नौगढ़ के दुर्गम पंडी गांव में विकास खोजने पहुंचे SDM साहब, नदारद रहे BDO विकास सिंह 

 

चंदौली के सुदूर पंडी गांव में ग्रामीणों की समस्याएं सुनने खुद एसडीएम और सीओ पहुंचे, लेकिन विकास की जिम्मेदारी संभालने वाले बीडीओ गायब रहे। चौपाल में ग्रामीणों ने आवास और शौचालय न मिलने का दर्द बयां किया।

 
 

नौगढ़ के जंगलों में प्रशासनिक चौपाल

बीडीओ विकास सिंह की गैरमौजूदगी पर चर्चा

पात्र ग्रामीणों को नहीं मिले आवास

डीएम तक पहुंचेगी जंगल की आवाज

मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसते ग्रामीण

 चंदौली जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये को उजागर करने वाली तस्वीर सामने आई है। तहसील नौगढ़ के अंतर्गत घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे पंडी गांव में सोमवार को एक प्रशासनिक चौपाल का आयोजन किया गया। इस चौपाल का मुख्य उद्देश्य सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को सुनना और उन तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना था। गांव के लोगों को उम्मीद थी कि आज उनकी सुध लेने पूरा अमला आएगा।

एसडीएम और सीओ पहुंचे, पर बीडीओ रहे नदारद
पंडी गांव के ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के लिए उप जिलाधिकारी (एसडीएम) विकास मित्तल और पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) नामेंद्र कुमार रावत स्वयं उबड़-खाबड़ रास्तों को पार करते हुए चौपाल में पहुंचे। आला अधिकारियों को अपने बीच पाकर ग्रामीण खुश तो हुए, लेकिन गांव में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की मुख्य जिम्मेदारी संभालने वाले खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) विकास सिंह की गैरमौजूदगी पूरे कार्यक्रम में चर्चा और आक्रोश का विषय बनी रही। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बीडीओ के न आने पर तीखे सवाल उठाए।

आवास और शौचालय के लिए तड़प रहे ग्रामीण
इस चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने अपनी बदहाली और विकास का दर्द बयां किया। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि गांव के कई पात्र और अत्यंत गरीब परिवार आज भी प्रधानमंत्री आवास योजना और बुनियादी शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह वंचित हैं। पात्र होते हुए भी उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या को सुनते ही एसडीएम विकास मित्तल ने मौके पर मौजूद अन्य संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और तत्काल आवश्यक कार्रवाई कर पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाने का सख्त निर्देश दिया।

बीडीओ की कार्यशैली पर जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
दुर्गम पंडी गांव में एसडीएम के पहुंचने के बाद हर तरफ यही चर्चा रही कि जब जिले के बड़े अधिकारी जंगल के आखिरी छोर तक आ सकते हैं, तो विकास की कमान संभालने वाले बीडीओ साहब क्षेत्र से गायब क्यों हैं? क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में कहा कि विकास कार्यों को गति देने के लिए अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय होना जरूरी है। ग्राम पंचायत के प्रशासक के रूप में काम कर रहे प्रधानों ने कहा कि यदि विकास विभाग गांवों और जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखे, तो भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।

जंगल के गांवों की आवाज अब पहुंचेगी डीएम के पास
ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए उप जिलाधिकारी विकास मित्तल ने कहा कि जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में बसे इन उपेक्षित गांवों की सभी समस्याओं से मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और जिलाधिकारी (डीएम) को व्यक्तिगत रूप से अवगत कराया जाएगा, ताकि इन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से काम किया सके। इस महत्वपूर्ण चौपाल में ग्राम पंचायत अधिकारी अश्विनी गौतम, ग्राम प्रधान लाल साहब खरवार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं मौजूद रहीं, जिन्होंने अपनी आवाज को बुलंद किया।