) विकास सिंह फील्ड में उतरकर इस मनमानी पर कब नकेल कसेंगे? गरीबों को छत देने की इस पुनीत योजना को पारदर्शी बनाने के लिए अब आरोपियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी हो गया है।