नौगढ़ में अफसरशाही की भेंट चढ़ी 'जी रामजी योजना': 2 महीने से काम का इंतजार कर रहे मजदूर, ID-पासवर्ड के चक्कर में फंसा सिस्टम
चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक में "जी रामजी योजना" अफसरशाही और तकनीकी फाइलों में उलझ गई है। नए सत्र के दो महीने बीतने के बाद भी रोजगार सेवकों को आईडी-पासवर्ड न मिलने से मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है।
दो महीने से बंद पड़ा सिस्टम
रोजगार सेवक कर रहे लॉगिन का इंतजार
प्रधान प्रस्ताव की फाइल लेकर बैठे
डीएम की डांट के बाद पहुंचे अफसर
मजदूरों को अब तक नहीं मिला काम
चंदौली जिले के नक्सल प्रभावित नौगढ़ तहसील में इन दिनों बेहद चर्चित “जी रामजी योजना” जमीन पर उतरने से पहले ही दम तोड़ती नजर आ रही है। यह महत्वाकांक्षी योजना पूरी तरह से लचर सिस्टम और अफसरशाही की फाइलों के भंवर में उलझ गई है। मीडिया में इस समस्या के प्रमुखता से उजागर होने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप जरूर मचा और डीसी मनरेगा तुरंत विकास खंड नौगढ़ पहुंचे।
उन्होंने स्थानीय मजदूरों को जल्द से जल्द रोजगार मुहैया कराने का खोखला भरोसा भी दिया, लेकिन धरातल की कड़वी हकीकत जस की तस बनी हुई है। वित्तीय वर्ष के नए सत्र के दो महीने से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी क्षेत्र की अधिकांश ग्राम पंचायतों में काम शुरू नहीं कराया जा सका है।
रोजगार सेवक कर रहे पासवर्ड का इंतजार, प्रधानों की फाइलें ठप
योजना के जमीनी स्तर पर न शुरू होने की मुख्य वजह यह है कि अब तक ग्राम पंचायतों के रोजगार सेवकों को “युक्त धारा” पोर्टल का आईडी और पासवर्ड ही उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। एक तरफ जहां ग्राम प्रधान अपने स्तर से विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर और फाइलें बनाकर बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ ऑनलाइन प्रक्रिया का डिजिटल दरवाजा बंद होने से सब कुछ ठप है।
पूरे नौगढ़ ब्लॉक में फिलहाल केवल एक ही गांव के रोजगार सेवक को आईडी और पासवर्ड मिलने की चर्चा सामने आई है, जबकि बाकी सभी पंचायतें अब भी सिस्टम के सक्रिय होने की राह देख रही हैं। ऐसे में स्थानीय जनता पूछ रही है कि जब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार ही नहीं था, तो रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे किस आधार पर किए गए थे?
जिम्मेदार अधिकारियों के रवैये पर उठ रहे गंभीर सवाल
इस पूरे प्रकरण में स्थानीय स्तर पर तैनात अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठ रही हैं। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि एपीओ सुरेंद्र कुमार नए सत्र के दो महत्वपूर्ण महीने बीत जाने के बाद भी पंचायतों के रोजगार सेवकों को जरूरी लॉगिन क्रेडेंशियल उपलब्ध कराने में नाकाम रहे हैं, जिससे पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
वहीं दूसरी तरफ, क्षेत्र में यह भी चर्चा काफी तेज है कि जिलाधिकारी (डीएम) चंद्र मोहन गर्ग की कड़ी नाराजगी और डांट के बाद, खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) विकास सिंह अब दोपहर बाद किसी तरह नौगढ़ ब्लॉक मुख्यालय पहुंच रहे हैं। इससे पहले उनके लगातार दफ्तर से अनुपस्थित रहने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
मजदूर परेशान, जनता पूछ रही साहब का टाइम टेबल क्या है?
अधिकारियों के इस लचर रवैये के कारण ग्रामीण बेहद परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ब्लॉक मुख्यालय में अधिकारियों के बैठने और जनता की फरियाद सुनने का कोई निश्चित समय तय नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की योजनाओं का संचालन आखिर किस रामभरोसे व्यवस्था से किया जा रहा है?
गरीब मजदूर कड़कड़ाती धूप में रोजगार मिलने की आस में दिन गिन रहे हैं, प्रधान सरकारी प्रस्तावों की फाइलें दबाए बैठे हैं और ऑनलाइन सिस्टम पासवर्ड मांग रहा है। अब नौगढ़ की पीड़ित जनता सीधे प्रशासन से पूछ रही है कि आखिर “साहब लोगों का टाइम टेबल क्या है?” और यह योजनाएं कागजों से निकलकर धरातल पर कब तक उतरेंगी?