नौगढ़ में 'मौत वाले ट्रांसफार्मर' को दोबारा लगाने पर भारी बवाल, 48 घंटे से अंधेरे में डूबे कस्बे में पहुंचे SDM

 

चंदौली के नौगढ़ कस्बे में 24 जून को करंट से हुई मौत वाले स्थान पर दोबारा ट्रांसफार्मर लगाने पहुंची टीम का परिजनों ने जमकर विरोध किया। एसडीएम विनय मिश्रा के सुरक्षा और शिफ्टिंग के आश्वासन के बाद ही मामला शांत हो सका।

 
 

48 घंटे से अंधेरे में डूबा था नौगढ़ कस्बा

24 जून को करंट से हुई थी मंगल सिंह की मौत

बिना पुख्ता सुरक्षा ट्रांसफार्मर लगाने का भारी विरोध

एसडीएम विनय मिश्रा और थानाध्यक्ष मौके पर पहुंचे

विधायक कैलाश आचार्य ने निधि से बजट देने को कहा

चंदौली जिले के नौगढ़ कस्बा बाजार में पिछले 48 घंटे से बिजली का भारी संकट गहराया हुआ था। बुधवार की रात 400 केवीए का मुख्य ट्रांसफार्मर जल जाने की वजह से पूरा कस्बा घने अंधेरे में डूबा हुआ था। व्यापारी और आम लोग चाहते थे कि नया ट्रांसफार्मर जल्दी से लगे ताकि बिजली आ सके। लेकिन शनिवार को जब बिजली विभाग की टीम नया ट्रांसफार्मर लगाने पहुंची, तो वहां हंगामा खड़ा हो गया। दरअसल, यह वही जगह थी जहां बीते 24 जून को करंट लगने से स्थानीय नागरिक मंगल सिंह केशरी की दर्दनाक मौत हो गई थी।

पिता को खोने का दर्द और सुरक्षा की मांग
हादसे वाले स्थान पर बिना किसी ठोस सुरक्षा इंतजाम के दोबारा ट्रांसफार्मर कसने की तैयारी देखकर मृतक के परिजन भड़क गए। मृतक के बेटे आनंद केशरी का दर्द साफ छलक रहा था। उन्होंने रोते हुए कहा कि उनके पिता ही घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे और उनके जाने से पूरा परिवार बिखर गया है। आनंद ने कहा कि उन्हें कस्बे में बिजली आने से कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन वे बिना सुरक्षा के यहाँ ट्रांसफार्मर नहीं लगने देंगे। उन्हें डर है कि सुरक्षा जाली में फिर करंट आने से कोई और परिवार अनाथ न हो जाए।

नेताओं ने दिया था आश्वासन, पर काम रहा ठप
आपको बता दें कि 24 जून की घटना के बाद कस्बावासियों ने इस ट्रांसफार्मर को किसी दूसरे सुरक्षित स्थान पर हटाने (शिफ्ट करने) की मांग को लेकर बड़ा धरना-प्रदर्शन किया था। उस समय सांसद कुंवर छोटेलाल खरवार ने बिजली विभाग के बड़े इंजीनियरों को शिफ्टिंग का एस्टीमेट बनाने को कहा था। शनिवार को जब दोबारा बवाल बढ़ा, तो चकिया विधायक कैलाश आचार्य ने भी फोन पर बातचीत की और अपनी विधायक निधि से इस काम के लिए जरूरी बजट देने का ऐलान किया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पिछले दस दिनों में विभाग ने खुद से कोई तैयारी क्यों नहीं की?

एसडीएम विनय मिश्रा ने संभाला मोर्चा
हंगामे की खबर मिलते ही उपजिलाधिकारी (SDM) विनय मिश्रा और थानाध्यक्ष प्रमोद यादव भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। करीब दो घंटे तक चले हाई वोल्टेज ड्रामे और टकराव की स्थिति को एसडीएम ने बेहद सूझबूझ से संभाला। उन्होंने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि फिलहाल इस ट्रांसफार्मर के चारों तरफ प्लास्टिक की मजबूत बैरिकेडिंग कराई जाएगी ताकि कोई इसके पास न जा सके। इसके साथ ही उन्होंने वादे के मुताबिक ट्रांसफार्मर को दूसरी जगह शिफ्ट करने का पक्का प्रस्ताव शासन को भेजने की बात कही।

बिजली विभाग की सुस्ती पर उठे गंभीर सवाल
एसडीएम और विधायक के इस भरोसे के बाद ही परिजनों ने विरोध बंद किया और बिजली कर्मियों ने नया ट्रांसफार्मर लगाने का काम शुरू किया। इस पूरे घटनाक्रम ने बिजली विभाग की लापरवाही को एक बार फिर उजागर कर दिया है। अगर हादसे के तुरंत बाद ही विभाग इस ट्रांसफार्मर को हटाने की कागजी कार्रवाई शुरू कर देता, तो न तो शनिवार को यह हंगामा होता और न ही पीड़ित परिवार को दोबारा उस खौफनाक मंजर की यादों से गुजरना पड़ता। फिलहाल कस्बे में बिजली आने की उम्मीद तो जगी है, लेकिन लोग अब भी इस ट्रांसफार्मर के यहाँ से हटने का इंतजार कर रहे हैं।