नौगढ़ में फूल मालाओं से विदा हुए रेंजर मकसूद हुसैन, विदाई में हर किसी की आंख थी नम
नौगढ़ में पहली बार रेंजर के सेवानिवृत्ति पर हुआ भव्य सम्मान समारोह
कार्यों को याद करके बिलख पड़ा स्टाफ
रो पड़े रेंजर—भावनाओं से भींगी विदाई
चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) मकसूद हुसैन के सेवानिवृत्ति पर ऐसा भव्य और भावनात्मक सम्मान समारोह हुआ, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। नौगढ़ में पहली बार किसी रेंजर को इस तरह सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।
रो पड़े रेंजर, बोले— यह प्रेम ही मेरी असली पूंजी
सम्मान समारोह में ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि सुजीत सिंह उर्फ सुड्डु, एसडीएम विकास मित्तल, सीओ नागेंद्र रावत, उप प्रभागीय वनाधिकारी वरुण प्रताप सिंह समेत अन्य रेंज अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने अंगवस्त्र, और स्मृति चिन्ह देकर रेंजर को सम्मानित किया। तिलक और फूल मालाओं से सजे पलों में माहौल भावुक हो उठा। इस उनकी पत्नी शकीला खातून को भी सम्मानित किया गया। इस क्षण पर स्टाफ की आंखें नम हो गईं और कई कर्मचारी बिलख पड़े। खुद मकसूद हुसैन भी भावनाओं पर काबू न रख सके और रो पड़े।
उन्होंने भावुकता से कहा—
“मुझे नौगढ़ में जो प्रेम, विश्वास और सम्मान मिला, वही मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। मैंने हमेशा संस्था और समाज के हित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करने की कोशिश की है। यदि मुझसे कोई गलती हुई हो तो क्षमा कर दीजिए।”
गंगा-जमुनी तहज़ीब की अनोखी मिसाल रहे मकसूद
अतिथियों ने अपने संबोधन में मकसूद हुसैन की कार्यशैली और सौहार्द्र की मिसाल को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मुसलमान होते हुए भी मकसूद हुसैन हमेशा हिंदू पर्व और धार्मिक आयोजनों में शामिल हुए। रामकथा हो या भागवत कथा— वे हर जगह मौजूद रहते थे। यही नहीं, अपने कार्यकाल में उन्होंने रेंज परिसर में हनुमान मंदिर का निर्माण कराया और विशाल भंडारे का आयोजन भी किया, जो गंगा-जमुनी तहज़ीब का अद्भुत उदाहरण रहा।
सादगी और विनम्रता ने जीता दिल, स्टाफ को दिया अंग वस्त्र
विदाई समारोह की विशेषता यह रही कि मकसूद हुसैन ने अपने सम्मान में आए अतिथियों को स्वयं शाल और वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। उनकी इस सादगी और विनम्रता ने सभी का दिल जीत लिया। कर्मचारियों ने कहा कि मकसूद साहब का व्यवहार हमेशा सरल और आत्मीय रहा। इसी दौरान उन्होंने पर्यावरण बचाने की अपील करते हुए कविता भी सुनाई—
“पेड़ कटने न देना कभी,
देखते रहना तू रात भर जागकर,
वरना गुलशन हमारा उजड़ जाएगा।”
अधिकारियों ने दी शुभकामनाएं, भोज और आत्मीयता का संगम
मुख्य अतिथि एसडीएम विकास मित्तल ने कहा कि मकसूद हुसैन ने सेवा काल में नौगढ़ को हमेशा आनंदमय और सौहार्द्रपूर्ण बनाया। वहीं सीओ नागेंद्र रावत ने वन अपराध की घटनाओं पर उनकी सख्ती को याद किया।
एसडीओ वरुण प्रताप सिंह ने कहा कि रिटायरमेंट के अंतिम दिन भी वे अतिक्रमण हटाने के काम में जुटे रहे। हर परिस्थिति में समस्या से जूझते देखा। अब वे जीवन की नई शुरुआत करेंगे।
रेंजर के सम्मान में सामूहिक भोज का भी आयोजन हुआ, जिसमें अधिकारी, कर्मचारी और गणमान्य लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। माहौल पूरी तरह आत्मीय और भावनाओं से भरा रहा।
हमेशा यादगार रहेगी विदाई
उपस्थित सभी लोगों ने कहा कि मकसूद हुसैन अपने पीछे ऐसी स्मृतियां छोड़ जा रहे हैं, जो आने वाले समय में भी प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। नौगढ़ ने रिटायर हो रहे रेंजर को न केवल फूल मालाओं से विदा किया, बल्कि उन्हें सौहार्द्र, सम्मान और प्रेम की जीवंत मिसाल के रूप में हमेशा के लिए यादगार बना दिया।