नौगढ़ में 'सुशासन' मेले की खुली पोल! केंद्र सरकार के 12 वर्ष के जश्न में खाली रहीं कुर्सियां, सरकारी खानापूर्ति बना सम्मान दिवस

 

समरी: चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर आयोजित 'सेवा व सुशासन' कार्यक्रम महज सरकारी खानापूर्ति साबित हुआ। दोपहर तक मुख्य अतिथि और अधिकारी नदारद रहे, जिससे फरियादियों को खाली हाथ लौटना पड़ा।

 
 

नौगढ़ विकास खंड कार्यालय सभागार का मामला

12 विभागों की जगह दिखे सिर्फ दो स्टॉल

मुख्य अतिथि और जिम्मेदार अधिकारी रहे नदारद

स्वास्थ्य विभाग ने बांटीं हरी-पीली दवाइयां

खाली कुर्सियों को देख मायूस लौटे फरियादी

केंद्र सरकार के सफल 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देश भर में उपलब्धियों का बखान करने और आम जनता को सरकारी योजनाओं से सीधे जोड़ने के लिए 'सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण' कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन चंदौली जिले के विकास खंड नौगढ़ में इस भव्य आयोजन का एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने जमीनी हकीकत की कलई खोलकर रख दी। जिस मंच और सभागार से स्थानीय ग्रामीण जनता को सुशासन और विकास का संदेश दिया जाना था, वहां दोपहर 12 बजे तक सन्नाटा पसरा रहा। मुख्य अतिथि से लेकर क्षेत्र के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी तक मौके से गायब रहे, जिससे कार्यक्रम में केवल खाली कुर्सियों का ही साम्राज्य नजर आया।

12 विभागों का था दावा, लेकिन सिमट कर रह गया तमाशा
शासन की ओर से सख्त निर्देश थे कि इस विकास मेले में क्षेत्र के कम से कम 12 प्रमुख विभागों के स्टॉल लगाए जाएं, ताकि ग्रामीण एक ही छत के नीचे आकर अपनी समस्याओं का समाधान पा सकें और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले सकें। लेकिन नौगढ़ ब्लॉक सभागार में दोपहर तक केवल दो विभाग ही सक्रिय दिखे। बाकी 10 विभागों के टेबल और कुर्सियां पूरी तरह नदारद रहीं। इस अव्यवस्था के कारण दूर-दराज के गांवों से आस लेकर पहुंचे फरियादियों को भारी निराशा हाथ लगी। लोग अपनी शिकायतें और आवेदन हाथ में लिए अधिकारियों का घंटों इंतजार करते रहे और अंत में मायूस होकर अपने घरों को लौट गए।

दवा वितरण तक सीमित रहा स्वास्थ्य विभाग, ये कर्मचारी रहे उपस्थित
इस बेरंग आयोजन के बीच राहत की बात बस इतनी रही कि स्वास्थ्य विभाग और पंचायत विभाग के कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर तैनात मिले। स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल पर केवल हरी, लाल और पीली बुनियादी दवाओं का वितरण ही मुख्य आकर्षण रहा। इस दौरान वहां महिला डॉक्टर अनुराधा, डॉ. नीरज, फार्मासिस्ट अमरजीत, काउंसलर अनिल शर्मा, शिवकुमार सोनकर, नेत्र सहायक श्याम नंदन, एएनएम प्रिया भारती, राजकुमारी, लैब टेक्नीशियन राकेश और एनएमए वीरेंद्र मौजूद रहे। दूसरी ओर, पंचायत विभाग के स्टॉल पर खंड प्रेरक ज्ञानेंद्र प्रताप, हृदय, राम निहोर और सूबेदार उपस्थित रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाते नजर आए।

लापरवाही ने कार्यसंस्कृति पर खड़े किए गंभीर सवाल
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रशासन और आम जनता के बीच की दूरी को मिटाना था। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की इस सामूहिक गैरमौजूदगी ने शासन के 'सेवा और संस्कार' के दावों पर पानी फेर दिया है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि जब सरकार के इतने बड़े कार्यक्रम में भी अधिकारी समय पर नहीं पहुंच रहे हैं, तो आम दिनों में उनकी जवाबदेही क्या होगी? इस फ्लॉप शो ने प्रशासनिक अनुशासन पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है कि जब सुशासन के मंच से जिम्मेदार ही गायब हों, तो जनता को सहभागिता का क्या संदेश दिया जा रहा था।