नौगढ़ की बेटियों के हौसलों को लगी नई उड़ान: लालतापुर में शुरू हुआ समर कैम्प, हुनर सीखने के साथ स्कूटी दौड़ाएंगी ग्रामीण किशोरियां

 

चंदौली के नौगढ़ में पहाड़ और जंगलों के बीच रहने वाली बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की शानदार पहल शुरू हुई है। लालतापुर के "चिराग केन्द्र" समर कैम्प में किशोरियां सिलाई-ब्यूटीशियन के साथ स्कूटी चलाना सीखकर अपने आत्मविश्वास को बढ़ाएंगी।

 
 

लालतापुर गांव में समर कैम्प शुरू

हुनर के साथ बढ़ेगा बेटियों का आत्मविश्वास

सिलाई, हैंडीक्राफ्ट और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण

किशोरियों को आत्मनिर्भर बनाने की अनूठी पहल

एक महीने तक चलेगा विशेष समर कैम्प

 चंदौली जिले के अंतर्गत आने वाले सुदूर तहसील क्षेत्र नौगढ़ से महिला सशक्तिकरण की एक बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। पहाड़, घने जंगलों और बेहद सीमित संसाधनों के बीच जीवन बसर करने वाली नौगढ़ की बेटियां अब केवल घर की चौखट और चूल्हे-चौके तक सीमित रहने वाली नहीं हैं। वे अब अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। तहसील के लालतापुर गांव में सोमवार से शुरू हुए एक विशेष समर कैम्प (ग्रीष्मकालीन शिविर) में गांव की किशोरियों को कुछ ऐसा व्यावहारिक और आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो उन्हें भविष्य में आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की एक नई राह दिखाएगा।

चिराग केन्द्र में 25 मई से 25 जून तक चलेगा विशेष समर कैम्प
ग्रामीण क्षेत्र की इन होनहार बेटियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें हुनरमंद बनाने के लिए ग्राम्या संस्थान द्वारा संचालित शैक्षणिक केन्द्र “चिराग केन्द्र” में सोमवार से एक महीने के समर कैम्प का शानदार शुभारम्भ किया गया है। कैलेंडर के अनुसार यह विशेष प्रशिक्षण शिविर 25 मई से शुरू होकर आगामी 25 जून 2026 तक निरंतर संचालित किया जाएगा। इस कैम्प की सबसे खास और अनूठी बात यह है कि यहां बेटियां केवल पारंपरिक काम जैसे सिलाई-कढ़ाई और ब्यूटीशियन का कोर्स ही नहीं सीखेंगी, बल्कि वे अपने हाथों में स्कूटी की हैंडल पकड़कर पूरी ताकत और आत्मविश्वास के साथ सड़कों पर चलना भी सीखेंगी।

डर से बाहर निकलकर स्वरोजगार की ओर बढ़ेंगे कदम
इस सराहनीय पहल के बारे में बात करते हुए ग्राम्या संस्थान की कोऑर्डिनेटर नीतू सिंह ने बताया कि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की अधिकांश किशोरियां उचित संसाधनों, सही मार्गदर्शन और अवसरों की भारी कमी के कारण अक्सर हीनभावना या आत्मविश्वास की कमी महसूस करती हैं। बेटियों के मन से इसी डर और संकोच को पूरी तरह बाहर निकालने के उद्देश्य से इस समर कैम्प में उन्हें व्यावहारिक और आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेटियों को स्कूटी चलाने का प्रशिक्षण देना केवल एक वाहन सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य उनके भीतर आत्मनिर्भरता की भावना जगाना और स्वतंत्र रूप से स्वयं निर्णय लेने का साहस व कौशल विकसित करना है।

छुट्टियों का सही उपयोग, पहले ही दिन दिखा भारी उत्साह
इस एक माह के ग्रीष्मकालीन शिविर में क्षेत्र की किशोरियों को सिलाई, आकर्षक हैंडीक्राफ्ट (हस्तशिल्प) और प्रोफेशनल ब्यूटीशियन का संपूर्ण प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। संस्थान का मुख्य प्रयास यह है कि गर्मी की लंबी छुट्टियों के समय का उपयोग केवल घर पर समय बिताने में न हो, बल्कि कुछ नया हुनर सीखने में हो, जिससे भविष्य में ये किशोरियां स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा सकें। प्रशिक्षण के पहले ही दिन केन्द्र पर बेटियों के बीच जबरदस्त उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। स्थानीय नागरिकों का भी कहना है कि यदि इस प्रकार के रचनात्मक प्रयास लगातार जारी रहे, तो ग्रामीण अंचल की बेटियां भी शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के हर मोर्चे पर देश में अपनी एक नई और विशिष्ट पहचान दर्ज करा सकेंगी।