BSA साहब की इस आदत से गुस्से में हैं प्रधान जी, अब DM साहब से कर रहे हैं स्कूल में करप्शन की शिकायत
चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक में सरकारी स्कूल के फंड में लाखों के गोलमाल का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम प्रधान का आरोप है कि शिकायत करने पर बड़े अधिकारी उनका फोन तक नहीं उठा रहे हैं।
स्कूलों के बजट में बड़ा गोलमाल
ग्राम प्रधान का बीएसए पर आरोप
बिना काम कराए निकाले सरकारी पैसे
निलंबित हेडमास्टर 20 दिन में बहाल
क्या सरकारी स्कूलों में चल रही धांधली के खिलाफ आवाज उठाना ही अब गुनाह बन गया है? चंदौली जिले के नौगढ़ ब्लॉक से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां के लौवारी खुर्द ग्राम पंचायत के प्रधान यशवंत सिंह यादव ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सचिन कुमार पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं।
ग्राम प्रधान का सीधा दावा है कि जैसे ही उन्होंने इलाके के स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बच्चों की पढ़ाई में हो रही लापरवाही का मुद्दा उठाया, वैसे ही बड़े साहब ने उनसे दूरी बना ली। प्रधान का कहना है कि अधिकारी अब उनके मोबाइल नंबर से आने वाली किसी भी कॉल को रिसीव नहीं कर रहे हैं, जिससे साफ पता चलता है कि अधिकारी शिकायतों से बचना चाहते हैं।
'मेरे नंबर से फोन नहीं उठाते साहब, दूसरे के मोबाइल से करो तो तुरंत बात करते हैं'
प्रधान यशवंत सिंह यादव का कहना है कि उन्होंने प्राथमिक विद्यालय लेड़हां, लौवारी कला और लौवारी खुर्द की बदहाली को लेकर लगातार विभाग को जगाने की कोशिश की। उन्होंने अध्यापकों की कमी और हेडमास्टर की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाई। लेकिन कार्रवाई करने के बजाय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उनका फोन उठाना ही बंद कर दिया।
प्रधान ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि जब वह अपने खुद के नंबर से फोन करते हैं, तो घंटी बजती रहती है पर कोई जवाब नहीं मिलता। वहीं, जब वह किसी दूसरे व्यक्ति के मोबाइल नंबर से कॉल मिलाते हैं, तो अधिकारी तुरंत बात कर लेते हैं। थक-हारकर अब ग्राम प्रधान ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग से की है।
बिना रंगाई-पुताई और खेल सामान खरीदे ही डकार गए लाखों का कंपोजिट ग्रांट
डीएम को भेजे गए पत्र में प्रधान ने आरोप लगाया है कि कंपोजिट विद्यालय लौवारी खुर्द में पिछले दो सालों के दौरान आए कंपोजिट ग्रांट (सरकारी बजट) के पैसों में भारी बंदरबांट हुई है। कागजों पर तो सारा काम चकाचक दिखा दिया गया, लेकिन हकीकत में स्कूल की दीवारें बदरंग हैं, बाउंड्री वॉल टूटी पड़ी है और बच्चों के पीने के पानी की टंकी भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त है।
आरोप है कि स्कूल में न तो कोई खेल सामग्री खरीदी गई और न ही मरम्मत का कोई काम हुआ। स्कूल के हेडमास्टर ने फर्जी बिल और फर्जी रसीदें तैयार करके सरकारी खजाने से लाखों रुपये साफ कर दिए। प्रधान का कहना है कि अगर यह पैसा वाकई में स्कूल के विकास पर खर्च हुआ होता, तो आज बच्चों को ऐसी बदहाली का सामना नहीं करना पड़ता।
सस्पेंड हुए हेडमास्टर साहब महज 20 दिन में कैसे हो गए बहाल?
इस पूरे मामले में एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है। प्रधान ने बताया कि लगातार स्कूल से गायब रहने और लापरवाही बरतने के आरोप में हेडमास्टर भोलेनाथ को पहले निलंबित (सस्पेंड) किया गया था। लेकिन, विभागीय सांठगांठ के चलते महज 20 दिन के भीतर ही साहब की दोबारा बहाली कर दी गई। बहाल होते ही हेडमास्टर फिर से पुराने ढर्रे पर लौट आए हैं।
इस पूरे विवाद पर क्षेत्र के एबीएसए (ABSA) लालमणि कनौजिया का कहना है कि आरोपी हेडमास्टर को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण (जवाब) मांगा गया है। जवाब आने के बाद नियम के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि जब एक चुने हुए जनप्रतिनिधि का फोन ही अधिकारी नहीं उठा रहे, तो आम जनता की सुनवाई कैसे होगी।