नौगढ़ में दर्दनाक हादसा: चूहे का काटना समझकर सोती रही महिला, सर्पदंश से मौत के बाद बेसहारा हुईं तीन बच्चियां
चंदौली के तेंदुआ गांव में जहरीले सांप के डंसने से 35 साल की मीना देवी की जान चली गई। मां की मौत के बाद बेसहारा हुई तीन मासूम बेटियों और बीमार पिता की इस त्रासदी को देख पूरे गांव की आंखें नम हो गईं।
नौगढ़ के तेंदुआ गांव में मातम
सर्पदंश से महिला की दर्दनाक मौत
तीन मासूम बेटियों का रोकर बुरा हाल
पिता पिछले दस साल से बीमार
आपदा कोष से मिलेगी आर्थिक मदद
चंदौली जिले के नौगढ़ इलाके से एक बेहद ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। क्षेत्र के तेंदुआ गांव में जहरीले सांप के डंसने से 35 साल की मीना देवी की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह से उजाड़ दिया है। मां के चले जाने के बाद जब उनकी तीन मासूम बेटियां रोने लगीं, तो उनकी चीखें सुनकर पूरे गांव के लोगों के आंसू छलक पड़े। अब इस परिवार में तीन छोटी बच्चियां और पिछले दस साल से मानसिक रूप से अस्वस्थ पिता ही बचे हैं।
चूहे का काटना समझकर सुबह तक सोती रहीं मीना
मिली जानकारी के मुताबिक, मीना देवी रोज की तरह रात में अपनी तीनों बेटियों के साथ घर के अंदर जमीन पर सो रही थीं। इसी दौरान रात में किसी जहरीले सांप ने उन्हें डंस लिया। नींद में होने के कारण मीना को लगा कि किसी चूहे ने उन्हें काटा है और उन्होंने इसे मामूली बात समझकर नजरअंदाज कर दिया। सुबह होते-होते जब सांप का जहर पूरे शरीर में फैल गया और उनकी हालत बिगड़ने लगी, तब जाकर घरवाले आनन-फानन में उन्हें नौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर भागे।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें
नौगढ़ स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों ने मीना देवी को प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया के लिए रेफर कर दिया। परिजन उन्हें लेकर चकिया अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मीना देवी को मृत घोषित कर दिया। इस खबर के गांव पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई।
10 साल से बीमार हैं पिता, बच्चियों के भविष्य पर संकट
इस गरीब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मीना देवी अपने पीछे 15 साल की आरती, 12 साल की ज्योति और 10 साल की सबसे छोटी बेटी प्रीति को छोड़ गई हैं। परिवार की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इन बच्चियों के पिता पन्नालाल पिछले करीब 10 वर्षों से मानसिक रूप से बीमार चल रहे हैं। घर में कमाने वाला कोई नहीं था, मीना देवी ही मेहनत-मजदूरी करके पूरे घर का खर्च चला रही थीं। अब उनके जाने के बाद इन मासूमों के रहने-खाने, पढ़ाई और सुरक्षा पर बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
प्रशासन देगा मुआवजा, पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
इस दुखद घटना की जानकारी मिलते ही मझगावां के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ईश्वर प्रसाद तुरंत मौके पर पहुंचे और उन्होंने चकरघट्टा थाना प्रभारी संतोष कुमार को मामले की सूचना दी। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले पर उपजिलाधिकारी (SDM) विनय मिश्रा ने कहा कि पीड़ित परिवार को आपदा राहत कोष के तहत सरकारी आर्थिक सहायता जल्द से जल्द दी जाएगी।
हालांकि, गांव के लोगों का कहना है कि सिर्फ एक बार मिलने वाली राहत राशि से इन बच्चियों का जीवन नहीं सुधरेगा। प्रशासन को इन तीनों बेटियों की पढ़ाई और रहने-खाने की स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए। इसके साथ ही ग्रामीणों ने यह सवाल भी उठाया कि क्या प्रशासन ऐसे अत्यंत गरीब और संवेदनशील परिवारों की पहले से सुध नहीं ले सकता, जिससे ऐसी व्यवस्थागत कमियों को दूर किया जा सके?