भ्रष्टाचार छुपाने के लिए चंदौली के अधिकारियों ने की 'टाइम ट्रैवल', शिकायत से 6 दिन पहले ही लगा दी रिपोर्ट
चंदौली के सकलडीहा ब्लॉक में एक करोड़ के गबन के आरोपों की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। अधिकारियों ने शिकायत दर्ज होने के छह दिन पहले ही रिपोर्ट लगाकर मामले को दबाने की कोशिश की है।
सकलडीहा ब्लॉक में करोड़ों का गबन
शिकायत से पहले रिपोर्ट का खेल
फर्जी जीएसटी बिल का बड़ा घोटाला
अधिकारियों की मिलीभगत का खुलासा
आईजीआरएस शिकायत में बड़ी धांधली
चंदौली जिले के सकलडीहा ब्लॉक में भ्रष्टाचार का एक बेहद गंभीर और अजीबोगरीब मामला प्रकाश में आया है। यहां करोड़ों रुपये के गबन की जांच में लीपापोती करने की इतनी जल्दबाजी दिखाई गई कि शिकायत दर्ज होने से पहले ही अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट तैयार कर ली। भ्रष्टाचार को छुपाने का यह खेल सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
शिकायत से 6 दिन पहले 'निस्तारण'
मामले की शुरुआत 10 नवंबर 2025 को हुई, जब शिकायतकर्ता अरविंद कुमार ने IGRS पोर्टल पर शिकायत संख्या 40019625018640 दर्ज कराई। इसमें ग्राम पंचायत सकलडीहा में फर्जी जीएसटी बिलों के माध्यम से एक करोड़ रुपये से अधिक के गबन का गंभीर आरोप लगाया गया था। लेकिन जब जवाब सामने आया, तो हर कोई दंग रह गया। ग्राम पंचायत सचिव संदीप कुमार गौतम द्वारा दी गई रिपोर्ट 4 नवंबर 2025 की है। यानी शिकायत दर्ज होने से छह दिन पहले ही विभाग ने जांच पूरी कर रिपोर्ट भी लगा दी। यह स्पष्ट रूप से बैकडेटिंग और प्रशासनिक जालसाजी का मामला है।
दस्तावेजों में जालसाजी का खेल
जांच में केवल बैकडेटिंग ही नहीं, बल्कि दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ के भी प्रमाण मिले हैं। सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) सकलडीहा का पत्र दिनांक 3 दिसंबर 2025 को जारी हुआ, जिसमें 'श्याम इंटरप्राइजेज' के एक पत्र को संलग्न किया गया। विडंबना यह है कि श्याम इंटरप्राइजेज का वह पत्र खुद 4 दिसंबर 2025 का है। एक दिन बाद के पत्र को पहले की रिपोर्ट में संलग्न करना यह सिद्ध करता है कि पूरा विभाग शिकायतकर्ता को गुमराह करने और भ्रष्टाचार को ढकने के लिए साक्ष्य मिटाने में जुटा था।
अधिकारियों की मिलीभगत और मांग
इतना ही नहीं, जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO), चंदौली ने 6 दिसंबर 2025 को इसी संदिग्ध रिपोर्ट के आधार पर IGRS शिकायत को बंद करने का अनुरोध किया। इन तथ्यों से यह साफ है कि निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर उच्च अधिकारियों तक की मिलीभगत है।
शिकायतकर्ता अरविंद कुमार ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि IGRS शिकायत को तुरंत पुनः सक्रिय किया जाए और बैकडेटिंग करने वाले दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। चंदौली के लोगों में इस खुलासे के बाद भारी आक्रोश है और अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन अपने ही अधिकारियों की इस करतूत पर कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर भ्रष्टाचार की इस फाइल को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।