नौगढ़ में सांप के काटने के बाद अस्पताल की बजाय झाड़-फूंक में उलझे परिजन, युवक की दर्दनाक मौत

 

चन्दौली के नौगढ़ में सर्पदंश के शिकार एक युवक की समय पर इलाज न मिलने और झाड़-फूंक के चक्कर में जान चली गई। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अंधविश्वास से दूर रहकर तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है। पूरी खबर पढ़ें...

 
 

नौगढ़ में सर्पदंश से युवक की मौत

अस्पताल के बजाय कराई गई झाड़-फूंक

हालत बिगड़ने पर चकिया किया रेफर

समय पर इलाज न मिलना बना काल

अधीक्षक डॉ. अवधेश पटेल की चेतावनी

चंदौली जिले के अंतर्गत आने वाले नौगढ़ क्षेत्र में अंधविश्वास की वजह से एक हंसते-खेलते युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह दर्दनाक वाकया समाज में आज भी जड़े जमाए बैठे अंधविश्वास और अवेयरनेस की कमी को उजागर करता है। सांप के डसने के बाद यदि पीड़ित को सही समय पर डॉक्टरी इलाज मिल जाए तो उसकी जान आसानी से बचाई जा सकती है, लेकिन यहाँ परिजनों की एक बड़ी लापरवाही युवक के लिए काल बन गई।

अस्पताल के बजाय शुरू हुई झाड़-फूंक
जानकारी के अनुसार, नौगढ़ के बाघी नैया घाट गांव के रहने वाले भोनू बनवासी (उम्र करीब, पुत्र रामबृक्ष वनवासी) को मंगलवार की रात करीब 10:30 बजे एक जहरीले सांप ने डस लिया। सांप के काटने के बाद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, इस नाजुक परिस्थिति में समझदारी दिखाते हुए युवक को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाने के बजाय, परिजन ग्रामीण मान्यताओं और अंधविश्वास के जाल में फंस गए। वे रात में ही तांत्रिकों को बुलाकर युवक की झाड़-फूंक कराने लगे।

जब हालत बिगड़ी तब आई अस्पताल की याद
झाड़-फूंक के चक्कर में इलाज का सबसे महत्वपूर्ण और कीमती समय (गोल्डन ऑवर) धीरे-धीरे हाथ से निकलता चला गया। काफी देर बीत जाने के बाद जब जहर पूरे शरीर में फैल गया और युवक की हालत अत्यंत नाजुक होने लगी, तब जाकर परिजनों की आंखें खुलीं। आनन-फानन में बेसुध हो चुके युवक को लेकर परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) नौगढ़ पहुंचे।

उपचार के दौरान तोड़ा दम
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने युवक की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद उसकी बेहद नाजुक हालत को भांपते हुए चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया के लिए रेफर कर दिया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने युवक को बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

अधीक्षक डॉ. अवधेश पटेल की सख्त हिदायत
इस दुखद घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ के अधीक्षक डॉ. अवधेश पटेल ने आम जनता को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सर्पदंश के मामलों में झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों के भरोसे बैठना सीधे तौर पर मौत को आमंत्रण देना है। उन्होंने जनता से भावुक अपील की कि ऐसी आपातकालीन घटनाओं में एक मिनट भी बर्बाद किए बिना सीधे मरीज को सरकारी अस्पताल लाएं। अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में 'एंटी-स्नेक वेनम' (सांप के जहर काटने का इंजेक्शन) उपलब्ध है, जो समय पर मिलने पर शत-प्रतिशत जीवन बचा सकता है।

बरसात में बढ़ जाती हैं ऐसी दुखद घटनाएं
नौगढ़ के सुदूर ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद हर साल बरसात के मौसम में ऐसी त्रासदियां सामने आती हैं। भोनू बनवासी की असमय मौत पूरे समाज के लिए एक बड़ा सबक और चेतावनी है कि अंधविश्वास से दूर रहकर विज्ञान और सही चिकित्सा पद्धति को अपनाएं ताकि किसी और का चिराग इस तरह न बुझे।